पार्टी, जिसके लिए मैं खास तौर पर भारत से जर्मनी आया – 15 सितम्बर 2014

जन्मदिवस

लुनेबर्ग में शानदार सप्ताहांत के बाद अपने मित्रों, माइकल और आंद्रिया, के साथ हम वापस वीज़बादेन आ गए हैं। वहाँ गुज़ारे कुछ सुखद और शानदार पलों के बारे में संक्षेप में आपको बताना चाहता हूँ!

अपने निश्चित कार्यक्रम के अनुसार हम शनिवार को सुबह तड़के ही लुनेबर्ग के लिए निकल पड़े और दोपहर के आसपास वहाँ पहुँच गए। वहाँ सारी तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही थीं: बगीचे में एक टेंट लगाया जा चुका था, भोजन और नाश्ते आदि का इंतज़ाम करने वाले कैटरर गिलास-प्लेटें आदि और चाय नाश्ते का शुरूआती सामान ले आए थे और बगीचा समारोह हेतु सजाया और तैयार किया जा रहा था।

लेकिन पार्टी से पहले ही हम लोग यानी हम दोनों के परिवार एक दूसरे के साथ शाम का समय आनंदपूर्वक बिता पाए। हम एक रेस्तराँ में गए और अपने मित्र के साथ, जो तब तक 59 साल का ही था, पुरानी बातों को याद करते रहे और आने वाले आकर्षक समय की योजनाएँ बनाते हुए वर्त्तमान का लुत्फ़ उठाते रहे।

पिछले दो सप्ताह से हम सभी रविवार के लिए की जाने वाली मौसम की भविष्यवाणियों पर नज़र गड़ाए हुए थे। कुछ तो इसलिए कि कौन से कपड़े लेकर चला जाए इस बारे में हम सुनिश्चित होना चाहते थे और कुछ इसलिए कि लगभग 100 लोग निमंत्रित थे और अगर बारिश हो जाती तो इतने लोग वहाँ समा ही नहीं पाते! बगीचे में ताने गए टेंट के बावजूद सबका वहाँ समाना मुश्किल ही था। इसलिए हम आशा कर रहे थे कि बारिश नहीं होगी मगर शनिवार की शाम को बारिश की 80% संभावना जताई जा रही थी और भविष्यवाणी की गई थी कि रविवार को सूरज दिखाई ही नहीं देगा।

आप हमारी ख़ुशी की कल्पना कर सकते हैं जब हम सुबह उठे और खिड़की से हमें चमकता हुआ सूरज दिखाई दिया! सारा दिन सूरज आँख-मिचौली खेलता रहा मगर अधिकतर समय वह खूब चमकता रहा और इसलिए तापमान भी बड़ा सुखद रहा और अंततः मौसम पार्टी के लिए बहुत आदर्श और सुखदायी रहा आया क्योंकि पार्टी का कुछ हिस्सा बगीचे में ही आयोजित किया गया था!

और सभी ने पार्टी का भरपूर मज़ा लिया! मैं बहुत से लोगों से मिला, माइकल और आंद्रिया के मित्र और रिश्तेदार, जिन्हें मैं कई सालों से जानता था और दूसरे लोग, जिनके सिर्फ नाम ही मैंने सुन रखे थे, दोस्तों के मुख से उनकी कहानियाँ सुनी थीं। हमने खूब बातें की, एक-दूसरे की कहानियाँ सुनी-सुनाईं और अनुभव साझा किए।

मेरी सबसे बड़ी ख़ुशी तो यही थी कि मेरे मित्र बहुत खुश थे! न जाने कितने लोग माइकल का जन्मदिन मनाने आए थे और फिर उसने एक छोटा सा भाषण दिया, जिसमें एक के बाद एक, हर एक का ज़िक्र किया, हर एक से उसके पास जाकर हाथ मिलाया, उन्हें छुआ और इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों से आए वे सब लोग आपस में परिचित हो सके, एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ हो सके!

अपरा का समय भी बड़ा शानदार गुज़रा! माइकल के एक बहुत पुराने दोस्त ने एक घंटे के लिए एक कोलंबियन गायक और गिटार बजाने वाली को बुला लिया था, जिसने स्पेनिश संगीत से पार्टी में एक अलग ही समां बाँधा। अपरा उस महिला के पीछे लग गई और उसके गिटार के स्वरों की नक़ल उतारती रही, नाचती-गाती रही, रोमांचित होकर तालियाँ बजा-बजाकर पार्टी का मज़ा लेती रही! कुछ दूसरे बच्चे भी वहाँ आए थे और जब संगीत समाप्त हुआ वह उनके साथ खेलने लगी, पूरी तरह अपरिचित लोगों के साथ निःसंकोच घुल-मिल जाना कोई उससे सीखे!

शाम को लोग धीरे-धीरे बिदा हुए। तीन-चार दम्पति को वहाँ इतना आनंद आ रहा था कि वे देर रात तक रुके रहे! लेकिन अंत में हम परिवार वाले, एक और दम्पति, जो माइकल के नज़दीकी मित्र थे और जिन्हें हम भी बहुत पहले से जानते थे तथा उनकी एक युवा बेटी, और बस, इतने ही लोग रह गए। इस लड़की का पिता माइकल का वही मित्र था, जो उसके 50वें जन्मदिन पर उसके साथ भारत आया था!

इस तरह हमारा वह शानदार दिन समापन को आया, दोस्तों के बीच, सुकून के साथ। समारोह के बारे में माइकल ने हमसे जो सबसे अच्छी बात कही वह यह थी कि उसे महसूस हो रहा था कि हमारी उपस्थिति ने समारोह को कुछ अधिक ख़ास बना दिया था। एक सामान्य पार्टी नहीं बल्कि एक मील का पत्थर, जीवन का एक यादगार अवसर, जिसमें शामिल होने के लिए भारत तक से लोग आए थे! मेरा, रमोना का और अपरा का वहाँ होना उसके और उसके मित्रों के लिए समारोह को सदा-सदा के लिए यादगार बना गया। और हमारे लिए भी वहाँ मौजूद रहना उतना ही ख़ास और यादगार था।

हमने तय किया है कि अपने 70वें जन्मदिन पर माइकल फिर से भारत आएगा-और मैंने भी जोड़ दिया है कि उसके 80वें जन्मदिन पर मैं भी हर हाल में जर्मनी पहुँच जाऊँगा!

एक बार फिर, मेरे दोस्त, मैं तुम्हारे अगले 60 सालों के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त करता हूँ। तुम्हारे अगले साठ साल भी इसी तरह शानदार, सुखद और हँसी-ख़ुशी से भरपूर हों!

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