नास्तिकों की बढ़ती संख्या में बहुत बड़ा हिस्सा ईश्वर में विश्वास न रखने वाले युवाओं का है – 27 जुलाई 2015

नास्तिकता

मैंने आपको पिछले सप्ताह सम्पन्न नास्तिकों के सम्मेलन के बारे में बताया था। आपस में मिलकर हमने सचमुच बहुत शानदार वक़्त गुज़ारा और मैंने समान विचारधारा वाले लोगों के बीच दृष्टिकोण और विचारों के आदान-प्रदान का भरपूर आनंद लिया। और संख्या की दृष्टि से यह समुदाय भारत में और सारे विश्व में लगातार बढ़ता जा रहा है।

शनिवार को जो समूह आया, उनमें मिश्रित आयु वर्ग के लोग थे लेकिन ज़्यादातर बीस से तीस साल तक के युवक और युवतियाँ थे और कुछ तो बीस से कम उम्र वाले युवा भी थे। अधिक आयुवर्ग के हमारे बुजुर्ग मित्रों ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इतना विवेकपूर्ण सोच रखने वाले युवाओं की इतनी बड़ी संख्या बड़े संतोष की बात है! प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मैंने कहा कि ईश्वर एवं धर्म पर अपनी शंकाओं को साझा करके और उन पर चर्चा करके हम अपने देश में और आस-पास के दूसरे देशों में नास्तिकों की संख्या में और तेज़ी के साथ वृद्धि कर सकते हैं।

जी हाँ, मेरा पक्का मानना है कि अगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग ईश्वर को न मानें और किसी संगठित धर्म के अनुयायी न हों तो विश्व एक बेहतर स्थान बन सकता है। मैं एक नास्तिक हूँ और मुझे लगता है कि आगे बढ़ने का यह उचित रास्ता है। यदि मैं यह नहीं देख पाता कि धर्म में कुछ गड़बड़ है, तो मैं अब भी धार्मिक ही रहा होता! यदि मैं वास्तव में सोचता कि ईश्वर है तो मैं यह नहीं कहता कि मैं नास्तिक हूँ! मैंने धर्म का मार्ग छोड़ दिया है और यही कारण है कि मैं दूसरों से स्पष्ट शब्दों में कह सकता हूँ कि उन्हें भी इस बकवास को त्याग देना चाहिए!

मुझे विश्वास है कि एक न एक दिन अधिकतर लोग यह जान जाएँगे कि धर्म एक भ्रांति है। आप जितना विकास करेंगे, आप जितना आगे बढ़ेंगे, जितना आप दूसरे विचारों को जानेंगे और समझेंगे। और लोग जितना अधिक सम्पन्न होंगे, उतना ही वे धर्म की भ्रांतियों को समझेंगे और उसे छोड़ देंगे!

चर्चा के दौरान शनिवार को मैंने स्पष्ट किया कि मुख्यतः धर्म और ईश्वर उस अविकसित परिवेश के विषय है, जहाँ समृद्धि नहीं है। जहाँ आप निर्धनता देखते हैं, वहाँ आप बहुत अधिक धर्म भी देखेंगे। जहाँ आप विकास और जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं की प्रचुरता देखते हैं, वहाँ आपको धर्म न के बराबर दिखाई देगा।

सर्वेक्षण और अध्ययन तो पहले ही दिखा चुके हैं कि भारत के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी, भारतीय प्राद्योगिकी संस्थान के, दूसरी तकनीकी संस्थाओं के श्रेष्ठ भूतपूर्व छात्र नास्तिक बनते जा रहे हैं! एक युवा, आधुनिक और विकसित भारत आगे बढ़ते हुए एक नई पीढ़ी का निर्माण कर रहा है। एक ऐसी पीढ़ी, जो परंपराओं और रूढ़ियों पर शंकाएँ उपस्थित करेगी। एक ऐसी पीढ़ी, जो प्रश्न पूछने में संकोच नहीं करेगी। एक ऐसे युग का सूत्रपात हो रहा है, जिसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

धर्मभीरुओं के लिए शंका और प्रश्नों का निषेध है। और इसीलिए आने वाली पीढ़ियाँ धर्म और ईश्वर का त्याग कर देंगी। उनको पता है कि आप प्रश्न पूछ कर, शोध करके और विषय की गहराई में उतरकर ही सत्य की खोज कर सकते हैं। इस तरह निश्चय ही नास्तिक समुदाय अधिक से अधिक वृद्धि करेगा-और मुझे खुशी है कि मुझे भी उसका एक हिस्सा होने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

यहाँ आप नास्तिकों के सम्मेलन के चित्र देख सकते हैं

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