जाति, धर्म, संस्कृति और समाज के नाम पर ‘ऑनर किलिंग’ – 21 नवंबर 2011

शुक्रवार को मैंने ऑनर किलिंग के बारे में लिखा था कि कैसे-कैसे भयानक हत्याकांड इन हवाई अवधारणाओं के चलते हो रहे हैं। मैंने ‘ऑनर किलिंग’ शब्द ही भारत में हो रहे ऐसे प्रकरणों के संदर्भ में ही जाना। एक लड़का है और एक लड़की है और वे दोनों प्रेम करने लगते हैं मगर उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं है। क्यों? क्योंकि वह एक जाति का है और लड़की दूसरी जाति की। जब मैंने अपना बहुत सा वक़्त विदेशों में बिताया तब मुझे पता चला कि सम्मान हत्याएँ वहाँ भी होती हैं मगर जाति के सवाल पर नहीं।

यहाँ ये हत्याएँ इसलिए होती हैं कि सामान्यतः यहाँ तयशुदा (आयोजित) विवाह होते हैं और माँ-बाप और परिवार के सदस्य शिद्दत के साथ चाहते हैं कि उनके बच्चे अपनी जाति के भीतर ही विवाह करें। वे अंतर्जातीय विवाहों को शर्मनाक समझते हैं। अपनी जाति की पवित्रता बरकरार रखना हर हाल में ज़रूरी है और इसे वे अपनी और अपने परिवार की इज्ज़त समझते हैं। कभी-कभी उनके बच्चे ऐसे 'उपयुक्त' विवाह प्रस्तावों का निषेध करते हैं और हर संभाव्य जीवन साथी को अस्वीकृत करते चले जाते हैं। इसके विपरीत वे किसी नीची जाति के लड़के या लड़की के प्रेम में लिप्त हो जाते हैं! यह संबंध उनके माँ-बाप को 'बेइज़्ज़त' करने के लिए काफी होता है। यह भी सच है कि सारे गाँव वाले और उनके सारे रिश्तेदार यह अपेक्षा करते हैं कि उनका बेटा या बेटी अपने विवाह हेतु किसी उपयुक्त व्यक्ति का, यानि अपनी जाति के व्यक्ति का ही चुनाव करेंगे। इसमें बड़ा सामाजिक दबाव होता है और पड़ोसी और आसपास के दूसरे लोग बच्चों के इस नियमभंग के चलते उनके माँ-बाप की इज्ज़त करना भी छोड़ सकते हैं; यहाँ तक कि उन्हें प्रताड़ित भी कर सकते हैं।

जब ऐसा हो जाता है तो उनके परिवार अपने बच्चों के और मुख्य रूप से खुद अपने, सम्मान को बचाए रखने का एकमात्र उपाय इस बात में देखते हैं कि वे अपने बच्चे की और उसके साथी की, जो इस परेशानी का कारण बना था, हत्या कर दें और वे ऐसा करते भी हैं। एक अनुमान के अनुसार हर साल लगभग 1000 ऑनर किलिंग भारत में होती हैं।

जब मैंने सुना कि ऐसा पश्चिम में भी होता है तो मैं शुरू में आश्चर्य में पड़ गया था कि यहाँ क्यों भई? यहाँ तो कोई जाति प्रथा नहीं है, फिर क्यों? धीरे-धीरे मैंने जाना कि ऐसा अधिकतर अप्रवासी परिवारों में, दूसरी संस्कृतियों के लोगों में होता है, जो बाहर से आकर वहाँ बस गए हैं। इस नज़रिये से यह बिल्कुल भारत में होने वाली हत्याओं जैसा ही लगता है। मुस्लिम परिवारों में ऐसे प्रकरण ज़्यादा देखने में आते हैं मगर ऐसा हिंदुओं और दूसरे धर्मों को मानने वालों में भी होता है। क्यों? अधिकतर इसलिए कि उनकी लड़की ने किसी दूसरे संप्रदाय के लड़के के साथ संबंध स्थापित कर लिया है या सिर्फ शक है कि उसने ऐसा किया है।

ये अप्रवासी परिवार किसी तरह अपनी संस्कृति को बचाए रखना चाहते हैं। मैंने इस बारे में काफी जानकारी प्राप्त की है, सोचा है और कई बार लिखा भी है और अब मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि उनके लिए सम्मान हत्याएँ अपनी संस्कृति बचाए रखने का अंतिम अस्त्र है। वे ऐसे समाजों से आए हुए लोग होते हैं जहां आदमी और औरत सिर्फ अपनी पत्नी या पति से ही संबंध रख सकते हैं और उनके लिए पश्चिम के आज़ाद संस्कारों के साथ तादात्म्य स्थापित करना काफी मुश्किल होता है। बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड, विवाह से पहले यौन संबंध स्थापित करना या विवाह करना ही नहीं मगर साथ रहना, यह सब स्वीकार करना उनके लिए असंभव होता है। अपने देश के मुकाबले पश्चिमी देशों की लड़कियों का स्वतंत्र व्यवहार उन्हें नागवार गुज़रता है।

इन दो संस्कृतियों और समाजों के दबाव तले पिसते हुए वे डरते हैं कि कहीं उनके बच्चे अपनी संस्कृति, जो उन्हें इतनी प्यारी है, छोडकर इस नई संस्कृति को न अपना लें। और जब वे ऐसा कर बैठते हैं तो उनके माँ-बाप और अधिकतर उनके भाई, चाचा, और परिवार और समाज के दूसरे सदस्य, अपने बेलगाम गुस्से और पागलपन में अपने ही बच्चों, सगे भाई-बहनों और परिजनों के विरुद्ध ऐसे जघन्य अपराध कर बैठते हैं कि सोचकर दिल काँप उठता है।

यह सम्मानजनक नहीं, शर्मनाक है! यह भयानक और डरावना है। मैं समझता हूँ कि यह विश्वव्यापी बुराई इसलिए है कि लोग दूसरों से अपने आपको अलग मानते हैं। मनुष्य मनुष्य में अंतर करते हैं और यह जाति, धर्म, संस्कृति और जीवन के प्रति बेहद दकियानूसी और पिछड़े रवैये के चलते होता है। यह अज्ञान है और प्रतिरोध की एक पुरातन और असभ्य प्रतिक्रिया है जिसमें आपका अपने आप पर कोई नियंत्रण नहीं होता। इसके अलावा यह मर्द का औरतों पर कब्ज़ा बनाए रखने का एक और प्रयास भी है।

कई कारण, कई दुखद कहानियाँ! मगर हमें और विशेष रूप से उन्हें, जिनके दिमाग में ऐसी हत्याओं का फितूर समाया हुआ है, सिर्फ ज़्यादा शिद्दत के साथ आपस में प्रेम करना सीखना चाहिए। आप जिसे इतना चाहते हैं उसके साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? कभी नहीं कर सकते! आप तो उसे खुश देखना चाहते हैं! किसी पर भी, खास कर जिसे आप इतना चाहते हैं उस पर अपनी इच्छा, अपनी पसंद किसी भी हालत में न थोपें। 'इज्ज़त' के इस अजीबोगरीब अर्थ को अपने मन में प्रवेश न करने दें। खुद स्वतंत्र हों और दूसरों को भी स्वतंत्रता के साथ जीने का अधिकार देने में संकोच न करें।

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