संयुक्त परिवार के बाईस लोग और पाँच कमरे – हमारे स्कूल के बच्चे – 11 सितंबर 2015

परोपकार

आज मैं आपका परिचय वृंदावन के एक गरीब इलाके में रहने वाली नन्ही सी लड़की, हेमलता से करवाना चाहता हूँ, जो एक बड़े से संयुक्त परिवार में परवरिश पा रही है।

हेमलता छह साल की है और 22 सदस्यों वाले एक संयुक्त परिवार की सदस्य है। उसका पिता पाँच भाइयों में सबसे छोटा है और हेमलता की दादी सहित वे सब भाई अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ एक बड़े से मकान में रहते हैं। अब अगर आप दो या तीन मंज़िले मकान की कल्पना करें, जहाँ हर बच्चे के पास अपना अलग कमरा है तो अपनी कल्पना को तुरंत विराम दे दें। चार या पाँच सदस्यों के हर परिवार के पास सिर्फ एक कमरा है, जो एक या दो खाटें बिछाने के लिए और शायद एकाध रैक वगैरह रखने के लिए भी मुश्किल से पर्याप्त है। दादी अधिकतर बाहर, ओसारे में सोती है और जब ठंड या लू बर्दाश्त से बाहर हो जाती है तो अपने सबसे बड़े बेटे के कमरे में चली जाती है।

परिवार के पास मकान के पीछे थोड़ी सी खाली ज़मीन भी है मगर वे मकान का और विस्तार नहीं करते। कारण? उनके पास इतने पैसे ही नहीं हैं। पाँचों भाई साधारण मजदूर हैं और उनकी पत्नियाँ घरेलू औरतें। वे रोज़ कमाकर लाते हैं और रोज़ अपना राशन-पानी खरीदते हैं, उसी से कपडे-लत्तों का इंतज़ाम किया जाता है और किसी तरह दूसरे खर्चों की पूर्ति होती है। इतनी कमाई में बचत की कोई गुंजाइश नहीं होती- विशेष रूप से बच्चों के कारण, जिन्हें अक्सर नए कपड़ों की ज़रूरत होती है और फिर डॉक्टर और दवा-दारू के खर्च तो लगे ही रहते हैं।

जैसे हेमलता के पिता को ही हेमलता के इलाज पर हर माह नियमित रूप से कुछ न कुछ अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ती है। जन्म से ही उसे साँस की बीमारी है और बच्चों के डॉक्टर का कहना है कि उसे अस्थमा है। वह हर वक़्त खाँसती रहती है और हमें बताया गया कि ठंड में तकलीफ और बढ़ जाती है। वह दवाइयाँ लेती है और हमें पता चला है कि दवाओं से उसे लाभ भी पहुँच रहा है।

जब हम उनके घर पहुँचे तो हेमलता का छोटा भाई दादी की गोद में लेटा दूध पी रहा था। दादी मुस्कुराते हुए हमारा स्वागत करती है और यह घर कब खरीदा, यह बताती है। घर बनने के बाद परिवार के सभी सदस्य एक-एक करके यहाँ आते गए। यह परंपरागत संयुक्त परिवार का टिपिकल उदाहरण है और जबकि ये लोग गरीब हैं और पैसे कमाने के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ता है, हमें साफ़ नज़र आता है कि उन सबको परस्पर एक-दूसरे का भावनात्मक संबल हासिल है।

हेमलता को शिक्षण का मुफ़्त साधन उपलब्ध कराके अब हम उनकी कुछ मदद कर पा रहे हैं।

किसी एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके आप हमारे इस काम में अपना हाथ बँटा सकते हैं।

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