दो प्रतिभाशाली लड़कियों की दरिद्र पृष्ठभूमि और उज्ज्वल भविष्य – हमारे स्कूल के बच्चे- 27 सितंबर 2013

आज के ब्लॉग में आप हमारे स्कूल की दो और लड़कियों से मिलेंगे जो आपस में बहनें हैं: विनीता और तेजस्विनी। विनीता आठ साल की है और तीन साल से हमारे स्कूल में पढ़ रही है। वह अब तीसरी कक्षा में है। उसकी बहन, तेजस्विनी उससे तीन साल छोटी है और अभी पूर्व-प्राथमिक (केजी-2) कक्षा में पढ़ रही है। उनका एक तेरह साल का भाई भी है जो दूसरे उच्चतर माध्यमिक स्कूल में पढ़ता है।

विनीता और तेजस्विनी के घर की दीवार कुमकुम और राधिका, जिनसे मैं आपको पहले ही मिलवा चुका हूँ, के घर से जुड़ी हुई है। जिस इलाके में ये लोग निवास करते हैं वह एक गरीब इलाका है लेकिन वहाँ इतने बच्चे हैं कि घर से निकलने की देर है, खेलने के लिए बच्चे ही बच्चे उपलब्ध होते हैं। चाहे सूरज वृन्दावन पर आग बरसा रहा हो, चाहे लू चल रही हो, वे खेलते ही रहते हैं। उनके घर में, छत से लगा हुआ झूला भी है, जिस पर झूलने का वे जब-तब मज़ा लेते रहते हैं!

उनके घर के भीतर प्रवेश करते हुए आपको एक ड्योढ़ी से गुजरना पड़ता है, जहां एक हैंड पंप लगा हुआ है और जहां से आप छत पर चढ़ सकते हैं या उनके घर में प्रवेश कर सकते हैं। भीतर प्रवेश करते ही आप एक कमरे में पहुँच जाते हैं, जिसमें वे अपने मेहमानों का स्वागत करते हैं और वहीं उनका सारा परिवार रहता है, सारे काम वहीं निपटाए जाते हैं और वहीं झूला भी है, जिसमें झूल सकते हैं! दो छोटे सोने के कमरों और नहानीघर में जाने का रास्ता भी इसी कमरे से होकर जाते हैं।

यह एक साधारण घर है लेकिन इसमें परिवार के पाँच सदस्य रहते हैं और उसे अपना घर कहने में गर्व का अनुभव करते हैं। घर खरीदने के लिए उन्होंने कर्ज़ लिया है, जो गरीब परिवारों के लिए बहुत सामान्य बात है, और उसकी मासिक किश्तें उन्हें हर माह अदा करनी पड़ती हैं। लड़कियों के पिता एक दुकान में सेल्समैन का काम करते हैं, जिसकी तनख़्वाह परिवार के खर्चों को बड़ी मुश्किल से पूरा कर पाती है।

इस परिवार कि आर्थिक हालत देखकर आश्चर्य नहीं होता कि बच्चों के माता-पिता इस बात से बहुत खुश हैं कि उनकी लड़कियां हमारे स्कूल में पढ़ पा रही हैं। उन्हें स्कूल की फीस नहीं देनी होती, किताब-कापियों, पेंसिल-रबर और वर्दियों का खर्च नहीं उठाना पड़ता और सबसे बड़ी बात, लड़कियां गरमा-गरम भोजन भी मुफ्त प्राप्त करती हैं।

स्कूल लड़कियों को भी पसंद है! वे स्कूल में मस्ती करते हुए पढ़ रही हैं और उनके शिक्षक बताते हैं कि दोनों बहनें बहुत प्रतिभाशाली विद्यार्थी हैं। जब कि विनीता कक्षा में ज़्यादा बोलती नहीं है और अपने पाठ की तरफ बहुत ध्यान देती है, उसकी छोटी बहन तेजस्विनी बहुत प्रफुल्ल और चंचल लड़की है और शिक्षकों से बढ़-चढ़कर सवाल पूछती है। अक्सर शिक्षकों के सवालों का जवाब देने में भी वह अव्वल रहती है।

