एक माँ अपनी 4 साल की बच्ची को छोड़कर चली गई – हमारे स्कूल के बच्चे – 18 अप्रैल 2014

आज मैं चाहता हूँ कि आपका परिचय हमारे स्कूल की एक लड़की, अंजलि से करवाऊँ, जो कि एक असामान्य परिस्थिति से दो-चार है।… लेकिन शुरू से बताना ठीक होगा।

अंजलि आठ साल की है। जब हम उससे मिलने उसके घर गए तो वह अपने चचेरे भाई और अपनी चाची के साथ खड़ी थी और गलती से हमने लड़के को उसका भाई और उस महिला को उसकी माँ समझ लिया। कुछ मिनट की बातचीत के बाद ही हम समझ पाए वे लोग उसी तरह रह रहे हैं जैसा हम समझ रहे थे-बस अंजलि की माँ उनके साथ नहीं रहती।

जब अंजलि चार साल की थी तभी उसकी माँ अपने पति को छोड़ कर चली गई। कारण? अंजलि के दादा कहते हैं कि वे नहीं जानते और कभी समझ नहीं पाए कि वह क्यों चली गई। पूरे दो साल वह उस परिवार से बिल्कुल मिली नहीं, पति से नहीं और न ही अपनी बेटी से। एक दिन, अचानक, वह उनके घर वापस आई और पैसे मांगने लगी। उस पति से, जिससे वह तलाक लेना चाहती थी।

अंजलि की माँ ने दूसरा आदमी ढूँढ़ लिया था और अब अपने पति से तलाक भी चाहती थी और निर्वाह-खर्च भी-हालांकि वह खुद अपने बच्चे को पति के पास छोड़कर चली गई थी। जबकि अंजलि के पिता और दादा इस बात से बहुत खुश नहीं हैं मगर अब न्यायालय के एक आदेश के मुताबिक उसे दो माह में एक बार अपनी बेटी से मिलने आना पड़ता है।

आठ साल की अंजलि पूरी तरह कुछ समझ नहीं पाती कि आखिर यह सब क्या हो रहा है। उसकी चाची ही अब उसके लिए माँ के समान है और जब वह स्कूल से घर आती है तो तब तक उसकी देखभाल करती है जब तक उसका पिता अपने काम पर से घर वापस नहीं आ जाता। वह वृन्दावन के एक बड़े होटल में मजदूरी करता है और 50 डालर यानी लगभग 3000 रुपए मासिक कमाता है और एक कमरे के अपने घर में रहता है। यह कमरा, उसके चाचा-चाची का कमरा, और सामने का आँगन ही अब अंजलि की दुनिया है। वह अपने चाचा के लड़के के साथ स्कूल आती है, जो उसके भाई जैसा ही है और निश्चय ही वह एक बहुत हंसमुख और खुशमिजाज़ लड़की है।

हम नहीं जानते कि उसकी माँ के उसे छोड़कर चले जाने का कारण क्या है। इस तरह उसके बारे अनुमान लगाना ठीक नहीं होगा लेकिन लड़की से बात करने पर कोई भी यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि कैसे कोई अभिभावक, चाहे वह माँ हो या बाप, अपनी खुद की लड़की को इस तरह छोड़कर चला जा सकता है।

हम आशा करते हैं कि आने वाला समय अंजलि के परिवार में शांति लेकर आएगा। जहां तक उसके व्यक्तिगत जीवन का संबंध है, उसे मुफ्त पढ़ा-लिखाकर और उसके भोजन की व्यवस्था करके हम अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि उसका भविष्य उज्ज्वल हो।

अगर आप चाहते हैं कि अंजलि जैसे और भी बच्चों की मदद करने के हमारे अभियान में सहभागी बनें तो आप एक बच्चे को प्रायोजित करके या हमारे स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन का खर्च वहन करके ऐसा कर सकते हैं।

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