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अपने शरीर से प्रेम का अर्थ यह नहीं है कि खा-खाकर मोटे हो जाएँ और यह भी नहीं कि भूखे मर जाएँ! 20 अगस्त 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि अपने शरीर से असंतुष्ट होने पर लोग दो तरह का व्यवहार करते हैं: या तो वे खाना खाना छोड़ देते हैं और बहुत अधिक व्यायाम करने लगते हैं या फिर अपने शरीर के प्रेम में, जैसा है, उसे अपनी नियति मान लेते हैं वे दोनों बातों को उचित नहीं समझते। क्यों? यहाँ पढिए!

क्या आप अपने शरीर से नाखुश हैं, मनपसंद खाना खाने के बाद क्या आप पछताते या ग्लानि महसूस करते हैं? 23 फरवरी 2015

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अक्सर लोगों के मन में स्वस्थ और सुंदर शरीर की एक काल्पनिक तस्वीर जड़ जमाकर बैठी होती है। स्वामी बालेंदु इस बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि यह एकमात्र आदर्श नहीं है, जो मीडिया आपको दिखाता है।

भारतीय नाभियाँ या पश्चिमी पिंडलियाँ – क्या ज़्यादा सेक्सी है? 22 दिसंबर 2014

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स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि क्यों कोई सामान्य रूप से यह नहीं कह सकता कि सभी भारतीय अपने आपको ढँककर रखते हैं या सारे पश्चिमी लोग सेक्सी कपड़ों में घूमते फिरते हैं!

खूबसूरती अलग-अलग रूपों में सामने आती है! खूबसूरती के गलत मानदंडों से हानि- 28 अगस्त 2013

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों महिलाओं की खूबसूरती के प्रचलित मानदंड कुछ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह बना देते हैं!

दूसरों से तुलना करने पर न तो आपकी सुन्दरता बढ़ती है न ही घटती है- 27 अगस्त 2013

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स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं कि कैसे सिर्फ औरतें ही नहीं, कई मर्द भी अपने से कम सुंदर व्यक्ति को देखकर ही सुंदर महसूस कर पाते हैं या खुश हो पाते हैं!