घर पर संगमरमर का फर्श लेकिन अच्छी शिक्षा के लिए पैसे नहीं! 30 जनवरी 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आज मैं आपका परिचय हमारे स्कूल की तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली जया नाम की एक लड़की से करवाना चाहता हूँ। वह दस साल की एक बहुत ही हंसमुख लड़की है और ऐसे इलाके में रहती है, जहाँ हमारे स्कूल के बहुत से बच्चों के घर हैं।

जब हम जया के घर पर पहुँचे तो देखा कि वहाँ एक प्रवेश द्वार तो है लेकिन वह लोगों को घर से बाहर रखने के लिए नहीं है बल्कि मामूली पर्दा करने के लिए भर है कि लोग अंदर झाँककर न देख पाएँ। अगर कोई अंदर जाना चाहता है तो वह आसपास की किसी भी इमारत से उनके घर दाखिल हो सकता है क्योंकि न सिर्फ उनकी दीवारें मिली हुई हैं बल्कि उनकी छतें भी एक ही ऊंचाई की हैं। आप एक छत से दूसरी छत पर और इस तरह एक घर से दूसरे घर में आसानी के साथ आ-जा सकते हैं। निश्चय ही आप दूसरे घर के आँगन में ताक-झाँक भी बड़ी आसानी से कर सकते हैं और इसलिए जल्द ही हमने अपने आपको बहुत सारे पड़ोसियों से घिरा पाया, जो हमारी छोटी सी मुलाक़ात के साक्षी बनने वहाँ आ गए थे।

जया अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी है। उसकी सबसे बड़ी शादीशुदा बहन बाईस साल की है। चार साल पहले उसकी शादी हुई थी और उसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। उसके बाद 18 साल का भाई है, जो ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता है, फिर 15 साल की बहन है, जो दसवीं में है और पास ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ती है।

जया का पिता संगतराश है और फर्श पर पत्थर लगाने का काम करता है। काम से फुरसत निकालकर उसने अपने छोटे से घर पर भी सस्ते संगमरमर का फर्श बना लिया है, जो बिना पलस्तर की दीवारों और स्वाभाविक ही, अत्यंत मामूली फर्नीचर और दरवाज़े-खिड़कियों के साथ बड़ा विचित्र सा लगता है। जया की माँ नहीं जानती कि वह कितना कमाता है लेकिन बताती है कि किसी तरह उनके घर का खर्च निकल ही आता है। वह बड़े गर्व के साथ बताती है कि उसका पति वृन्दावन के कुछ सबसे मशहूर ठेकेदारों और भवन निर्माताओं (बिल्डरों) के साथ काम करता है। कभी-कभार ही ऐसा होता है कि उसके पास काम नहीं होता और तब उनके यहाँ आर्थिक तंगी हो जाती है और उन्हें परिवार के दूसरे सदस्यों से क़र्ज़ लेना पड़ता है।

वे खुश हैं कि उन्हें मकान-किराया अदा नहीं करना पड़ता-जया के दादा का घर अब उनकी मिल्कियत है। घर में दो कमरे हैं, एक आँगन और खुली छत है। हाँ, जब सारे सदस्य घर पर होते हैं और बड़ी बहन भी अपने दोनों बच्चों को लेकर आ जाती है तब उसमें थोड़ी भीड़भाड़ हो जाती है और बड़ी मुश्किल से सारे अट पाते हैं! पर किसी को इस बात का कोई रंज नहीं है, कम से कम घर तो अपना है, वे कहते हैं!

जया अच्छी विद्यार्थी है और ख़ास तौर पर उसे विज्ञान और सामाजिक अध्ययन विषय बहुत पसंद हैं। अपनी खुशमिजाजी से वह बहुत जल्दी मित्र बना लेती है और उसके बहुत से मित्र हैं, जिनमें उसके इलाके के भी बहुत से बच्चे शामिल हैं।

अगर आप जया और उस जैसे दूसरे बच्चों की मदद करना चाहते हैं कि वे हमारे स्कूल में उत्कृष्ट और मुफ़्त शिक्षा पा सकें और तो आप किसी एक बच्चे या स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित कर सकते हैं!