खूबसूरती अलग-अलग रूपों में सामने आती है! खूबसूरती के गलत मानदंडों से हानि- 28 अगस्त 2013

शरीर

कल मैंने समझाया था कि कैसे कुछ लोग, खासकर औरतें, अपने आप की तुलना दूसरों से करते हैं, अपनी संदेहास्पद विजय के लिए अपने स्वाभिमान को ताक पर रख देते हैं और जब तुलना में वे हार जाते हैं तो उन्हें बुरा लगता है। यह तो होता ही है कि अकेले में इस विषय में सोचकर आपको दुख होता है, लेकिन आप यह भी समझें कि खूबसूरती के जिस आदर्श के पीछे आप भाग रहे हैं वह आपके लिए और भी बहुत सी समस्याएँ लेकर आता है।

मुझे लगता है कि इस बारे में चर्चा करके वक़्त बरबाद करने की कोई ज़रूरत नहीं है कि खूबसूरती के जिन आदर्शों से अधिकांश महिलाएं अपने शरीर की तुलना करती हैं वह वास्तविकता पर आधारित है या नहीं। मीडिया जिस छवि को दर्शा रहा है उन्हें कम्प्युटर द्वारा सुधारा गया है, जिन्हें दिखाया जा रहा है उन्होंने उस वक़्त काफी मेकअप किया हुआ होता है, प्रकाश-व्यवस्था उनके पक्ष में होती है, परन्तु वे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में अभिनय नहीं कर रही होतीं और सबसे बढ़कर, वैसा दिखाई देना उनका व्यवसाय होता है। इस तरह, जो छवि आप आम तौर पर पोस्टर्स पर, पत्र-पत्रिकाओं में, टीवी पर देखती हैं वह आपके दिमाग में ज़बरदस्ती प्रवेश कर जाता है और आप भूल जाती हैं कि यह आपको इसलिए दिखाया गया है कि आप उस विज्ञापित वस्तु को खरीदें। और आप इसे सुन्दरता का मानदंड मान लेते हैं कि आपको और सभी महिलाओं को खूबसूरत कहलाने के लिए उसके जैसा दिखाई देना चाहिए!

मुख्यधारा का मीडिया इस बात की परवाह नहीं करता कि कई तरह के शरीर वाले लोग होते है! आखिर जिन्हें आप देखते हैं, पुरुष और महिलाएं, वे बहुत थोड़े से चुनिन्दा लोग होते हैं, कड़े मानकीकरण और कसौटियों से, जिन पर अधिकांश लोग पूरा नहीं उतर सकते, गुज़रकर आए हुए लोग।

इसका नतीजा स्पष्ट है: सभी लोग सोचते हैं कि यह साधारण और सामान्य-सी बात है और उनकी तरह दिखना चाहते हैं। अगर वे इसमें असफल होते हैं तो वे सोचते हैं कि वे उतने खूबसूरत नहीं हैं-जब कि यह वास्तव में बिल्कुल असंभव है! और यह सत्य बहुत सी महिलाओं को निराश कर देता है, जो बड़ी ईमानदारी से अपना वज़न कम करने की कोशिश कर रही थीं, या टीवी में दिखाई जा रही महिला की तरह की देहयष्टि बनाने की कोशिश कर रही थी! वे इसमें सफल नहीं हो सकतीं और इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे, हो सकता है कि उनकी शारीरिक बनावट ही बिल्कुल अलग हो!

यह देखते हुए, कई इस प्रयास से ही अपने आपको मुक्त कर लेती हैं। वे देखती हैं कि ‘खूबसूरत’ माने जाने का एकमात्र तारीका यही है कि उनके जैसा दिखाई दिया जाए-लेकिन वे कभी भी उसमें सफल नहीं हो पाएँगी, इसलिए कोशिश करने से क्या लाभ? उनमें कसरत करने का उत्साह नहीं रह जाता, घूमने-फिरने और अपने शरीर के लिए कुछ करने की इच्छा ही नहीं रह जाती। सिर्फ एक ही कारण वे देखती हैं और वह है प्रतिस्पर्धा या एक लक्ष्य, जिसे पाना है, मगर जब यह संभव ही नहीं है तो कोशिश ही क्यों करें? वे जानती हैं कि वे कभी भी जीत नहीं पाएँगी।

समाज जिस तरह से चल रहा है और खूबसूरती के अस्वाभाविक, और अवास्तविक मानदंडों को बढ़ावा दे रहा है, उसे बदलने के अलावा इस समस्या का एक समाधान यह है कि कसरत, स्वास्थ्यप्रद खान-पान और अपने शरीर के प्रति अपने नज़रिये को बदला जाए। आपको समझना चाहिए कि आप स्वास्थ्यवर्धक भोजन इसलिए नहीं करते कि आपका वज़न कम हो और आप किसी और की तरह दिखें। आप सबेरे सैर करने इसलिए नहीं जातीं या दौड़ इसलिए नहीं लगातीं या तैरने इसलिए नहीं जातीं कि आपका शरीर किसी दूसरे जैसा हो जाए। आपको यह सब किसी दूसरे के लिए नहीं बल्कि अपने लिए करना चाहिए!

यह सब अपने लिए कीजिए! अच्छा, स्वास्थ्यवर्धक भोजन कीजिए क्योंकि आप अच्छा महसूस करें! व्यायाम कीजिए क्योंकि आपका मन प्रसन्न रहे और आपका शरीर पुनः तरोताजा हो जाए, आप स्फूर्ति महसूस करें! वज़न सीमा में रहेगा तो आपको लाभ होगा किसी और को नहीं! स्वस्थ रहने के लिए यह सब कीजिए क्योंकि आप अपने शरीर से प्रेम करती हैं, क्योंकि आप खुद से प्रेम करती हैं!

अगर पर्याप्त लोग इस तरह व्यवहार करें तो हो सकता है कि विज्ञापन कंपनियाँ, फिल्म इंडस्ट्री और समाज भी धीरे-धीरे यह समझ जाएंगे कि हर व्यक्ति के अंदर सुंदरता है, अलग-अलग अनंत आकारों और रूपों में!

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