लड़के की चाहत ने एक और परिवार को आर्थिक रूप से विपन्न कर दिया – हमारे स्कूल के बच्चे – 28 मार्च 2014

आज मैं आपका परिचय दो बहनों के साथ करवाना चाहता हूँ: रेणु और हेमलता, जो एक विशाल परिवार की सदस्य हैं- उनकी चार बहनें और हैं और उन छह बहनों के बीच सिर्फ एक भाई हैं। इस कारण उनके पिता की आमदनी उन सभी को भोजन मुहैया कराने, अच्छे स्कूल में पढ़ाने-लिखाने और अच्छे परिवारों में उन सभी का विवाह सुनिश्चित करने के लिहाज से अपर्याप्त है। हर चीज़ की कीमत होती है- और उनके पास कभी भी पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं रहा!

जैसा कि अपने स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के परिवारों में हमने देखा है, इन बच्चों के माता-पिता ने भी लड़के की चाहत में पहले चार लड़कियां पैदा कीं और आखिर जब एक लड़का हो गया तो उसके बाद भी एक और लड़के की प्रत्याशा में दो लड़कियां और पैदा कर लीं! स्वाभाविक ही यह उस परिवार पर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ सिद्ध हुआ। पिता एक फैक्टरी में काम करता है और मासिक 100 डॉलर यानी लगभग 6000 रुपए कमाता है।

इतने पैसे में भी वह अपनी दो लड़कियों और लड़के की स्कूल फीस चुका रहा है। सबसे बड़ी दो लड़कियों की शादियाँ पहले ही हो चुकी हैं। जब हम उनके घर पहुंचे तब उनमें से एक घर में मौजूद थी। उसकी उम्र 17 से ज़्यादा प्रतीत नहीं होती मगर पिता ने बताया कि वह अठारह साल की है। उसका एक साल का बेटा उसकी गोद में खेल रहा था।

यह विशाल परिवार एक छोटे से घर में रहता है, जिसमें निचली मंज़िल पर दो कमरे हैं और छत पर रसोई है। छत पर ही एक संडास और थोड़ी सी खुली जगह भी है। इस खुली जगह में एक दीवार खड़ी है- जिसे एक साल पहले एक अतिरिक्त कमरा बनवाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था लेकिन वह जैसे किसी करिश्मे का इंतज़ार कर रहा है कि पैसा आए और कमरा बनकर पूरा हो! लेकिन निकट भविष्य में ऐसी कोई संभावना नहीं है कि पिता वह कमरा बनवा सके। वह अपने मालिक (नियोक्ता) से अक्सर उधार लेता रहता है क्योंकि उसका वेतन परिवार के दैनिक खर्च के लिए ही अपर्याप्त होता है।

बड़े बच्चों की पढ़ाई का खर्च ही इतना बढ़ गया है कि अब वे अपने लड़के को उसके वर्तमान स्कूल से निकालकर उसे भी बहनों के साथ हमारे स्कूल में भर्ती कराने पर विचार कर रहे हैं। जिस कक्षा में अभी वह पढ़ रहा है उससे निचली कक्षा में ही उसे हमारे स्कूल में दाखिला मिलेगा क्योंकि वह ठीक तरह से अंग्रेज़ी नहीं जानता-लेकिन यह अच्छी बात है कि यहाँ उसकी पढ़ाई मुफ्त होगी, जैसी कि उसकी दोनों बहनों की भी हो रही है!

दस साल की हेमलता और आठ की रेणु उस घर में रहने वाले परिवार के सबसे छोटे बच्चे हैं। वे दोनों अपने सभी सहोदरों की तरह हंसमुख और खुशमिजाज़ दिखाई देते हैं। हेमलता को एक जन्मजात तकलीफ है: उसकी एक आँख के पपोटे हमेशा सूजे रहते हैं, जिसके कारण वह आँख थोड़ी सी बंद दिखाई देती है हालांकि उसे अच्छी तरह दिखाई देता है। इसके अलावा उसके शरीर पर एक बड़ा-सा घाव का निशान भी है: जब वह डेढ़ साल की थी, एक बार छत की मुंडेर पर बैठी हुई थी और तभी एक बंदर उसकी ओर लपका। कहना मुश्किल है कि बंदर को अचानक अपने सामने पाकर वह चौंक गई और नीचे गिर पड़ी या बंदर ने ही उसे धक्का दे दिया था मगर इस हादसे ने जीवन भर के लिए यह घाव का निशान दे दिया है।

दोनों लड़कियां स्कूल में अच्छी तरह पढ़ रही हैं और परीक्षाओं में औसत से बेहतर नंबर लेकर आती हैं। शिक्षिकाओं द्वारा पढ़ाए जाने वाले सबक वह बहुत एकाग्रचित्त होकर समझने की कोशिश करती हैं। रेणु समझने में थोड़ा अधिक वक़्त लेती है लेकिन एक बार समझ जाए तो सबक उसके दिमाग में पक्का बैठ जाता है!

अगर आप हेमलता और रेणु जैसे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो आप किसी एक बच्चे को प्रायोजित करके या बच्चों के भोजन का एक दिन का खर्च उठाकर ऐसा कर सकते हैं।

धन्यवाद!

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