रमोना का जन्मदिन मनाया, उसके पिता और बेटी अपरा के साथ – 19 मार्च 13

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आज 19 मार्च है, मेरी पत्नी रमोना का जन्मदिन। इस बार यह दिन कुछ खास है: रमोना का यह दूसरा जन्मदिन है जो उसने अपनी बेटी अपरा के साथ मनाया है और आज कई सालों के बाद उसके पिता भी इस खुशी में शरीक हुए हैं। जी हां, रमोना के पिता हमारे यहां आए हुए हैं और हम सबको बहुत अच्छा लग रहा है।

अपरा को उन्होंने एक साल के बाद देखा है। पिछली बार जब रमोना के पिता यहां आए थे तब वह तीन महीने की थी और उसने अपना सिर ऊपर उठाना शुरु ही किया था तब। वह अपने पेट के बल करवट बदल लेती थी। नाना की तरफ देखती थी और आगे बढ़ने के लिए तेजी से पैर मारने लगती थी। तब अधिकतर टाइम वह सोती रहती थी — लेकिन अब बहुत कुछ बदल गया है!

हम अपरा को रोज बताते थे कि जल्दी ही उसके नाना आने वाले हैं। उसने अपने नाना के फोटो देखे हैं और हर हफ्ते उनको स्काइप पर भी देखती है। तो हम सब यह देखने के लिए बड़े उत्सुक थे कि असल में नाना को सामने देखकर उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी और अपरा ने हमें निराश नहीं किया: जब नाना कार से उतरे तो उसने उनके चेहरे की तरफ देखा और उसकी आंखें साफ बता रहा रही थीं कि उसने उन्हें पहचान लिया था। वह मुस्कराने लगी और बहुत खुश हुई – लेकिन साथ ही थोड़ा शरमा भी रही थी।

जब नाना ने उसके लिए लाए उपहारों का पिटारा खोला तो वह संकोच को भूलकर उनके इर्द – गिर्द घूमने लगी। नाना बहुत सारे खिलौने, किताबें लाए और साथ ही लाए लाल रंग की छोटी सी कार! अपरा को वह कार बहुत भाई। क्या हुआ यदि उसके नन्हें – नन्हे पांव अभी पैडल तक नहीं पहुंचते हैं, आश्रम के बच्चे उसे कार में घुमाते हैं और अपरा भी खुशी के मारे किलकारी मारने लगती है। दिनभर कार में ही बैठी रहती है वह।

कितनी चंचल है बच्ची, कहते हैं अपरा के नाना! सारा दिन वह पूरे आश्रम को व्यस्त रखती है। बच्चे उसके साथ क्रिकेट खेलते हैं, उसके चाचा कम्पयूटर पर गाय, छिपकली और उसके प्रिय अन्य जानवर उसे दिखाते है, उसकी मां कहानियां पढ़कर सुनाती है, मैं उसे अपने कपड़ों के भीतर छुपा लेता हूं और फिर वह अचानक बाहर निकलकर मुझे डराती है। मेरी नानी उसके लिए कुछ खास बनाकर अपने हाथों से उसे खिलाती हैं। बब्बा जी अपने छोटे मोटे डिब्बे व्यवस्थित करने में उसकी मदद लेते हैं। कभी कभार आश्रम का कोई व्यक्ति उसे पड़ोसी की गाएं दिखाने ले जाता है। वहां अपरा को एक नया दोस्त मिल गया है: उसके जितना ही गाय का एक छोटा बछड़ा!

यह सब करते वक्त वह तुतलाते हुए कुछ बड़बड़ाती रहती है, कभी हिंदी तो कभी जर्मन में, कभी अंग्रेज़ी तो कभी तीनों भाषाओ की खिचड़ी पकाती रहती है। बोलने की कोशिश में वह जो बड़बड़ाती है, वह किसी को समझ नहीं आता है। लेकिन उसे क्या चाहिए यह वह बड़े आराम से हमें समझा देती है। आओ, खोलो, देखो, बॉल, पानी और दूध जैसे महत्वपूर्ण शब्द एकदम साफ बोल लेती है। हमें लगता है कि वह अग़र इसी स्पीड से शब्दों और वाक्यों को पकड़ती रही तो जल्दी ही हिंदी, जर्मन और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में संवाद करने लगेगी।

अपरा का हमारे जीवन में होना एक बड़ा ही अद्भुत अहसास है! जब वह मेरी गोद में बैठी होती है और मैं किसी और से बात करना लगता हूं तो वह मेरा ध्यान वापिस अपनी तरफ खींचने की कोशिश करती है। वह उचककर मेरे गाल पर अपना हाथ रखती है और मेरे चेहरे को जबरन अपनी तरफ मोड़ लेती है। उसने कहीं एक छिपकली देखी तो मुझे दिखाने के लिए मेरी अंगुली पकड़कर मुझे खींचने लगी। मैं भी हाथ का काम छोड़कर उसके साथ चल दिया। ऐसा दुलार भरा आमंत्रण कोई ठुकरा सकता है क्या भला?

तो आज रमोना का जन्मदिन है और आज हम मेरी पत्नी रमोना का जन्मदिन नहीं मना रहे हैं बल्कि अपरा, जो हमारे परिवार की अगली पीढ़ी है की मां का जन्मदिन मना रहे हैं। हमें बड़ा अच्छा लग रहा है कि आज रमोना के पिता भी इस मौके पर हमारे साथ हैं।

अगले हफ्ते कुछ और मित्र भी यहां आने वाले हैं और उनमें से कई का जन्मदिन मार्च महीने में पड़ता है। इसलिए हमने होली पर जन्मदिन की एक बहुत बड़ी दावत का आयोजन किया है।

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