एक और गरीब परिवार, मदद का हमारा एक और प्रयास – हमारे स्कूल के बच्चे – 31 अक्टूबर 2014

परोपकार

आज मैं आपका परिचय दो नई विद्यार्थी लड़कियों से करवाना चाहता हूँ, जिनके नाम हैं, पायल और आशिका।

उनके एक पड़ोसी ने हमारे स्कूल के बारे में सुन रखा था और उसके मन में इन बच्चियों और उनके परिवार का खयाल आया। उसने लड़कियों के माता-पिता को बताया और माँ भाग्यशाली रही कि बिल्कुल ठीक समय पर हमारे पास पहुँच गई: नई भर्तियों की शुरुआत के पहले दिन ही।

और इस तरह हम जल्द ही पायल और आशिका के यहाँ पहुँच गए। उनकी माँ, छोटी बहन और आशिका उस दरवाज़े पर ही खड़ी थीं, जहाँ से एक गलियारे से होते हुए उनके कमरे तक पहुँचा जाता है। वहाँ पहुँचकर हमें पता चला कि दरअसल वह रास्ता एक गैराज तक पहुँचता है, जिसमें दोनों तरफ एक-एक कमरा हैं। गैराज मालिक ने इन दोनों कमरों को किराए पर उठा रखा है और उनमें से एक हमारी इन बच्चियों का, उनकी एक और छोटी बहन और अभिभावकों का निवास-स्थान है। उसी का एक कोना रसोई और दूसरा नहाने-धोने और संडास के रूप में प्रयुक्त होता है।

पायल के पिता की इतनी ही हैसियत है। वह एक धनी व्यक्ति का ड्राईवर है, जो उसे 4000 रुपए यानी लगभग 65 डॉलर मासिक वेतन देता है। इस आमदनी का आधा हिस्सा कमरे के किराए में ही खर्च हो जाता है और बचे हुए पैसों से वे कोशिश करते हैं कि किसी तरह घरेलू खर्च पूरे कर सकें। पहले यह बड़ा मुश्किल काम हुआ करता था, विशेष रूप से तब जबकि दो लड़कियाँ स्कूल में पढ़ रही थीं और हर माह दोनों की स्कूल-फीस देनी पड़ती थी। वे एक पैसा नहीं बचा पाते थे और अक्सर उन्हें अपने रिश्तेदारों से कर्ज़ लेना पड़ता था।

आठ साल पहले जब वह वृन्दावन आया था तब कतई यह नहीं सोचा था। इसके विपरीत, उसे लगा था कि यहाँ रोज़गार के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे, वह ज़्यादा पैसे कमा पाएगा, कुछ बचत करेगा और उसका और उसके बच्चों का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित होगा। उसे इसकी आशा थी और उसकी जगह वे अपने दैनिक जीवन में हर पल आर्थिक तंगी और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

लेकिन अब पहले से बेहतर है: दोनों लड़कियाँ अब हमारे स्कूल में मुफ्त शिक्षा पा रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि न सिर्फ वे अपना घरेलू खर्च चला पाएँगे बल्कि हर माह कुछ रुपया बचा भी पाएँगे। वे सही दिशा में अपने पहले कदम रख चुके हैं।

और आप भी हमारे इस प्रकल्प का हिस्सा बन सकते हैं! एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित कीजिए और हमारे प्रयासों में मददगार बनिए!

Leave a Comment