वास्तविक पढ़ाई के लिए स्कूल जाना – हमारे स्कूल के बच्चे – 7 फरवरी 2014

परोपकार

आज फिर शुक्रवार है और अपने स्कूल के किसी बच्चे से आपका परिचय करवाने का दिन। आज मैं आपका परिचय तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले तेरह वर्षीय अखिल से करवा रहा हूँ।

अखिल अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटा है और परिवार का दूसरा पुत्र है। उसका बड़ा भाई दसवीं तक स्कूल गया और जब दसवीं में फेल हो गया तो स्कूल जाना छोड़ दिया। वह ड्राप-आउट है, जिसने न तो स्कूल में कुछ सीखा और न ही वह कोई काम जानता है। तो इस समय वह वही सब कर रहा है, जो ऐसे लोग करते हैं यानी: कुछ भी नहीं!

लेकिन अखिल की सबसे बड़ी बहन उसके ठीक विपरीत है। इस समय वह ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रही है। उसे सीखने में बहुत रुचि है और उसे विश्वास है कि इस साल वह अच्छे नंबरों से पास हो जाएगी। वह पढ़ाई के अलावा घर पर सिलाई मशीन पर सिलाई भी करती है और वह सब कुछ सी लेती है, जिसकी परिवार के किसी सदस्य को ज़रूरत होती है। इसके अलावा वह पड़ोसी महिलाओं के कपड़े भी सीती है, जिससे परिवार के लिए बहुमूल्य, कुछ अतिरिक्त रुपए भी कमा लेती है।

उसकी इस मदद को परिवार कृतज्ञता पूर्वक स्वीकार करता है क्योंकि बच्चों का पिता माह में 5000 रुपये यानी लगभग 80 डालर कमाता है। जब वह युवा था तब उसने नहीं सोचा था कि इतना पढ़-लिख लेने के बावजूद हर माह वह इतने कम रुपए कमा पाएगा। जी हाँ, वह यूनिवर्सिटी में पढ़ा-लिखा बी एड ग्रेजुएट है हालांकि वह कभी भी पढ़ाई में इतना अच्छा नहीं रहा कि उसे बेहतर वेतन वाली कोई अच्छी नौकरी मिल सके। इस तरह आज वह एक स्थानीय धर्मार्थ संगठन के भंडार-गृह की देखभाल करता है।

एक बी एड पास व्यक्ति जब अपनी एक बेटी पर पैसा खर्च करता है तो आपको लगता है कि यह व्यक्ति पढ़ाई की महत्ता समझता होगा लेकिन जब आप उसकी दूसरी बेटी का स्कूल रेकार्ड देखते हैं तो आपकी यह धारणा गलत सिद्ध होती है। वह कई साल हमारे स्कूल में पढ़ने आती थी लेकिन अचानक एक साल की शुरुआत में उसने आना बंद कर दिया। उसके अभिभावकों से पता किया तो हमें बताया गया कि उसे किसी दूसरे स्कूल में भेज दिया गया है। हमारे स्कूल से वह दूसरी कक्षा पास करके निकली थी और जब हमने उससे पूछा तो उसने बताया कि अब नए स्कूल में वह सातवीं कक्षा में पढ़ रही है! उसके पिता ने उस स्कूल के शिक्षकों से कुछ ले-देकर उसे पाँचवी पास का सर्टिफिकेट दिलवा दिया था; इस तरह बिना स्कूल गए और तीसरी से पाँचवी तक बिना पढ़ाई किए वह आज सातवीं कक्षा में पढ़ रही है।

लेकिन अखिल हमारे स्कूल में ही आता रहा और यहीं पढ़ता रहा और उसके शिक्षक बताते हैं कि परीक्षा में प्राप्त नंबरों को देखा जाए तो वह एक औसत विद्यार्थी दिखाई देता है लेकिन कक्षा में पूरी लगन के साथ पढ़ने की कोशिश करता है। वे यह भी बताते हैं कि जब भी पढ़ाई से इतर कोई बात कक्षा में होती है तो अखिल सबसे पहले बोलने के लिए खड़ा हो जाता है। वह बहुत ज़िंदादिल और बातूनी बच्चा है। स्कूल आना उसे बहुत पसंद है और यहाँ जितनी देर रहता है अपने यार-दोस्तों के साथ समय का पूरा-पूरा आनंद उठाता है।

अखिल को पूरी तरह मुफ्त पढ़ाकर हम इस परिवार की मदद कर रहे हैं। अगर आप चाहते हैं कि अखिल जैसे और बच्चों को पढ़ाने के हमारे इस प्रयास में कोई मदद करें तो आप किसी एक बच्चे को प्रायोजित करके या बच्चों के एक दिन के भोजन का खर्च वहन करके ऐसा कर सकते हैं।

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