जुआ और शराब के कारण घर-खर्च के लिए कुछ भी नहीं बच पाता – हमारे स्कूल के बच्चे- 7 मार्च 2014

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आज एक बार फिर शुक्रवार है और आज के दिन आप हमारे स्कूल के किसी बच्चे का परिचय प्राप्त करते हैं. आज आठ साल की एक खुशमिजाज़ लड़की, शैली, जो हमारे स्कूल की सबसे निचली कक्षा, लोअर के जी में पढ़ रही है, जहाँ बच्चों को वर्णमाला, बालगीत और कविता-पाठ सिखाया जाता है.

शैली कभी-कभी ‘सेल’ कहकर अपना परिचय कराती है और अक्सर आप उसे इधर-उधर दौड़ते-भागते, हँसते-खिलखिलाते और खेलते-कूदते देख सकते हैं. इसी तरह उससे हमारी मुलाकात भी एक लड़के के यहाँ हुई थी, जिससे मिलने हम उसके घर आए थे. वह अभी तक अपने स्कूल ड्रेस में ही थी, जब कि स्कूल से वह कई घंटे पहले आ चुकी होगी- उसे कपड़े बदलने की कोई चिंता ही नहीं थी.

हमने उससे कहा कि हमें अपने घर ले चले और वहां हम उसके माँ और उसके परिवार वालों से मिले और तब इस लड़की की पृष्ठभूमि के बारे में पता चला. उसका पिता राजगीर है और हर माह 50 डालर के करीब कमा लेता है, जो लगभग 3000 रूपए होता है लेकिन उसकी माँ बताती है कि अक्सर घर-खर्च के लिए उनके पास ज्यादा कुछ बचा नहीं रहता क्योंकि पैसा लगाकर वह जुआ और ताश खेलता है. कभी-कभी थोडा बहुत जीतता भी है मगर अक्सर पैसा गंवाकर घर लौटता है. और जब वह जीतता भी है तो उन रुपयों की शराब पी जाता है.

कुल मिलाकर न तो उसकी पत्नी के लिए कुछ बचता है और न ही उसकी दो लड़कियों और दो लड़कों के लिए. इसीलिए वे अब भी अपने पुराने मकान में ही रह रहे हैं, जिसमें ईंटों से बने दो कमरे भर हैं और नहाने का स्थान और संडास तक नहीं है. नहाने का काम बाहर खुले बरामदे में होता है और बहुत सा सामान बाहर गटर के ऊपर सड़क पर पड़ा रहता है.

शैली की दो बड़ी बहनें हैं लेकिन दोनों भाई उससे छोटे हैं. लेकिन, जैसा कि दिखाई दे रहा है, जल्द ही वह अपने घर की सबसे पढ़ी-लिखी लड़की हो जाएगी. उसकी एक बहन कुछ साल एक सरकारी स्कूल में पढ़ती रही थी लेकिन वहां वह ठीक तरह से लिखना-पढ़ना भी सीख नहीं पाई. अब वह वहां नहीं जाती. जब हमने उसकी माँ से पूछा कि वह लड़की कितने साल की है तो उसने बताया: 18 या 19 साल, जबकि वह ज्यादा से ज्यादा लगभग 13 या 14 साल की लगती है. संभव है परिवार उसकी शादी करने की फिराक में है और अभी से यह प्रचार करने में लग गया है कि वह शादी की कानूनी उम्र पार कर चुकी है. हमने उसी वक़्त उनसे कहा कि अगले साल से उसे भी हमारे स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दें, हमें उसे शिक्षित करके बहुत प्रसन्नता होगी.

क्योंकि इस परिवार की परिस्थिति शैली के खुशमिजाज़ स्वाभाव से मेल नहीं खाती थी, हम इस मुलाक़ात के बाद एक बार के लिए सोच में पड़ गए. शिक्षिकाएं चीजों को आत्मसात करने की और काम करने की उसकी क्षमता देखकर उसकी प्रशंसा करती हैं-और स्वाभाविक ही हमेशा बताती रहती हैं कि वह कितनी जिंदादिल है. हम आशा करते हैं कि हम उसे आगे भी पढ़ाते रहने में सफल होंगे और सिर्फ शैली को ही क्यों, अगले साल से उसकी बड़ी बहन को भी!

अगर आप हमारे इस शिक्षा-प्रकल्प में कोई हिस्सेदारी करना चाहते हैं तो आप किसी एक बच्चे को प्रायोजित करके या बच्चों के एक दिन के भोजन की व्यवस्था करके ऐसा कर सकते हैं. या आप कोई भी रकम दान में देकर भी ऐसा कर सकते हैं.

शुक्रिया!