होम लोन कैसे प्राप्त हुआ – हमारे स्कूल के बच्चे – 9 जनवरी 2015

परोपकार

आज मैं आपका परिचय रिया और अदिति से करवाने जा रहा हूँ। दोनों ही सन 2007 में हमारे स्कूल की शुरुआत से ही हमारे यहाँ पढ़ रही हैं।

रिया अब ग्यारह साल की हो चुकी है और अदिति नौ साल की है। उनकी छोटी बहन, परी अभी सिर्फ साढ़े चार साल की है। एक माह पहले उनका परिवार अपने नए घर में रहने चला गया। एक बैंक से लोन लेकर उन्होंने अपना नया घर बनवाया है। उन्होंने 480000 रुपए का लोन लिया है जो लगभग 8000 यू एस डॉलर के बराबर है और जिसे 3000 रुपए यानी लगभग 50 डॉलर की मासिक की किश्तों में अदा किया जाना है। यह किश्त माँ की मासिक तनख्वाह से कुछ ज़्यादा है।

रिया की माँ एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका है। उनका पिता पुजारी या पुरोहित है और कभी-कभी तीर्थयात्राओं के मौसम में, जब बहुत से लोग विभिन्न धार्मिक समारोहों के लिए उसे नियुक्त कर लेते हैं, अच्छा खासा काम पा जाता है। लेकिन साल में कई ऐसे भी मौके आते हैं जब उसके पास ज़्यादा काम नहीं होता। इसलिए पिता की आमदनी का ठीक-ठीक अनुमान लगा पाना मुश्किल है और उन्हें हर माह कुछ न कुछ बचत करनी होती है, जिससे इन अशुभ महीनों में घर का खर्च ठीक तरह से चल सके!

वे सिर्फ इसलिए लोन ले पाए कि उनकी दोनों बड़ी लड़कियाँ हमारे स्कूल में मुफ्त शिक्षा पा रही हैं, जहाँ उन्हें कोई फीस अदा नहीं करनी पड़ती! अभी भी घर पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है- दीवारों पर प्लास्टर नहीं हो पाया है और सिर्फ कुछ जगहों पर ईटों पर पुताई भर कर दी गई है। जब भी कुछ अधिक आमदनी होगी, वे उसे थोड़ा-थोड़ा करके पूरा करेंगे।

अपने स्कूल के बच्चों के परिवारों को बेहतर जीवन की तरफ बढ़ता देखकर हमें खुशी होती है! अगर हम उनकी इतनी ही मदद करते रह पाए तो भी वे धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़े हो पाएँगे और तब उनके बच्चे भी पर्याप्त शिक्षा शिक्षा प्राप्त करके कोई काम-धंधा कर पाएँगे या कोई नौकरी ढूँढ़ लेंगे और अपना कमा-खा सकेंगे। और यह हमारे लिए भी किसी ईनाम से कम नहीं होगा!

बच्चों की शिक्षिकाएँ बताती हैं कि दोनों लड़कियाँ बहुत अच्छी विद्यार्थी हैं और शांति और मेहनत के साथ पढ़ाई-लिखाई करती हैं। इसके अलावा वे मिलनसार भी हैं और उनकी कई सहेलियाँ हैं।

अभी कई साल हम उनकी मदद करते रहेंगे! आप भी इस काम में सहभागी हो सकते हैं! किसी एक बच्चे या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करें!

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