आज मैं आपका परिचय एक बहुत बड़े परिवार के साथ करवाना चाहता हूँ! यह हमारे स्कूल में हाल ही में भर्ती दो बच्चों, ज्ञानू और पूनम का परिवार है। सात बच्चों में ये दोनों सबसे छोटी दो लड़कियाँ हैं। यानी कुल पाँच लड़कियाँ हैं और बाकी दो लड़के हैं।
ज्ञानू का घर स्कूल और हमारे आश्रम से अधिक दूर नहीं है। हम पैदल ही उनके घर पहुँचे। मुख्य सड़क से हमने उनके बड़े से आँगन में प्रवेश किया, जहाँ हमें बहुत सी गाएँ और खेलते बच्चे दिखाई दिए। हम तुरंत ज्ञानू को ढूँढ़ लेते हैं- बल्कि वह हमें ढूँढ़ लेती है और अपनी माँ को बुला लाती है। जब हमने उससे अपने सातों बच्चों को इकठ्ठा करके उनके साथ बैठने को कहा तो हम स्तब्ध रह गए:एक के बाद एक बच्चे आ रहे हैं और अपनी माँ के साथ बैठते जा रहे हैं- सबके सब वाकई उसके बच्चे हैं!
हमने बात करना शुरू किया और तब हमें उन बच्चों की उम्र का पता चला: दो-दो सालों के अंतराल में पहली तीन लड़कियाँ फिर दो लड़के और फिर दो लड़कियाँ और सबसे बड़ी 17 साल की और सबसे छोटी पाँच साल की, पूनम!
लेकिन वास्तव में वे सभी उस घर में नहीं रहतीं- क्योंकि सबसे बड़ी दो लड़कियाँ पहले ही विवाहित हो चुकी हैं! 17 साल और 15 साल की सबसे बड़ी लड़कियों का विवाह अभी छः माह पहले ही हुआ है! निश्चित ही दोनों आयोजित विवाह यानी अरेंज्ड मैरेज थे। माँ से पूछने पर कि इतनी कम उम्र में उनका विवाह क्यों किया तो वह कहती है, "हमें करना पड़ा, आजकल समय बड़ा खराब चल रहा है!" हालांकि उसने साफ़-साफ़ नहीं कहा मगर उसका मतलब यह था कि नए ज़माने में जीने का तरीका बहुत बदल चुका है और वह नहीं चाहती कि उसकी बेटियाँ विवाह से पहले किसी लड़के के नज़दीक भी जाएँ! अगर लोगों को पता चल जाए कि किसी लड़की का बॉयफ्रेंड है और इसलिए उसके विवाह-पूर्व यौन संबंध हैं तो यह उसके चरित्र पर लगे बदनुमा दाग की तरह होता है। तो इसलिए इससे पहले कि लड़कियाँ इस दिशा में कुछ सोच भी पाएँ, उनकी शादी कर देना ही उचित है!
दोनों में बड़ी बेटी तो अपनी नियति से संतुष्ट है लेकिन दूसरी इस बात से कि जल्दी विवाह होना अच्छा है, पूरी तरह सहमत नज़र नहीं आती, उसके मन में कुछ हिचकिचाहट है: उसने सिर्फ 7वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और आगे पढ़ती रहती तो उसे खुशी होती। लेकिन दुर्भाग्य से उसके सास-ससुर, जिनके साथ अब वह रह रही है, नहीं चाहते कि वह आगे की पढ़ाई करे और स्कूल जाए। हालांकि हमने उसे प्रोत्साहित किया है कि कोई रास्ता निकालने की कोशिश करे और अपनी पढ़ाई जारी रखे, हमें उम्मीद नहीं है और पूरी संभावना है कि उसकी पढ़ाई यहीं समाप्त हो जाएगी- आखिर 15 साल की बच्ची अपने पति और उसके माता-पिता से उलझना क्यों पसंद करेगी?
लेकिन हमें यह जानकर खुशी हुई कि कम से कम दूसरे तीन बच्चे स्कूल पढ़ने जा रहे हैं। वे पास ही स्थित एक सस्ते निजी स्कूल में पढ़ते हैं- लेकिन तब भी फीस, किताब-कापियों और दूसरी स्टेशनरी का खर्च उनके लिए बहुत ज़्यादा पड़ता है और माता-पिता के लिए यह बहुत मुश्किल है कि सबसे छोटी दो बच्चियों को भी उसी स्कूल में भेज सकें।
ज्ञानू का पिता ड्राईवर है और उसकी पत्नी को ठीक पता नहीं है कि वह कितना कमाता है। उनके घर में पाँच कमरे हैं, जिन्हें वे किराए पर उठा देते हैं। कमरे सिर्फ ईंटें खड़ी करके बना दिए गए हैं, दीवारों पर न तो प्लास्टर है और न ही उनकी पुताई हुई है और कहा जा सकता है कि सभी कमरे वास्तव में चार दीवारों और एक दरवाजे वाले कमरे भर हैं, उन्हें घर नहीं कहा जा सकता। वे उन्हें 5 डॉलर यानी 300 रुपए माहवार प्रति कमरे के हिसाब से किराए पर चढ़ा देते हैं, जिससे परिवार की कुछ आर्थिक मदद हो जाती है।
स्कूल खुले अब दस दिन हो चुके हैं और ज्ञानू और पूनम रोज़ स्कूल आ रहे हैं और अच्छी तरह पढ़ना भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा उनकी कुछ सहेलियाँ भी बन गई हैं! वे दोनों बहुत खुशमिजाज़ हैं और स्कूल में खूब धमाचौकड़ी मचाती हैं- हमें भरोसा है कि हमारे यहाँ शिक्षा प्राप्त करने के बाद और हमारे भरसक प्रयासों से उन्हें अपनी बड़ी बहनों की तरह कम उम्र में विवाह के झमेले में नहीं पड़ना पड़ेगा!
अगर आप ज्ञानू और पूनम जैसे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो किसी एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके ऐसा कर सकते हैं! शुक्रिया!
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