शिक्षकों द्वारा उनके विषय में दी गई जानकारी और यह देखते हुए कि दोनों लड़कियां यहाँ स्कूल में इतना आनंद उठाती हैं और पढ़ने में भी उनकी रुचि बढ़ती जा रही है, यह बात प्रमाणित होती है कि हम जो काम कर रहे हैं, वह बहुत महत्वपूर्ण और मूल्यवान है-और यह बात हमारे दिलों में अपने काम के प्रति गर्मजोशी पैदा कर देती है। हम उन सभी लोगों को शुक्रिया अदा करना चाहते हैं जो इस काम में हमारी मदद करते हैं।

Related posts

रोशनी और कृष्णकांत

सिर्फ रहने के स्थान के बदले में दिन भर मजदूरी करना – हमारे स्कूल के बच्चे – 22 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों का परिचय अपने स्कूल के दो बच्चों से करवा रहे हैं। उनकी माँ एक विशाल घर ...
मोनिका

मोनिका अपनी अंतिम बड़ी शल्यक्रिया के लिए तैयार है – 19 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु निकट भविष्य में होने वाली मोनिका की तीसरी शल्यक्रिया के बारे में लिख रहे हैं। मोनिका उनके स्कूल ...
Mohini with her father

जब एक नाई लड़का पैदा करने के चक्कर में पाँच-पाँच बच्चे पैदा कर देता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 15 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु एक नाई की बेटी, मोहिनी का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं, जो उनके चैरिटी स्कूल में ...
हर साल घर में पानी घुस जाता है

हर साल घर में पानी घुस जाता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 18 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के दो सबसे गरीब परिवार से आने वाले बच्चों का परिचय करवा रहे हैं। हर साल ...
नाई, जिसके पास स्कूल की फीस भरने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं

नाई, जिसके पास स्कूल की फीस भरने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं – हमारे स्कूल के बच्चे – 11 दिसंबर-2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के दो बच्चों का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं। उनका पिता नाई है और ...
टायर मरम्मत के काम से इतनी कमाई नहीं होती कि स्कूल की फीस भरी जा सके - हमारे स्कूल के बच्चे - 4 दिसंबर 2015

टायर मरम्मत के काम से इतनी कमाई नहीं होती कि स्कूल की फीस भरी जा सके – हमारे स्कूल के बच्चे – 4 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने चैरिटी स्कूल की दो लड़कियों का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं, जिनके नाम सुनीता और ...
सिर्फ आधा माह काम करके परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता है - हमारे स्कूल के बच्चे - 27 नवंबर 2015

सिर्फ आधा माह काम करके परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 27 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल की एक लड़की का परिचय अपने पाठकों से करवाते हुए उसके परिवार की व्यथा-कथा लिख रहे ...
जब पिता बनने की ज़िम्मेदारी सिर पर पड़ी तभी पैसे कमाना शुरू किया - हमारे स्कूल के बच्चे - 20 नवंबर 2015

जब पिता बनने की ज़िम्मेदारी सिर पर पड़ी तभी पैसे कमाना शुरू किया – हमारे स्कूल के बच्चे – 20 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों से अपने स्कूल के एक लड़के का परिचय करवा रहे हैं, जिसका परिवार बिना बिजली के ...
चाय बेचकर स्कूल का खर्च नहीं उठाया जाता - हमारे स्कूल के बच्चे - 13 नवंबर 2015

चाय बेचकर स्कूल का खर्च नहीं उठाया जाता – हमारे स्कूल के बच्चे – 13 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु पाठकों से अपने स्कूल के तीन बच्चों का परिचय करवा रहे हैं। उनका पिता एक चाय की गुमटी ...
अपने बच्चों के घर दोबारा जाने पर हमें सकारात्मक विकास दिखाई देता है - हमारे स्कूल के बच्चे - 6 नवंबर 2015

अपने बच्चों के घर दोबारा जाने पर हमें सकारात्मक विकास दिखाई देता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 6 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के एक बच्चे का परिचय करवा रहे हैं, जिसके सहोदर भाई-बहनों के बारे में वे पहले ...

Leave a Reply