बैलगाड़ी चलाना नियमित रोजगार नहीं है – हमारे स्कूल के बच्चे – 13 फरवरी 2015

परोपकार

आज मैं आपका परिचय एक लड़के से करवाना चाहता हूँ, जिसने इसी साल से हमारे स्कूल में पढ़ना शुरू किया है। उसका नाम कौशल है और वह आठ साल का है। वह अभी यू के जी यानी प्राथमिक कक्षाओं से पहले वाली दूसरी कक्षा में पढ़ रहा है।

कौशल वृन्दावन के एक गरीब इलाके में, जहाँ हमारे स्कूल के और भी बहुत से बच्चे रहते हैं, जया और नेहा के पड़ोस में रहता है। सिर्फ दो कमरों का उसका घर है: एक कमरा नीचे है और दूसरा उसके ठीक ऊपर लेकिन थोड़ा छोटा। दोनों कमरों के सामने थोड़ी सी खुली जगहें हैं, जिन्हें वे बैठक या रसोई की तरह या जब जैसी ज़रूरत हो, इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि कमरे बहुत छोटे हैं! निचली मंज़िल पर स्थित कमरा कौशल के दादा का है। कौशल की माँ, पिता और वह खुद ऊपर वाले कमरे में सोते हैं।

कौशल का पिता बैलगाड़ी चलाता है यानी दैनिक मजदूर है। हमने उसकी पत्नी से पूछा कि वह कितना कमा लेता है तो उसने बताया: रोज़ लगभग 300 रुपए यानी 5 डॉलर रोज़। जब हमने कहा कि यानी माह में 9000 के लगभग हो जाता होगा तो वह हँसने लगी जैसे हमने कोई मज़ाक किया हो: जी नहीं, इतना नहीं, उसे रोज़ काम नहीं मिल पाता! बल्कि, अधिकतर काम नहीं मिलता है-पिछले दो हफ़्तों से वह यूँ ही घर में बैठा है! उसे कभी काम मिल जाता है, कभी नहीं।

स्वाभाविक ही इसका अर्थ यह है कि कभी उनके पास पर्याप्त पैसे होते हैं तो कभी कम। और ऐसी हालत में जब कि आप कभी तो फीस जमा कर पाएँ और कभी नहीं तो बच्चे को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है क्योंकि स्कूलों में हर माह नियमित फीस अदा करनी पड़ती है! कौशल पहले भी स्कूल जाता था मगर परिवार के लिए हर माह फीस के पैसे जुटा पाना मुश्किल था। लिहाजा पिछले साल जब उन्होंने सुना कि हमारे स्कूल में बच्चों की भर्ती हो रही है तो वे सबसे पहले हमारे स्कूल आ गए-और वे भाग्यशाली थे कि हमारे पास उनके बेटे के लिए जगह थी!

अब कौशल अपने सहपाठियों के साथ मज़े में पढ़ाई कर रहा है। उसकी शिक्षिकाएँ बताती हैं कि वह बहुत तेज़ और परिश्रमी लड़का है और जब एकाग्र होता है तो हर बात बहुत जल्दी सीख जाता है।

अगर आप भी कौशल जैसे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो किसी एक बच्चे को या हमारे स्कूल के सभी बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके ऐसा कर सकते हैं। आपकी सहायता के लिए उनकी ओर से हम शुक्रिया अदा करते हैं!

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