छह लड़कियों और एक लड़के का एक और परिवार – हमारे स्कूल के बच्चे – 19 सितंबर 2014

परोपकार

आज मैं आपका परिचय एक बहुत बड़े परिवार की उषा और प्रीति नामक दो बहनों से करवाना चाहता हूँ!

परिवार के सात बच्चों में 14 साल की उषा सबसे बड़ी है और उसके बाद है 13 साल की प्रीति। उनसे छोटे पाँच और भाई-बहन हैं और इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि सबसे छोटे को छोड़कर बाकी सभी लडकियाँ हैं। यह बात मैं इतनी बार लिख चुका हूँ कि उसे फिर से लिखना पुनरावृत्ति ही कहा जाएगा: लड़के की आशा और अपेक्षा में अभिभावक एक के बाद बच्चे पैदा करते चले जाते हैं। लड़का, जो हमेशा परिवार के साथ रहेगा, जो शादी करके घर छोड़कर नहीं चला जाएगा, जो परिवार के व्यवसाय को आगे बढ़ाएगा और बुढ़ापे में माता-पिता की देखभाल करेगा।

और लडकियाँ? उनका लालन-पालन भी पूरे स्नेह के साथ किया जाएगा और जैसे-जैसे उनके लायक लड़के मिलते जाएँगे, उनके विवाह करके उन्हें बिदा कर दिया जाएगा। हालाँकि उनका दहेज़ बहुत ज़्यादा नहीं होगा- हर लड़की की पाँच बहनें होंगी और और परिवार की सम्पति को पाँच बराबर-बराबर हिस्सों में विभाजित करना आवश्यक होगा! और क्योंकि किराने की उसकी छोटी सी दुकान से ज़्यादा आमदनी नही होती, उन्हें ज़्यादा कुछ मिल पाएगा इसकी संभावना न के बराबर है।

वैसे भी, जब तक वे कानूनी रूप से विवाह की उम्र प्राप्त नहीं कर लेतीं उनके पास काफी समय है। हमारा अनुभव है कि लड़कियों के विवाह के मामले में अक्सर ऐसे परिवार वाले क़ानून की धाराओं के अनुसार नहीं चलते इसलिए हमने उनकी माँ से पूछा कि वह अपनी लड़कियों का विवाह कब करने वाली है। उसने कहा, वह चाहती है कि पहले उसकी लडकियाँ पढ़-लिख लें और 18 साल की उम्र होने तक विवाह न करें। और उसके मुख से यह सुनकर हमें बड़ा अच्छा लगा!

अगर वे दृढ़ता पूर्वक इस बात पर बने रहते हैं-और हम पूरी कोशिश करेंगे कि वे ऐसा ही करें-तो लडकियाँ और उनका भाई हमारे स्कूल में पूरी तरह मुफ्त पढ़ाई कर सकेंगे! उषा और प्रीति, जो क्रमशः चौथी और तीसरी कक्षा में पढ़ती हैं, नियमित रूप से ख़ुशी-ख़ुशी हमारे स्कूल आती हैं और यहाँ उनके बहुत से मित्र बन गए हैं।

उनमें से एक उनकी चचेरी बहन ही है। यह कोई अचरज की बात नहीं है क्योंकि वह भी उसी घर में रहती है! उषा का पिता अपने सात भाइयों में से एक है। सात में से चार भाई एक दूसरे घर में साथ-साथ रहते हैं, स्वाभाविक ही अपने-अपने परिवार सहित। घर अधिक बड़ा नहीं है और इसलिए प्रीति का परिवार अपने नौ सदस्यों सहित इस एक कमरे में अलग रहता है। उन्हें अक्सर बाहर आँगन में या अपनी दादी के कमरे में सोना पड़ता है!

जिस तरह वे रहने की जगह साझा करके एक-दूसरे की मदद करते हैं उसी तरह भोजन और आमदनी भी साझा करते हैं! उन चार भाइयों ने अभी अपनी मासिक आमदनी भी एक-दूसरे से अलग नहीं की है और इस तरह जो भी थोड़ा-बहुत कमाते हैं, साझा करते हुए एक साथ रहते हैं। जब उसकी दुकान ठीक चल रही होती है तब उषा और प्रीति का पिता परिवार की सम्मिलित आमदनी में 115 $ यानी लगभग 7000 ₹ का योगदान करता है।

परिवार के पास अपना एक छोटा सा खेत भी है, जो कुछ हद तक उनकी सब्जियों की जरूरतों को पूरा करता है हालाँकि इतने बड़े परिवार के लिए उतनी सब्जियाँ पर्याप्त नहीं हो पातीं। पहले वह काफी बड़ा खेत था लेकिन नदी में पहले एक बार भीषण बाढ़ आई और उसका कुछ हिस्सा नदी में समा गया, जो उन्हें फिर वापस नहीं मिल पाया। उन किसानों को, जिनके खेत नदी के बहुत किनारे होते हैं, इस नियति का अक्सर सामना करना पड़ता है। वैसे भी ये खेत सरकारी तौर पर अनुमोदित नहीं होते।

यह एक सादी ज़िंदगी है, कभी सुखद परन्तु ज़्यादातर संघर्षमय। लेकिन अब हमें विश्वास है कि परिवार के बच्चों का आने वाला कल बेहतर होगा! किसी एक बच्चे को या स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके आप हमारी मदद कर सकते हैं, जिससे हमारे इस विश्वास को अमली जामा पहनाया जा सके।

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