पैरों में विकलांगता और लगातार दर्द – पोलियो नहीं सिर्फ विटामिनों की कमी – हमारे स्कूल के बच्चे – 20 मार्च 2015

परोपकार

आज मैं आपका परिचय अपने स्कूल के एक लड़के और एक लड़की से करवाना चाहता हूँ, जिनके नाम क्रमशः अर्जुन और खुशबू हैं। जब आप खुशबू की ओर देखते हैं तो आपको हमारे स्कूल की दूसरी लड़कियों की तरह एक सामान्य लड़की नज़र आती है। लेकिन जब आप एक नज़र अर्जुन पर डालते हैं तो आप तुरंत समझ जाते हैं कि वह अपनी कक्षा के दूसरे लड़कों जैसा नहीं है: 14 साल के अर्जुन के पैर कुछ विकृत नज़र आते हैं, उसका शरीर छोटा है और अपने सहपाठियों से लगभग आधा तथा अपनी 13 वर्षीय बहन से भी बमुश्किल आधा है।

खुशबू उम्र में परिवार की सबसे छोटी संतान है। उसका सबसे बड़ा भाई 22 साल का है, दूसरा 17 साल का, फिर अर्जुन है और अंत में वह। उसका पिता एक मजदूर है और जब भी और जो भी काम उसे मिल पाता है, कर लेता है। काम ढूँढ़ना पड़ता है और जब मिल जाता है तब वह दिन भर में 250 रुपए यानी लगभग 4 डॉलर रोजाना कमा लेता है।

सबसे बड़े लड़के ने छठी कक्षा के बाद स्कूल जाने से मना कर दिया और धार्मिक नाटक-मंडलियों में शामिल हो गया, जहाँ पहले रोजाना 60 रुपए यानी लगभग 1 डॉलर उसे मिला करते थे, जो अब, 10 साल बाद 100 रुपए यानी लगभग डेढ़ डॉलर हो गए हैं। खाना-नाश्ता अलग से वहीं मिल जाता है। इस तरह पिता और पुत्र मिलकर दूसरे लड़के की स्कूल-फीस भरते हैं-लेकिन उसके बाद बाकी दोनों बच्चों के लिए उनके पास ज़्यादा कुछ बचता नहीं है! और यही कारण है कि अब वे दोनों हमारे स्कूल में पढ़ रहे हैं।

जब तीन साल पहले अर्जुन हमारे स्कूल आया था तो हमने उसकी माँ से उसके अंग्रेज़ी के x आकार के पैरों के बारे में पूछा था। उसने तब बताया था कि अर्जुन को पोलियो की बीमारी है। स्वाभाविक ही उसे चलने में बड़ी दिक्कत होती है लेकिन फिर भी वह एक खुशमिजाज़ बच्चा है और दिन भर बच्चों के साथ खेलता रहता है और खूब दौड़-भाग करता है। यहाँ तक कि वह योगासन भी करता है और काफी अच्छी तरह करता है!

जब अर्जुन तीन साल का था तभी से उसे पैरों की यह तकलीफ शुरू हो गई थी। उसके पैर पहले टेढ़े पड़ने लगे और गलत दिशा में मुड़ गए, जिससे उसके पैरों में दर्द रहने लगा। परिवार उसके पैरों की मालिश इत्यादि करते थे और सोचते थे कि उसे लाभ मिल रहा है लेकिन समय बीतने के साथ स्पष्ट होता गया कि पैरों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। किसी ने कहा कि उसे पोलियो है, लिहाजा उन्होंने भी मान लिया और शांत बैठ गए-लेकिन सिवा पैरों की विकृति और उसके साथ उभरने वाले दर्द के बच्चे में पोलियो के और कोई लक्षण दिखाई नहीं पड़ रहे थे। कुछ साल बाद शहर में लगे एक मुफ्त पोलियो कैंप में वे उसे दिखाने ले गए। तब तक उसके पैर x आकार के हो चुके थे, जिन्हें देखते ही डॉक्टरों ने कहा कि इस बीमारी में शल्यक्रिया से लाभ हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता। अब, शल्यक्रिया के डर से कि उसमें भीषण दर्द होगा और यह भी निश्चित नहीं है कि बच्चा ठीक हो ही जाएगा, उन्होंने शल्यक्रिया नहीं करवाई।

इस तरह समय गुज़रता रहा और सभी यही समझते रहे कि अर्जुन को बचपन से ही पोलियो है। यह तो जब हम उसके घर गए और हमें पता चला कि उसे न तो किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाया गया है और न ही आधिकारिक तौर पर किसी डॉक्टर ने आज तक बीमारी की पोलियो के रूप में पहचान की है, हम उसे डॉक्टर के पास ले गए। रक्त की जाँच और एक्स रे की जाँच के बाद पता चला कि शायद अर्जुन बचपन से आज तक विटामिनों और खनिजों की कमी के कारण यह कष्ट भुगतता रहा है। इस कारण उसकी हड्डियाँ ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाईं और कमजोर होती गईं। उनमें अंदरूनी दरारें पड़ती गईं और दर्द रहने लगा। समय पर उनका इलाज नहीं हो पाया और इस तरह आज, बेहतर पोषक आहार ग्रहण करने के बावजूद उसके पैरों की विकृति में और लंबी दूरी तक चलने पर होने वाले घुटनों के दर्द में कोई कमी नहीं आ पा रही है। उसका ऊपरी हिस्सा तो भारी होता जा रहा है मगर पैर अब भी कमजोर हैं और उसके शरीर का वज़न संभालने में अक्षम हैं।

स्थानीय डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिये हैं: उनका कहना है कि इस अवस्था में उसका इलाज यहाँ संभव नहीं है। हमारा इरादा उसे किसी बड़े अस्पताल ले जाकर, वहाँ के डॉक्टरों से सलाह लेने का है, जिससे उसके बेहतर भविष्य के लिए भरसक कुछ किया जा सके।

जब कि उसकी बहन और उसके सहपाठी बहुत पहले से अपने लंबे, स्वस्थ पैरों सहित अच्छे-खासे विकसित हो चुके हैं, उसे कीचड़ पार करके अपने एक कमरे वाले घर में प्रवेश करना मुश्किल होता है। लेकिन यह पुनः कहना होगा कि वह खूब सक्रिय और खुशमिजाज़ बालक है और अपने साथियों के साथ खेल-खेल में कुश्ती आदि लड़ने में भी उसे गुरेज़ नहीं होता।

भविष्य में उसका क्या होगा, कहा नहीं जा सकता लेकिन हम उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार हैं! अगर आप भी हमारे काम में मदद करना चाहते हैं तो कोई भी सहयोग राशि प्रदान करके हमारी मदद कर सकते हैं-हर तरह की सहायता बहुमूल्य होती है!

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