अगर आपकी पाँच लड़कियां हैं तो जल्द से जल्द उनका ब्याह कर दें – हमारे स्कूल के बच्चे – 8 अगस्त 2014

परोपकार

कुछ माह पहले मैंने अपने स्कूल की एक लड़की, पूजा का ज़िक्र किया था, जिसके इस वर्ष होने वाले विवाह को हम स्थगित करवाने में कामयाब हुए थे। आज मैं उसके परिवार के दूसरे सदस्यों से आपका परिचय करवाना चाहता हूँ, जिसमें उसके तीन सहोदर और उनके माता-पिता शामिल हैं।

पूजा की दो बड़ी बहनें पहले ही वयस्क हो चुकी हैं, विवाहित हैं और दोनों के दो-दो बच्चे हैं। पूजा अभी 15 साल की है और उम्र के लिहाज से घर में सबसे बड़ी है। उसके बाद 14 साल का मनोज है, फिर 10 साल की पिंकी है और अंत में सबसे छोटा तन्नू है, जो 7 साल का है।

अगर आप मेरे वे ब्लॉग लगातार पढ़ते रहे हैं, जिनमें मैं अपने स्कूल के बच्चों को आपसे मिलवाता रहता हूँ तो आप इस परिवार में दिखाई दे रहे परंपरागत स्वरूप को पहचान गए होंगे: छह बच्चे और उनमें से पाँच लड़कियाँ! अभिभावकों ने शायद मनोज के जन्म से पहले और बाद में कोशिश की थी कि और लड़के हो जाएँ। अंत में नतीजा यह हुआ कि उनकी पाँच लड़कियाँ हो गईं, जिन्हें अब उन्हें ब्याहना होगा और सबके लिए हर बार दहेज और विवाह की पार्टी के इंतज़ाम में काफी रकम की ज़रूरत पड़ेगी क्योंकि विवाह की पार्टी पारंपरिक रूप से वधू के परिवार वाले ही करते हैं।

पहले उनके पास खुद का घर भी था, कम से कम घर का एक अपना हिस्सा। पिता और उसके दो भाइयों को वह पुश्तैनी मकान विरासत में मिला था मगर उनकी दो बड़ी लड़कियों के ब्याह के समय मकान का अपना हिस्सा बेचना पड़ा। क्योंकि उन दोनों लड़कियों के भी अब दो बच्चे हैं, कहा जा सकता है कि विवाह के वक़्त दोनों ही किशोर-वय ही रही होंगी! अब परिवार को किराये के मकान में रहना पड़ रहा है।

पिता साधारण मजदूर है। पहले वह रिक्शा चलाता था मगर अब जो मिल जाए, कोई भी साधारण मजदूरी का काम करता है और अपने परिवार के लिए थोड़े से पैसे ही घर ला पाता है। जिन दो कमरों को उसने किराए पर लिया हुआ है, पिता की मासिक कमाई का आधा हिस्सा उन कमरों का किराया अदा करने में ही खर्च हो जाता है। मकान मालिक ने कहा है कि अगर वे मकान के संडास का भी उपयोग करना चाहते हैं तो उन्हें और भी अधिक किराया देना होगा। पैसा बचाने की गरज से वे बाहर मैदान में ही दिशा-मैदान के लिए निकल जाते हैं! फिर भी उनके पास भोजन और कपड़े-लत्ते के लिए ज़्यादा कुछ नहीं बच पाता, चार बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की तो बात करना ही व्यर्थ है!

इसलिए पूजा, मनोज, पिंकी और तन्नू हमारे स्कूल में पढ़ने आते हैं। वे लोग क्रमशः छठी, चौथी, दूसरी कक्षा और अपर के जी में पढ़ते हैं। शिक्षिकाएँ बताती हैं कि पूजा पढ़ने और पाठ समझने में तेज़ नहीं है लेकिन कोशिश बहुत करती है। मनोज कक्षा में अपने अच्छे व्यवहार के कारण प्रभावित करता है जबकि वह दोस्तों के साथ चुटकुलेबाज़ी करने में भी आनंद लेता है। पिंकी और तन्नू, जो सबसे छोटे हैं, बहुत चंचल हैं और शिक्षिकाएँ कहती हैं कि वे पढ़ने में और खेलों और छोटी कक्षाओं में सिखाई जाने वाली कविताओं को कंठस्थ करने में भी सबसे तेज़ हैं।

हमें आशा है कि हम इन सभी बच्चों को कई साल तक शिक्षित करते रह सकेंगे, जिससे वे पढ़-लिख सकें, कुछ सीख सकें और अपना भविष्य बेहतर बना सकें! हम अपनी तरफ से अच्छे से अच्छा करने का प्रयास करते रहेंगे।

आप इन बच्चों की मदद करने के हमारे काम में हाथ बंटा सकते हैं! किसी एक बच्चे को या स्कूल के सभी बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके!

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