जाति के आधार पर विभाजित व्यक्तिगत अखबारी विज्ञापन – 26 अक्टूबर 2009

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

कुछ समय पहले अपनी डायरी में मैंने लिखा था कि हमारे विद्यालय में जाति व्यवस्था से जुड़े जाति आधारित नामों के कारण हमारे बच्चों का रेकॉर्ड रखना हमारे लिए कितना मुश्किल हो गया है। कुछ बच्चे अपना अंतिम नाम (सरनेम) नहीं जानते या बताना नहीं चाहते क्योंकि उससे यह पता चलता है कि वे किस जाति के हैं और वे जानते हैं कि कोई यह जान जाएगा तो उनके साथ दूसरों की तरह समान्य बर्ताव नहीं किया जाएगा। हो सकता है कि उन्हें वह काम न करने दिया जाए जो दूसरे कर सकते हैं। वगैरह वगैरह…कल्पना करें कि किस अनुभूति के साथ वे बड़े हो रहे हैं!

यूरोप में किसी ने मुझसे कहा कि अपने भारत प्रवास के दौरान उसने ऐसा कुछ नहीं देखा। मैंने उससे कहा कि सिर्फ पर्यटन स्थल देखने के बजाय उसे कुछ गहराई में उतरना होगा। अगर आप कुछ समय रुककर हमारे विद्यालय की परियोजना का अवलोकन करें तो आपको कुछ अनुमान हो सकता है।

पिछले कुछ दिनों में मैंने कुछ उदाहरण प्रस्तुत किए थे जिनसे आपको पता चल सकता है कि विभिन्न जातियों में अलग-अलग वर्गों के लोग समाज को किस रूप में देखते हैं। एक और उदाहरण शादियों का है। हाल ही में एक दिन एक अखबार लेकर रमोना मेरे पास आई। उसने मुझे पढ़कर सुनाया, ‘एक सनाढ्य-वशिष्ठ ब्राह्मण वर के लिए सुंदर वधू की आवश्यकता है…’ उसे आश्चर्य हुआ कि अखबारों तक में खुले आम लोग अपने बच्चों के लिए अपनी जाति के साथी की तलाश करते हैं।

मैंने उसे समझाया कि जो अभिभावक अपने बच्चों के विवाह तय करते हैं उनके लिए यह बात बहुत महत्वपूर्ण होती है। खुद युवा अपने लिए इसी तरह साथी की तलाश करते हैं, या तो इसलिए कि उनका परिवार ऐसा चाहता है, या फिर अपनी मर्ज़ी से। अखबारों के विज्ञापन विभिन्न जातियों के लिए इसी तरह से विभक्त किए जाते हैं जिससे हर कोई अपनी जाति वाले विज्ञापन आसानी से खोज सके। कई एजेंसियां खुली हुई हैं जो आपकी जाति का जोड़ीदार आपको उपलब्ध कराता है। तो आप देख सकते हैं कि समाज में यह आज भी अच्छा खासा मौजूद है।

येंस, रेजीना और सेलिना ने जर्मनी वापस जाने के लिए आज तड़के आश्रम से हवाई अड्डे की ओर प्रस्थान किया। हम उन्हें बहुत मिस कर रहे हैं और आश्रम कुछ सूना और शांत लग रहा है। सूरज भी उनकी कमी महसूस कर रहा है, खासकर सेलिना की, जो उसके साथ रोज़ खेला करती थी। लेकिन हमें उम्मीद है कि वे सब जल्द ही आश्रम वापस आएंगे।