मोनिका के विषय में जानकारियाँ सार्वजनिक करने के 4 कारण – 7 जनवरी 2015

मोनिका वह लड़की है, जो पिछले साल एक दुर्घटना में जल गई थी और जब से हमें इस अपघात का पता चला है तभी से मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से उसके विषय में लगातार ताज़ा जानकारियाँ देता रहता हूँ। हमने आपको बताया था कि उसके साथ क्या हुआ था। हमने उसकी माँ की कहानी बताई, उसके परिवार के बारे में, उस पर हुई पहली शल्यक्रिया के बारे में और अंत में कल उसे किस तरह एक होटल के कमरे में लाया गया, यह बताया। निश्चय ही सोशल मीडिया में भी मैं ये ताज़ा जानकारियाँ साझा करता हूँ और कुछ दिन पहले मुझसे किसी ने पूछा: काम तो आप बहुत अच्छा कर रहे हैं मगर इसका इस तरह प्रचार क्यों करते हैं?' मैं आपको बताता हूँ कि क्यों करता हूँ!

असल में उस व्यक्ति ने और विस्तार से लिखते हुए हमें बताया कि और भी बहुत से लोग हैं, जो इस तरह का अच्छा सेवाकार्य कर रहे हैं मगर वे चुपचाप करते हैं, उसका प्रचार नहीं करते। उसने हमें सलाह भी दी कि हम भी जो करना है, करें लेकिन उसे अपने ब्लॉग के माध्यम से और फेसबुक या ट्विटर के माध्यम से सार्वजनिक न करें। मोनिका की तस्वीरें या उसके इलाज और स्वास्थ्य-लाभ संबंधी वीडियो आदि भी प्रदर्शित करने की ज़रुरत नहीं है।

यहाँ, इन चार बिंदुओं में मैं इसका उत्तर दे रहा हूँ:

1) संख्या में बल है – साथी हाथ बढ़ाना – मिलकर बोझ उठाना

(संख्या में बल है – एक होकर हम किसी भी समस्या का सामना कर सकते हैं – मिलजुलकर हम हर काम सफलता पूर्वक कर सकते हैं)

ऊपर तीन कहावतें दी गई हैं और तीनों का एक ही अर्थ है: जब एक अकेला कोई काम करता है तो वह उसे अच्छे तरीके से कर सकता है। जब बहुत से लोग उसी काम को एक साथ करते हैं तो उस काम को बेहतर ढंग से कर सकते हैं, तेज़ी के साथ कर सकते हैं और ज़्यादा काम कर सकते हैं। चैरिटी के कामों में यही बात लागू होती है और विशेष रूप से मोनिका जैसे मामलों में।

बहुत से लोग हैं, जिनकी बड़ी इच्छा होती है कि लोगों की मदद करें- चाहे मोनिका की हो, हमारे स्कूल के बच्चों की हो या किसी और चैरिटी कार्य में सहयोग हो। हो सकता है कि वे सिर्फ अपना समय या श्रम ही इन कामों में लगा सकते हों और कोई आर्थिक मदद न कर सकते हों। दूसरी तरफ ऐसे लोग भी होते हैं जिनके पास पैसा तो होता है लेकिन समय की कमी होती है, वे शारीरिक रूप से अशक्त होते हैं या उन्हें जानकारी ही नहीं होती!

तो, अगर हम मोनिका और उसके अपघात के बारे में सबको बताते हुए उसके इलाज की अपनी परियोजना सबके सामने रखते हैं तो मुझे लगता है कि हम इस पीड़ित बच्ची के जीवन में बदलाव लाने हेतु सिर्फ दुनिया भर के लोगों के श्रम, ऊर्जा और धन को एकजुट कर रहे होते हैं। और जितना अधिक हम एकजुट होंगे, मिलकर काम करेंगे, उतना ही अधिक हम उसके लिए कर पायेंगे!

2) सहयोगकर्ता जानना चाहते हैं कि उनका पैसा कहाँ खर्च किया गया

यह एक तथ्य है कि जब आप कोई चैरिटी कार्य कर रहे होते हैं तो स्वाभाविक ही, लोग जानना चाहते हैं कि आपने उन पैसों का क्या किया जो उन्होंने आपको दिए थे।

3) वास्तव में लोग मोनिका के बारे में जानना चाहते हैं

ऊपर दिया गया कारण तथ्य तो है और महत्वपूर्ण भी है मगर महज उथला तथ्य है। यहाँ जो कारण मैं बताने जा रहा हूँ, दरअसल वह लोगों के दिल से निकली हुई चाह है: वास्तव में वे मेरा लिखा पढ़ना चाहते हैं। जो लोग हमें और हमारे आश्रम और स्कूल के बारे में जानते हैं- चाहे वे हमें इंटरनेट के माध्यम से जानते हों, चाहे अपने घर में या यहाँ, भारत में हमसे मिले हों- वे वास्तव में हमारी चिंता करते हैं, नियमित रूप से हमारी खोज-खबर लेते रहना चाहते हैं! हमारे स्कूल के बच्चों से उनका गहरा जुड़ाव है और वे दिल से महसूस करते हैं कि हम सब मिलकर इस बच्ची की मदद करके बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं!

इसलिए जब मैं बताता हूँ कि हमारी मदद और बहुत से लोगों के सहयोग से उसकी पहली शल्यक्रिया सम्पन्न हुई है तो यह अपने अच्छे काम की डींग हाँकना नहीं है- असल में इसके पीछे इस खुशखबर को आप सबके साथ साझा करने की मंशा होती है!

4) कम से कम एकाध किसी व्यक्ति को इस अच्छे काम के लिए प्रेरित कर पाने की संभावना

और अंत में यह बिन्दु: हो सकता है कि कोई इन बातों को पढ़कर स्वयं भी दूसरों की भलाई करने की ओर उद्यत हो जाए।

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