पैसे बचाने के लिए भोजन में कटौती – हमारे स्कूल के बच्चे – 17 अक्टूबर 2014

परोपकार

आज मैं आपका परिचय हमारे स्कूल में अभी-अभी भर्ती हुई एक और लड़की, ख़ुशी से करवाना चाहता हूँ। वह पाँच साल की है और इस जुलाई से वह मुख्य पढाई शुरू होने से पहले वाली कक्षाओं की निचली कक्षा यानी एल के जी में पढ़ रही है, जहाँ सबसे छोटे बच्चे पढ़ते हैं।

ख़ुशी की दो छोटी बहनें हैं, एक तीन साल की और दूसरी सिर्फ एक साल की है। उसका परिवार वृन्दावन के एक गरीब इलाके में रहता है, जहाँ हमारे स्कूल के और भी कई बच्चे रहते हैं। असल में दो तो ठीक उनके घर के सामने ही रहते हैं: ख़ुशी के चचेरे भाई और बहन, शिवम और नेहा।

जब ख़ुशी के पिता ने देखा कि वे दोनों पढ़ाई में अच्छी तरक्की कर रहे हैं तो यह सोचकर कि आर्थिक तंगी के चलते वह खुद तो अपनी बेटियों को किसी दूसरे अच्छे स्कूल में पढ़ा नहीं पाएगा, उसने हमसे कहा कि हम उसे अपने स्कूल में भर्ती कर लें।

ख़ुशी का पिता वृन्दावन के एक दूसरे आश्रम में नौकरी करता है, जहाँ उसे 65 $ यानी लगभग 4000 ₹ प्रतिमाह मिलते हैं। उसे घर का किराया अदा नहीं करना पड़ता क्योंकि वे अपने पुश्तैनी मकान में रहते हैं, जो अब उसकी और उसके दूसरे भाई की साझा संपत्ति है। उसका भाई ऊपरी मंजिल पर रहता है जबकि वह अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ नीचे के दो कमरों में रहता है। और दोनों परिवार पूरा मकान एक नहानीघर और संडास साझा करते हैं।

हालाँकि मकान-किराए का खर्च नहीं है फिर भी माह समाप्त होते-होते पैसे की तंगी शुरू हो जाती है। फिर भी वे कोशिश करते हैं कि जहाँ भी संभव हो, थोड़ी-बहुत बचत करते रहें। यहाँ तक कि ख़ुशी के पिता ने अपने आश्रम में, जहाँ वह काम करता है, दोपहर का भोजन छोड़ दिया है क्योंकि वे उसके वेतन में से भोजन की कीमत वसूल कर लेते हैं। उसने बताया कि पहले वह एक दूसरे आश्रम में काम करता था, जहाँ उसे 15 $ यानी लगभग 1000 ₹ ज़्यादा मिलते थे लेकिन वहाँ वह एक दिन भी छुट्टी नहीं कर सकता था- बच्चों की बीमारी के वक़्त भी नहीं! इसलिए वह नौकरी उसे छोड़नी पड़ी क्योंकि उस समय उसकी छोटी बेटी बार-बार बीमार पड़ जाती थी!

क्योंकि वर्त्तमान नौकरी से घर का खर्च चलाना उसे बहुत मुश्किल प्रतीत होता है, एक बार फिर वह ज़्यादा वेतन वाले किसी दूसरे काम की तलाश में है! उसके लिए राहत और प्रसन्नता की बात यही है कि कम से कम उसकी बड़ी बेटी अब स्कूल जा रही है, जहाँ वह मुफ्त पढ़-लिख सकती है और उसे बच्चों की शिक्षा पर कोई व्यय नहीं करना पड़ता!

अगर आप खुशी जैसे बच्चों की कुछ सहायता करना चाहते हैं तो बच्चों की शिक्षा के लिए चलाई जा रही हमारी परियोजना में एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके आप ऐसा कर सकते हैं!

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