पहले चरण की शल्यक्रिया सम्पन्न: मोनिका घर वापस आई – 6 फरवरी 2015

परोपकार

आज पुनः शुक्रवार है, और हर शुक्रवार को मैं अपने स्कूल के किसी बच्चे के बारे में लिखता हूँ और साथ ही ब्लॉग में उसका एक वीडियो भी लगाता हूँ। शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014 के दिन मैंने आपको बताया था कि मोनिका पर हुई पहली शल्यक्रिया पूर्णतः सफल रही है। उसके बाद शुक्रवार, 23 जनवरी 2015 को हम उसे गेस्ट-हाउस से वृन्दावन ले आए थे और पिछले सोमवार वह स्कूल पढ़ने आ गई! इसलिए आज मैं सगर्व यह लिख पा रहा हूँ कि मोनिका के इलाज का ‘पहला चरण’ सफलता पूर्वक सम्पन्न हो गया है।

जैसी त्वरित सहायता उसे हासिल हो पाई, उसे देखकर मैं आज भी अचंभित रह जाता हूँ- पहली बार जब मैंने मोनिका का उल्लेख अपने ब्लॉग में किया था, उस दिन से, पहले उसकी शल्यक्रिया और अब तक, जब कि वह स्वस्थ होकर अपने घर वापस आ चुकी है! इस बीच मैं आपको लगातार सारी जानकारियाँ देता रहा हूँ और आप जानते हैं कि कैसे सब कुछ अच्छी तरह होता रहा। डॉक्टरों ने उसे अपने पास ही रखा, जिससे वे नियमित रूप से उसकी पट्टियाँ बदलते रह सकें और आखिर, जब उसके जख्म भर गए, वे तैयार हो गए कि हम उसे वृन्दावन वापस ले आएँ।

जब पिछली बार हम उससे मिलने गए थे, डॉक्टर उसकी आँखों की पट्टियाँ हटा चुके थे। पहले और अब में आश्चर्यजनक अंतर दिखाई पड़ता था! आँखों की पलकें जल जाने के कारण पहले मोनिका अपनी आँखों को नम रखने के लिए पुतलियों को ऊपर चढ़ा लेती थी क्योंकि वे हमेशा खुली रहती थीं। वह आँखें खुली रखकर ही सोती थी, दाहिनी आँख की हालत बाईं आँख से भी ज़्यादा खराब थी। अब वह दाहिनी आँख की पलकें भी पूरी तरह बंद कर पा रही है। आँखों का झपकना भी अब संभव हुआ है, जिसका अर्थ यह है कि अब आँखें सूखी नहीं रहेंगी-जिसके कारण पहले उसे बहुत तकलीफ हुआ करती थी और नींद आना मुश्किल था।

हर बार, जब भी हम उससे मिलते थे, हम देखते कि मोनिका की छाती और गरदन के इर्द-गिर्द पट्टियाँ कम से कमतर होती जा रही हैं। दो सप्ताह पहले डॉक्टरों ने मेरी आँखों के सामने पट्टियाँ बदली थीं और मैंने देखा कि शल्यक्रिया के सारे ज़ख्म भर चुके हैं। उन्होंने उसकी जांघ की त्वचा निकालकर उसे छाती और ठुड्ढी पर लगाई थी और अब इन धब्बों के किनारे पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और आसपास की त्वचा अच्छी तरह जुड़ गई है। निश्चित ही आप तुरंत देख सकते हैं कि काफी परिवर्तन हुआ है: ठुड्ढी और गरदन को जोड़ने वाली जली हुई त्वचा ही सिर्फ नहीं जुड़ी है बल्कि अब उसकी ठुड्ढी साफ़ नज़र आने लगी है! अब वह आसानी से अपना सिर हिला-डुला सकती है और उसे पूरा ऊपरी धड़ मोड़ना नहीं पड़ता!

अगले पाँच माह अपनी ठुड्ढी को ऊपर, सीधा रखने के लिए मोनिका को एक कॉलर बांधना पड़ेगा, जिससे जुड़ी हुई त्वचा लचीली रही आए और वज़न से खिंचकर पुनः झूल न जाए। बिना कॉलर के कुछ ही हफ्तों में त्वचा झूल जाएगी और शल्यक्रिया में किया गया सारा प्रयास व्यर्थ हो जाएगा। इसलिए इस खतरे के बारे में हमने पहले ही मोनिका को बता दिया है, जिससे वह इसकी अनिवार्यता समझे और हर वक़्त यह कॉलर पहनना सुनिश्चित करे।

स्वाभाविक ही यह लड़की खुश है। एक शुरुआत हुई है। और आप जानते हैं? उसने अब आईने में अपना चेहरा देखना भी शुरू कर दिया है! पहले वह अपना जला हुआ चेहरा देखकर डर जाती थी लेकिन अब इतनी उत्सुक हो चुकी है कि हिम्मत करके देख लेती है। वह स्कूल भी आने लगी है। इस पूरे वक़्त में उसने सिर्फ एक सप्ताह के आसपास का स्कूल मिस किया है क्योंकि बाकी समय वैसे भी ठंड के कारण स्कूल की छुट्टियाँ चल रही थीं! अब वह कक्षा में सहपाठियों के साथ बैठती है और उसने पढ़ना-लिखना शुरू कर दिया है। यह भविष्य की ओर उठा उसका एक और कदम है!

फिर भी यह एक पहला चरण ही है। मोनिका के डॉक्टरों के साथ बातचीत में उन्होंने अगले चरण की शल्यचिकित्सा के लिए, जिसमें उसके मुँह और दूसरी आँख पर शल्यक्रिया होनी है, चार या पाँच माह रुकने के लिए कहा है। उस शल्यक्रिया के बाद वह दोनों आँखें बंद कर सकेगी और पूरा मुँह भी खोल सकेगी। हम गर्मी की छुट्टियों में यह शल्यक्रिया करवाने का कार्यक्रम बना रहे हैं, जिससे उसकी स्कूल की पढ़ाई का कम से कम नुकसान हो!

एक और कदम! मोनिका की सहायता के हमारे काम में आप भी मददगार हो सकते हैं!

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