कल मैंने ज़िक्र किया था कि कैसे हिन्दू धर्म जाति प्रथा की हिमायत करता है और हास्यास्पद बन जाता है जब धनवृद्धि के लिए ब्राह्मण एक दिन में कई-कई कर्मकांड करते हैं। आप जानते ही हैं कि जाति प्रथा आज भी समाज में अपनी जड़ें जमाए हुए है। यह प्रथा कहाँ से आई? वह धर्म के जरिये अस्तित्व में आई।
इस तरह हम फिर देखते हैं कि धर्म लोगों को बांटता है। धर्म न सिर्फ धार्मिक आधार पर लोगों को आपस में बांटते हैं बल्कि एक ही धर्म के मानने वालों के बीच भी खाई पैदा करते हैं और उन्हें अलग अलग वर्गों या वर्णों में बाँट कर उनके बीच आपसी नफरत पैदा करते हैं। उन्होंने जातियाँ बनाईं। जो भी उस वक़्त सत्ता में था उसने निर्धारित किया कि वह सबसे ऊंची जाति में शामिल होगा। इन नियमों के अनुसार उन्होंने धर्मग्रंथ लिखे और सारी कौम को भिन्न-भिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग समूहों में बाँटकर अपनी, यानि उच्च जातियों की, चाकरी में लगा दिया। इसी प्रक्रिया के तहत कुछ लोगों को अछूत बनना पड़ा जिससे वे अपने आकाओं के लिए समाज के सारे गंदे काम कर सकें।
आजकल हम देखते हैं कि दूसरे धर्मों के बहुत से लोग हिन्दू धर्म पर बड़े मंत्रमुग्ध नज़र आते हैं। दुनिया के कोने-कोने से ऐसे लोग भारत आते हैं और कभी-कभी हिंदुओं जैसा व्यवहार करते हुए हिन्दू धर्म को अंगीकार करने का प्रयत्न करते हैं। वे समझ नहीं पाते कि जाति प्रथा हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसकी उत्पत्ति भी हिन्दू धर्म से हुई है। और वही धर्म जिसे आप इतना पसंद करने लगे कि उसकी नकल करते हुए आप गदगद हैं, वह लोगों को नीची और ऊंची जातियों में बाँट रहा है।
यह बड़ा हास्यास्पद होता है जब मैं किसी पश्चिमी व्यक्ति को हिन्दू बनने की कोशिश करते पाता हूँ। दरअसल यह संभव ही नहीं है। हिन्दू जन्मजात होता है। अगर आपने एक हिन्दू के रूप में जन्म लिया है तभी आप हिन्दू हैं; अपना धर्म परिवर्तन करके आप उसमें शामिल नहीं हो सकते। यहाँ वृंदावन में हम इस्कॉन के कई भक्तों को हिन्दू धर्म की कई परंपराओं का अनुसरण करते हुए देखते हैं। वे सिर मुंडवा लेते हैं और शिखा या चोटी रखते हैं, जैसा कि अधिकतर ऊंची जातियों के हिन्दू करते हैं। वे ऊंची जातियों की निशानी माना जाने वाला उपनयन या जनेऊ पहनते हैं, जो एक धागा होता है जो उनके बाएँ कंधे पर लटका होता है। वास्तविक हिन्दू जब उन्हें देखता है तो यह उसे हास्यास्पद लगता है बल्कि एक चुट्कुले जैसा लगता है। वह सोचता है, छोटी जातियों के हिंदुओं को भी इन चीजों के इस्तेमाल की इजाजत नहीं होती और आप जो हिन्दू ही नहीं हैं इसे पहनकर घूम रहे हैं?
इस संप्रदाय के संस्थापक के अनुसार इसमें कुछ भी गलत नहीं है और उन्होंने अपने सदस्यों से यह सब पहनने के लिए कहा है मगर बहुत से लोग इस पर अचरज और शंका करते हैं। यह कैसे हो सकता है? आप हिन्दू नहीं हैं और बन भी नहीं सकते और हिंदुओं की उच्च जाति के लिए सुरक्षित चिन्हों को पहनते हैं। ऊंची जाति के हिन्दू उपनयन पहनने और चोटी रखने को बड़े गर्व की बात समझते हैं। उनकी नकल करके आप दरअसल जाति प्रथा की हिमायत कर रहे हैं! पश्चिमी लोग, जो आम तौर पर जाति प्रथा से घृणा करते हैं, इन हिन्दू परंपराओं की नकल करके दरअसल इस घृणित प्रथा का समर्थन करते नज़र आते हैं।
हम कहते हैं कि जाति प्रथा अमानवीय है मगर करोड़ों लोग हैं जो इन प्रथाओं को न सिर्फ मानते हैं बल्कि इसकी हिमायत भी करते हैं और इसीलिए यह आज भी बनी हुई है। यहाँ तक कि जाति प्रथा को मानने वाले ऐसे भी लोग हैं जो यह तो मानते हैं कि यह एक बुरी प्रथा है मगर जैसा अधिकांश जनता चाहती है वैसा ही करते हैं। यह कोई बात नहीं हुई कि अधिकांश लोग किसी गलत बात को मानें तो वह सही हो जाती है। कई लोग हिटलर का अनुसरण करते थे लेकिन आप यह नहीं मान सकते कि वह ठीक था! मनुष्य के इतिहास में कई ऐसे उदाहरण हैं जहां बहुत समय तक गलत बातें चलती रहीं क्योंकि लोगों ने बहुमत की गलत बातों का समर्थन किया। आप जो कर रहे हैं उसके बारे में सोचें और सोचें कि क्या आप ऐसा करना जारी रख सकते हैं।
जाति प्रथा को समाप्त करने के लिए लोगों को सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि यह गलत है और फिर उसे समर्थन देने वाली सभी बातों से दूर हो जाना चाहिए। मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूँ कि अधिकतर इस्कॉन भक्त यह नहीं समझते कि उनके ऐसे आचरण का क्या अर्थ है और इसीलिए मैं यह सब लिख रहा हूँ। अगर आप इस्कॉन के या किसी दूसरे संप्रदाय के, जो आपसे हिंदुओं की तरह आचरण करने के लिए कहता है, अनुयायी बनाना ही चाहते हैं तो पहले सारी बातों को ठीक से समझने का प्रयत्न करें कि उनका अर्थ क्या है जिन्हें करने के लिए आपसे कहा जा रहा है और क्या आप उन बातों का समर्थन कर सकते हैं जो आपका यह आचरण प्रतिपादित करेगा। अपने आचरण से जाति प्रथा का किसी भी हालत में समर्थन न करें क्योंकि यह कुछ लोगों को अछूत बनाती है और कुछ दूसरों को उन्हें प्रताड़ित करने वाला उच्चवर्णी। यह समझें कि आप क्या कर रहे हैं और उसमें परिवर्तन लाएँ।
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