13 साल की उम्र में स्कूल की पढ़ाई शुरू करने वाला बालक – 10 अक्टूबर 2014

परोपकार

मैं आपका परिचय अपने स्कूल की सबसे निचली कक्षा, एल के जी में पढ़ रहे, उम्र में सबसे बड़े लड़के से करवाना चाहता हूँ। मुख्य स्कूली शिक्षा शुरू होने से पहले वाली पढ़ाई की यह पहली कक्षा है, जहाँ आम तौर पर पाँच साल के आसपास के बच्चे खेलों और गीतों के माध्यम से लिखना-पढ़ना और गिनती सीखते हैं। लेकिन हमारे स्कूल में यह कोई असाधारण बात नहीं है कि इतनी छोटी कक्षा में इस उम्र के बच्चे भी पढ़े क्योंकि अक्सर ऐसे लड़के-लडकियाँ हमारे यहाँ आते ही रहते हैं, जो पहले कभी स्कूल गए ही नहीं-जैसे यह लड़का, विपिन, जो तेरह साल का हो चुका है।

चार भाई बहनों में विपिन सबसे छोटा है। उसका सबसे बड़ा भाई 21 साल का है-वह काम करता है और परिवार की आमदनी में हिस्सा बँटाता है। वह मोटरसाइकल सुधारने का काम करता है जबकि उसका पिता श्रद्धालुओं द्वारा देवताओं की मूर्तियों को पहनाए जाने वाले वस्त्रों की सिलाई का काम करता है। दोनों मिलकर 100 यूरो यानी लगभग 8000 रुपए कमा लेते हैं। इतनी रकम परिवार के दैनिक खर्चों यानी घर-किराया, राशन, कपड़े आदि और स्वाभाविक ही, बीच के दो स्कूल जाने वाले बच्चों की वर्दियाँ, किताबें और टिफिन आदि खरीदने के लिए ही मुश्किल से पूरी पड़ती है!

विपिन का दूसरा भाई 18 साल का है और कॉलेज पढ़ने जाता है, जो कम आमदनी वाले इस परिवार के लिए एक खर्चीला सौदा है। 15 साल उम्र की उसकी बहन भी पढ़ रही है और अभी हाई स्कूल में पढ़ने जाती है।

जब आप देखते हैं कि परिवार के दो बच्चे कॉलेज और स्कूल में पढ़ रहे हैं यानी छोटी उम्र में कभी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी होगी, तो आप ताज़्जुब कर सकते हैं कि विपिन अभी तक स्कूल क्यों नहीं गया होगा। वास्तव में वह भी एक सरकारी स्कूल में जाता रहा था। लेकिन वहाँ, शरारती होने के कारण उसकी पिटाई होती थी और वैसे भी उस स्कूल का पढ़ाई का स्तर अच्छा नहीं था। लिहाजा कुछ माह गुज़ारने के बाद भी वह वहाँ कुछ सीख नहीं पाया और उसने अपने पिता से कह दिया कि आगे से वह वहाँ पढ़ने नहीं जाएगा।

उसके माता-पिता ने भी परवाह नहीं की। पहले ही उनके दो बच्चे थे, जिनके लिए उन्हें स्कूल फीस का इंतज़ाम करना पड़ता था और इसलिए तीसरे बच्चे की स्कूली पढ़ाई का खर्च वहन करना उनके लिए मुश्किल था। सरकारी स्कूल में वह पढ़ना नहीं चाहता था और किसी निजी स्कूल में, जहाँ पढ़ना उसे अच्छा लग सकता था, वे उसे पढ़ा नहीं सकते थे क्योंकि वहाँ का खर्च उनके बूते के बाहर था। इसलिए वह घर में मटरगश्ती करता हुआ अपना समय बरबाद करता रहा।

हमने पूछा कि इस दौरान दिन भर वह क्या करता रहता था। कुछ नहीं, उसने जवाब दिया। और, अब वे लोग बच्चे को भर्ती कराने हमारे स्कूल कैसे पहुँच गए, हमने पूछा। उत्तर मिला, उसमें परिवर्तन आ गया था और वह फिर से पढ़ना चाहता था। उनके पड़ोस की दो लडकियाँ हमारे स्कूल की विद्यार्थी थीं और उन्होंने उसे बताया कि हम बड़े बच्चों को भी छोटे बच्चों के साथ पढ़ने के लिए भर्ती कर लेते हैं। और सबसे बड़ी बात यह कि हमारे स्कूल में सम्पूर्ण अहिंसात्मक नीति का पालन किया जाता है इसलिए वह शिक्षक या शिक्षिकाओं की मार खाने से भी बचा रहेगा! इसके अलावा उसके परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि हम उसे मुफ्त शिक्षा प्रदान करने वाले थे!

जब हमने उसे भर्ती करने के लिए हामी भारी तब हम निश्चित नहीं थे कि वह वास्तव में पढ़ने आ ही जाएगा। लेकिन वह आने लगा और अब तो इस साल नए सत्र की शुरुआत से स्कूल आते हुए उसे पूरे चार माह हो गए हैं। वह इस साल की पहली यानी हमारे स्कूल की तिमाही परीक्षा भी दे चुका है और सबसे बड़ी बात, उस परीक्षा में वह अव्वल रहा है। उसे स्कूल जाना पसंद है और हमें विश्वास है कि भविष्य में भी वह ख़ुशी-ख़ुशी स्कूल जाता रहेगा!

हमें विश्वास है कि आप भी विपिन जैसे बच्चों की सहायता करने के हमारे काम में सहभागी होना चाहेंगे और इस दिशा में एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करते हुए अपना सहयोग प्रदान करेंगे।

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