अपने परिवार से अलग होने को मजबूर हुई एक युवा माँ – हमारे स्कूल के बच्चे – 21 मार्च 2014

परोपकार

हमेशा की तरह आज यानी शुक्रवार के दिन मैं आपको अपने स्कूल के एक बच्चे से मिलवाने जा रहा हूँ. इस बार एक नौ साल के लड़के, विशाल से. जब एक बार भीड़ भरी सड़क पर उसकी माँ हमसे मिलने आई तो उसके साथ उसकी छः साल की लड़की भी थी. वह बहुत युवा माँ लग रही थी इसलिए हमने उसकी उम्र पूछी. उसने बताया कि वह 26 साल की है. इसका अर्थ यह था कि जब उसने विशाल को जन्म दिया होगा तब उसकी आयु सिर्फ 17 साल की थी और जब वह गर्भवती हुई होगी तब 16 साल की और उससे कुछ माह पहले ही उसका विवाह हुआ होगा। भारत में विवाह करने और माँ बनने के सन्दर्भ में यह कोई बहुत आश्चर्यजनक उम्र नहीं है बल्कि गरीब लड़कियों के विवाह के लिए इसे सामान्य आयु ही माना जाता है. लेकिन रमोना के लिए और इसी तरह दूसरे पश्चिमी लोगों के लिए विवाह की यह बहुत कम उम्र मानी जाती है! भारत में भी इस आयु में लड़कियों का विवाह करना गैरकानूनी है लेकिन शादी के समय परिवार वाले यह दावा करते हैं कि लड़की 18 साल की हो चुकी है. क्योंकि जन्म-प्रमाणपत्र वगैरह का चलन अभी बहुत आम नहीं है और ज़्यादातर मामलों में लड़की स्कूल ही नहीं गई होती इसलिए इसके विरुद्ध कोई सबूत भी नहीं होता.

जो भी हो, यह युवा माँ अपने दो बच्चों के साथ अपने घर की भी अकेले ही देखभाल करती है और उसका पति सबेरे से काम पर निकल जाता है. वह एक बैलगाड़ी चलाता है और अच्छे दिनों में 4 डॉलर यानी लगभग 250 रुपए कमा लेता है जबकि सामान्य दिनों में इतना भी नहीं कमा पाता. काम का कोई भरोसा नहीं होता इसलिए उसे इस आशा में लेबर मार्किट में जाकर बैठे रहना पड़ता है कि कोई ठेकेदार उसे ढूँढ़ता हुआ आए और उसकी बैलगाड़ी को किराए पर ले ले.

अगर आप इस परिवार के घर को पहली बार देखें तो वह आपको थोड़ा अजीब सा लगेगा. जब आप घर में प्रवेश करते हैं तो सामने ही आपको एक हैण्ड पम्प सहित खुली कपड़े धोने की जगह देखने को मिलती है. उसके आगे एक लम्बी गैलरी है जिसे पार करने के बाद जब आप तीन सीढ़ियाँ उतरकर लगभग एक मीटर नीचे आते हैं तब अपने आपको एक कमरे के सामने खड़ा पाते हैं, जो कि उनका घर है. इमारत की इस विचित्र बनावट का एक कारण है: दो साल पहले वह एक सम्मिलित परिवार का हिस्सा था, जब आपसी विवाद के कारण विशाल के ताऊ-ताई ने परिवार से अलग होने का निर्णय लिया और उन्होंने सिर्फ इतना किया कि इमारत के बीचोंबीच से एक दीवार खड़ी कर ली. अब दोनों भाई कम जगह में गुज़ारा करते हैं मगर अलग-अलग रहते हैं.

उनके कमरे के इतना नीचे होने का कारण यह है कि पहले वही सड़क का स्तर भी था. उनके पास प्लाट की भराई करके उस पर कमरा बनाने के लिए पर्याप्त रुपया नहीं था. समय के साथ सड़क का स्तर ऊपर आता गया और उन्हें नीचे, कमरे में प्रवेश करने के लिए सीढ़ियां बनवानी पड़ीं. इसका यह अर्थ भी है मानसून की बारिश में उसी दरवाज़े से बारिश का पानी भी कमरे में प्रवेश कर जाता है.

फिर भी, जैसा कि हम अपने स्कूल के ज़्यादातर बच्चों के परिवारों के साथ देखते हैं, उनका परिवार भी सुखी दिखाई देता है. और वे अपने लड़के के लिए हमारे स्कूल की ओर से की जाने वाली मदद के लिए कृतज्ञता महसूस करते हैं. बच्चा आठ साल का हो जाने के बाद ही स्कूल जा पाया क्योंकि पहले उन्हें हमारे मुफ्त स्कूल के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी. जब हमने सुना कि विशाल की बहन भी घर में उसके साथ पढ़ती है तो हमने उससे पूछा कि बताओ, अब तक क्या-क्या पढ़ा-और उसने लगभग पूरी वर्णमाला बोलकर सुना दी! हमने उनसे कहा है कि वे अगले साल अपनी लड़की को भी स्कूल लेकर आएं, जिससे वह भी लिख-पढ़ सके!

अगर आप किसी एक बच्चे को प्रायोजित करके या बच्चों के एक दिन के भोजन का खर्च उठाकर हमारी मदद करना चाहें तो हमें बड़ी ख़ुशी होगी!

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