आज मैं अपने स्कूल के दो लड़कों, भानु और नवीन, से आपका परिचय करवाना चाहता हूँ। ये दोनों भाई पिछले कुछ सालों से हमारे यहाँ पढ़ रहे हैं।
भानु 15 साल का है और हमारे स्कूल की छठी कक्षा में पढ़ रहा है जबकि नवीन की उम्र 13 साल है और वह पाँचवी में पढ़ता है। जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और भी अधिक खस्ता थी, उनका एक बड़ा भाई भी कुछ समय हमारे आश्रम में रहा करता था मगर अब वह भारत के किसी और इलाके में अपनी चाची के यहाँ रहकर वेल्डिंग का काम सीख रहा है।
भानु और नवीन का पिता राजगीर है और लगभग 110 $ यानी लगभग 6500 ₹ प्रतिमाह कमाता है। वे लोग उसमें से लगभग 25 $ यानी लगभग 1500 ₹ अपने छोटे से घर का किराया चुकाने में खर्च कर देते हैं, जहाँ उनका परिवार पिछले छह माह से रह रहा है। पहले वे जहाँ रहते थे, किराया इस रकम का एक तिहाई था लेकिन मकान मालिक ने उनसे मकान खाली करवा लिया-क्योंकि वह अपना मकान बेचना चाहता था। बच्चे इस नए मकान में खुश हैं: क्योंकि यहाँ घर के सामने बहुत बड़ा आँगन है, जहाँ उन्हें न सिर्फ नहाने का स्थान और संडास उपलब्ध हैं बल्कि खेलने-कूदने, दौड़ने-भागने, लेटने-सोने और पतंग उड़ाने की सुविधा भी उपलब्ध है।
जब हम उनके घर पर नज़र दौडाते हैं तो वहाँ एक रेफ्रिजिरेटर रखा देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं जबकि हमारे स्कूल के एकाध किसी बच्चे का परिवार ही रेफ्रिजिरेटर खरीदने की हैसियत रखता है। हमने पूछा, उनके पास फ्रिज कब से है-और पता चला कि फ्रिज काम ही नहीं करता। दरअसल वह उनके माकन मालिक का फ्रिज है और जब वह खराब हो गया तो उसे फेंकने की जगह उसने उसे घर पर ही पड़ा रहने दिया और यह अच्छा ही रहा क्योंकि यहाँ आने के बाद अब वे उसका इस्तेमाल कर पा रहे हैं-एक आलमारी की तरह!
यह स्पष्ट है कि परिवार के पास कोई ज़्यादा संसाधन नहीं हैं और यह भी कि घर की छोटी-मोटी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए भी उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता है जबकि, इन खर्चों के अलावा उन्हें अपने बड़े बेटे को भी कुछ रुपए भेजने पड़ते हैं जिससे उसकी चाची पर उसके खर्च का ज़्यादा बोझ न पड़े। इसके बावजूद हम देखते हैं, और जैसा कि हमने अपने स्कूल के बच्चों के अधिकांश परिवारों के मामले में भी गौर किया है, कि वे लोग अपने सीमित संसाधनों में भी खुश रहते हैं और साथ रहने के आनंद का भरपूर आस्वाद लेते हैं।
भानु और नवीन, दोनों ही पढ़ाई में अच्छे हैं लेकिन उनकी शिक्षिकाएँ दोनों के स्वभाव में काफी अंतर पाती हैं: जबकि भानु को बातें करने में मज़ा आता है और वह काफी मिलनसार भी है, नवीन ज़रा शांत है और काफी सोच-विचारकर ही अपनी बात कहता है।
किसी एक बच्चे को या स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके आप भानु और नवीन जैसे दूसरे और बच्चों की मदद कर सकते हैं।
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