मैं पहले ही आपको अंजलि से मिलवा चुका हूँ, जिसकी माँ उसे और उसके पिता को छोड़कर चली गई है और अब उसकी चाची ही अधिकतर उसकी देखभाल करती है। यह चाची दिव्यान्श की माँ है और इस तरह दिव्यान्श और अंजलि चचेरे भाई-बहन हैं।
दिव्यान्श आठ साल का है और हमारे स्कूल की दूसरी कक्षा में पढ़ता है। उसका पिता उसी होटल में काम करता है जिसमें अंजलि का पिता करता है। वह 60 डॉलर यानी लगभग 3500 रुपए मासिक कमाता है और उसे भी अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहने के लिए एक कमरा उपलब्ध है।
वे लोग मूलतः फरीदाबाद के रहने वाले हैं और सिर्फ पाँच साल पहले वृन्दावन आकर बस गए हैं। दो साल पहले दिव्यान्श की माँ को पेटदर्द की शिकायत हुई। पहले तो उसने सोचा कि मामूली तकलीफ होगी और कुछ दिन में ठीक हो जाएगी लेकिन जब दर्द ठीक नहीं हुआ तो वह डॉक्टर के पास गई। वृन्दावन में डॉक्टर निश्चित नहीं कर पाए कि उसे क्या बीमारी है। उन्होंने कुछ टेस्ट करवाए और हालांकि उस परिवार के लिए ये टेस्ट काफी महंगे भी थे मगर उनसे भी कुछ पता नहीं चला। दिव्यान्श की माँ ने दिल्ली में रहने वाली अपनी बहन से मदद मांगी, जो वहाँ एक सरकारी अस्पताल के पास रहती थी और जहां गरीबों की मुफ्त जांच और उनका मुफ्त इलाज होता है। बहुत इंतज़ार के बाद आखिर उसे मिलने का समय दिया गया। वहाँ भी बहुत जांच की गई और पता चला कि उसे लीवर की बीमारी हो गई है- संभवतः, खराब पीने के पानी की वजह से। उन्होंने अब पानी शुद्ध का उपकरण (वाटर-फिल्टर) लगवा लिया है और अब उसका पेटदर्द ठीक हो गया है!
दिव्यान्श वृन्दावन में रहना पसंद करता है और क्योंकि अंजलि भी उनके साथ ही रहती है, उसे खेलने के लिए भी कोई मिल गया है। वह चतुर लड़का है लेकिन इस बार उसकी शिक्षिकाओं ने बताया कि वह खेलता ज़्यादा है और पढ़ने के लिए बैठने में उसका मन नहीं लगता। घर में वह घर के ही दूसरे बच्चों के साथ खेलता रहता है और स्कूल में भी उसकी कक्षा के बहुत से दोस्त उसे उपलब्ध हैं।
हमें विश्वास है कि हमारी शिक्षिकाओं के थोड़े से प्रोत्साहन से वह पढ़ने के आनंद से भी वाकिफ हो जाएगा-और हम जानते हैं कि यह उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए एक आधार का काम करेगा!
अगर आप दिव्यान्श जैसे दूसरे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो किसी एक बच्चे को प्रायोजित करके या हमारे स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन की व्यवस्था करके बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा और मुफ्त भोजन के इस सत्कार्य में सहभागी हो सकते हैं!
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