माता-पिता आर्थिक रूप से असमर्थ हैं इसलिए वह नाना-नानी के साथ रहती है – हमारे स्कूल के बच्चे – 19 जून 2015

परोपकार

आज मैं आपका परिचय एक और लड़की, मोनिका से करवाना चाहता हूँ, जो सिर्फ दो हफ्ते बाद से हमारे स्कूल में पढ़ना शुरू करेगी। वह पाँच साल की है और पिछले दो साल से अपने नाना-नानी के साथ यहीं, वृंदावन में रह रही है।

मोनिका की माँ 25 साल उम्र की है और अपने माता-पिता के पाँच बच्चों में सबसे बड़ी है। सिर्फ सोलह साल की उम्र में उसका विवाह हो गया था और मोनिका उसकी पहली संतान है। उसका पति यानी मोनिका का पिता मजदूरी करता है और अधिकतर दूकानदारों के यहाँ से निर्माण-स्थलों तक ईंटों की ढुलाई का काम करता है। उनके दो और बच्चे हैं, जो अभी तीन और दो साल के हैं। जब सबसे छोटा वाला बच्चा पैदा हुआ तो मोनिका की माँ ने खुद अपनी माँ से मोनिका को अपने पास रखने की विनती की। अपने पति की छोटी सी आमदनी में उसके लिए तीन छोटे-छोटे बच्चों को पालना संभव नहीं था।

नानी, जिसके खुद के दो-दो बच्चे घर पर हैं, मान गई। अब मोनिका अपने नाना-नानी के यहाँ, अपनी 14 साला मौसी और 13 साल के मामा के साथ रहती है।

नाना एक धार्मिक नौटंकी में धार्मिक कथाओं का मंचन करता है। यह ऐसा काम है, जहाँ हमेशा लोगों की ज़रूरत होती है मगर काम करने वाले को ज़्यादा पैसे नहीं मिल पाते। इसलिए उसकी पत्नी भी एक आश्रम और एक गेस्ट हॉउस में नौकरानी का काम करती है। दोनों मिलकर लगभग 7000 से 9000 रुपए यानी 120 से 150 यू एस डॉलर तक कमा लेते हैं, जिसमें से 2000 रुपए यानी 30 डॉलर के आसपास वे घर का किराया चुकाते हैं। घर में एक बड़ा सा कमरा और उससे लगा एक छोटा कमरा है- यह छोटा वाला कमरा वास्तव में संडास और बाथरूम है लेकिन क्योंकि अभी उसमें पानी का कनेक्शन नहीं है और वैसे भी कमरा महज ईंटें रखकर तैयार किया गया ढाँचा भर है, इसलिए वे उसका इस्तेमाल रसोई के रूप में करते हैं।

बड़े गर्व से नानी बताती है कि कैसे उसने अपनी तीन बड़ी बेटियों को 15 या 16 साल की उम्र में, उनके 8वीं या 9वीं पास करते ही ब्याह दिया था। यह गर्व की बात होती है- क्योंकि एक माँ के रूप में उसका यह सबसे बड़ा उत्तरदायित्व था!

उसकी चौथी बेटी से, जो मोनिका की बगल में बैठी थी, हमने पूछा कि क्या वह अभी स्कूल जाती है तो पता चला कि नहीं जाती। उसने 11वीं तक पढ़ाई की है लेकिन फिर उन्होंने घर बदल लिया और उसकी पढ़ाई छूट गई। हालाँकि हम उसे आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहे मगर हम जानते हैं कि नानी की योजना शायद कुछ और होगी: जल्द से जल्द उसके लिए लड़का ढूँढ़ना!

लेकिन मोनिका के लिए हमने सुनिश्चित किया है कि उसे परिवार में सबसे अच्छी शिक्षा प्राप्त हो और वह भी मुफ़्त! हम अपने स्कूल में उसका इंतज़ार कर रहे हैं- और जब हम उसके घर गए थे तभी से वह हमारे यहाँ, स्कूल आने के लिए बेताब हो रही है, उसके लिए कुछ दिनों का इंतज़ार भी मुश्किल हो रहा है!

अगर आप मोनिका जैसे बच्चों की कुछ सहायता करना चाहते हैं तो आपका स्वागत है- किसी एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके आप ऐसा कर सकते हैं! शुक्रिया!

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