मोनिका अपनी अंतिम बड़ी शल्यक्रिया के लिए तैयार है – 19 जनवरी 2016

परोपकार

मुझे विश्वास है कि आप हमारे स्कूल की एक बहुत ख़ास लड़की, मोनिका को भूले नहीं होंगे, जिसकी हम विशेष देखभाल करते रहे हैं। वे पाठक, जो उसे नहीं जानते, उसके बारे में सारांश में यहाँ पढ़ सकते हैं या फिर उसकी दारुण व्यथा के विषय में मेरा पहला ब्लॉग यहाँ पढ़ सकते हैं। मई 2014 में मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव के एक भयंकर विस्फोट में वह बुरी तरह जल गई थी, जिसके चलते उसका चेहरा, छाती बाँहें और हाथ में कई तरह की विकृतियाँ आ गई थीं।

उस साल जब वह दिसंबर में वापस स्कूल आई तो हमें उसके साथ हुए हादसे का पता चला और हमने देखा कि कैसे इस हादसे ने उसकी शारीरिक गतिविधियों को अत्यंत सीमित कर दिया है: वह आँखों की पलकें झपका नहीं पाती थी, गरदन को हिला-डुला नहीं पाती थी, दाहिने हाथ को ऊपर नहीं उठा पाती थी और यहाँ तककि मुँह भी पूरा खोल नहीं पाती थी। हमें तुरंत लगा कि हमें उसकी मदद करनी होगी और अब, दो शल्यक्रियाओं के बाद वह अपने सिर को स्वतंत्रतापूर्वक घुमा-फिरा पाती है, बाँह उठा पा रही है और फिर से लगभग पूरी तरह दोनों आँखें खोल-बंद कर पा रही है।

नई-नई दवाइयों की मदद से उसकी हालत में बहुत सुधार हुआ है-और कुछ दिनों में हम इस दिशा में अगला कदम रखने वाले हैं: मोनिका पर तीसरी और अंतिम शल्यक्रिया की जानी है।

कल मैं शल्यक्रिया से पहले होने वाली आवश्यक जाँचों के लिए मोनिका और उसकी माँ को लेकर अस्पताल गया था। उसके शरीर की क्रियाशीलता के संबंध में यह अंतिम बड़ी शल्यक्रिया होगी। डॉक्टर्स इस बार उसके मुँह पर शल्यक्रिया करेंगे, जो अभी जली हुई त्वचा की सिकुड़न के चलते और ज़ख्म के निशानों के कारण सिर्फ लगभग दो अंगुल चौड़ा ही खुल पाता है। इसके अलावा वे एक बार पुनः उसकी दाहिनी आँख पर काम करेंगे क्योंकि पिछली शल्यक्रिया के बावजूद वह अभी भी पूरी तरह बंद नहीं हो पाती। वे उसके होठों के आस-पास के कट्स और ग्राफ्ट्स को हटाएँगे, जिससे वह ठीक तरह से अपना मुँह खोल पाए और इसके अलावा उसकी दाहिनी आँख पर भी एक बार और शल्यक्रिया करेंगे, जिससे वह अपनी आँख अच्छी तरह बंद कर सके।

डॉक्टरों में बताया कि मुँह की शल्यक्रिया के कारण कुछ दिनों के लिए उसके मुँह की सभी क्रियाओं पर पूरी तरह रोक लगानी होगी और तब उसे एक ट्यूब के ज़रिए खाना देना होगा। इसी कारण संभवतः उसे इस बार कुछ अधिक समय तक अस्पताल में रहना पड़ेगा, शायद दस दिनों के लिए। और उसके पश्चात्, पहले की तरह कुछ समय के लिए उसे अस्पताल के आसपास ही कहीं रहना होगा, जहाँ से वह नियमित रूप से पट्टियाँ बदलवाने और ज़रूरत पड़ने पर दूसरे कामों के लिए वहाँ जा सके।

स्वाभाविक ही, मोनिका शल्यक्रिया को लेकर पुनः एक बार घबराई हुई है, बल्कि इस बार कुछ ज़्यादा ही, क्योंकि इस बार कई दिनों तक वह मुँह भी नहीं खोल पाएगी और यह उसे पता है। लेकिन फिर भी ठीक होकर पुनः अच्छे से खा-पी सकने की आशा से वह बहुत खुश भी है!

हम भी उसके सामने सकारात्मक पहलुओं पर ही बात करते हैं: बस, यह आखिरी बड़ा ऑपरेशन है और उसके बाद उसे कभी भी लंबे समय के लिए अस्पताल में नहीं रहना पड़ेगा, शल्यक्रिया के बाद डॉक्टर्स उसके चेहरे की त्वचा पर काम करके उसे बिल्कुल चिकना कर देंगे और फिर उसका रंग भी एकदम उसके शरीर के रंग जैसा प्राकृतिक हो जाएगा, आदि आदि।

लेकिन इस समय हम जिस काम को करने निकले हैं, उस पर पूरा फोकस कर रहे हैं और हमें विश्वास है कि हमेशा की तरह इस बार भी वह सुचारू रूप से संपन्न हो जाएगा। मैं उसके बारे में आपको लगातार अवगत कराता रहूँगा- और हमेशा की तरह हमारे इस महती काम में आपकी मदद के लिए भी हम शुक्रगुज़ार रहेंगे! दुनिया भर से मिल रही आपकी शुभकामनाओं और मदद के लिए एक बार फिर शतशः धन्यवाद!

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