तयशुदा विवाह (अरेंजड मैरेज): सिर्फ अपनी जाति में, अपनी उपजाति में – 27 अक्टूबर 2009

कल मैंने लिखा था कि वे अभिभावक जो अपने लड़के या लड़की का विवाह तय करते हैं अपनी जाति में ही वर या वधू कि तलाश करते हैं। मैं पहले ही कई बार तयशुदा विवाहों के बारे में लिख चुका हूँ लेकिन उसके इस पहलू के बारे में अब तक नहीं लिखा है। आम तौर पर सारा परिवार ही लड़के या लड़की के लिए उपयुक्त वर की तलाश में लग जाता है। सब अपने नाते-रिश्तेदारों में और दूसरे परिचितों में यह बात प्रचारित कर देते हैं कि उनके यहाँ एक लड़का या लड़की विवाह योग्य है और उनके लिए उपयुक्त साथी की तलाश की जाए। लेकिन सिर्फ जाति नहीं, कई उपजातियाँ भी होती हैं जिनका खयाल रखना पड़ता है।

अगर आप अखबार में प्रकाशित विज्ञापन (कल कि डायरी के साथ छपा) को ज़रा बारीकी से देखें तो आप देखेंगे कि लड़के को 'सनाढ्य-वशिष्ठ-ब्राह्मण' के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है। ब्राह्मण एक जाति है इसलिए वे एक ब्राह्मण लड़की तलाश रहे हैं। लेकिन उसे सनाढ्य भी होना चाहिए, जो कि लड़के की उपजाति है। और फिर लड़का 'वशिष्ठ' भी है, जो कि परिवार की एक शाखा है। एक उपजाति में एक विशिष्ट संख्या में परिवार होते हैं और वे आपस में तो विवाह करते हैं मगर एक ही परिवार में नहीं। यह कौटुंबिक व्यभिचार से बचने के लिए किया जाता है। तो लड़की को ब्राह्मण और सनाढ्य तो होना चाहिए मगर वशिष्ठ नहीं।

आप देखिये कि किसी परिवार के रवैये के अनुपात में उपयुक्त वर या वधू की तलाश काफी मुश्किल काम होता है। इतने सारे मानदंडों पर खरा उतरने वाले बहुत कम होते हैं। अब अगर ऐसा हो कि बच्चा किसी दूसरी जाति में विवाह करना चाहता है क्योंकि दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं?

मैंने आपको आर्य समाज के बारे में बताया था कि वे कैसे जाति व्यवस्था का खंडन करते हैं। सारे भारत में उनके मंदिर हैं और अगर वे प्रेमी विवाह करने पर आमादा हैं तो वे उन मंदिरों में जाते हैं, परिवार की अनुमति लेकर या उसके बगैर। इन मंदिरों में वे अपनी जातियों की परवाह किए बिना विवाह कर सकते हैं और वहाँ उन्हें एक विवाह-प्रमाणपत्र दिया जाता है जो आधिकारिक रूप से मान्य होता है।

अपने परिवार और अपने समाज की इच्छा के विपरीत जाकर किसी दूसरी जाति के साथी के साथ विवाह करना बड़ी हिम्मत का काम होता है मगर प्रेम बहुत बड़ी ताकत है और मैं आशा करता हूँ कि हमारे युवा देशवासी विभिन्न वर्गों और वर्णों के दकियानूसी विश्वासों को छोडकर अपने प्रेम का साथ देंगे।

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