यह स्पष्ट करने के लिए कि आप नीरस या असंवेदनशील नहीं हैं, अपनी नास्तिकता को सबके सामने स्वीकार कीजिए – 28 जुलाई 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

मैंने कल उल्लेख किया था कि मैं खुशी-खुशी लोगों को बताता हूँ कि मैं नास्तिक हूँ। मैं इसका प्रसार करना चाहूँगा और अधिक से अधिक लोगों के मन में धर्म के प्रति शंका पैदा कर उन्हें उससे विलग करने की कोशिश करूँगा। लेकिन हर नास्तिक इस तरह नहीं सोचता! नहीं, ऐसे बहुत से लोग हैं, जो धर्म के प्रति अपने अविश्वास को खुले आम स्वीकार करने में संकोच करते हैं। यहाँ तक कि वे समझते हैं जैसे धर्म पर विश्वास न करके वे कोई अपराध कर रहे हैं। यदि आप भी उनमें से एक हैं तो आपको इसे बदलना चाहिए!

आप यदि इस समस्या की गहराई में जाकर उसकी गंभीरता को समझना चाहते हैं तो सबसे पहले यह जान लीजिए कि भारत में नास्तिक शब्द को, जिसे अंग्रेज़ी में एथीस्ट कहते हैं, बहुत ही नकारात्मक अर्थ में लिया जाता है। अधिकांश लोग धार्मिक हैं और उनका विश्वास होता है कि ईश्वर में आस्था रखने पर ही आप दयालु, परोपकारी, प्रेममय और प्रफुल्ल होते हैं और तभी आप जीवन का आनंद ले सकते हैं! वे सच में यह सोचते हैं कि जो ईश्वर को नहीं मानता वह एक अच्छा और नैतिक व्यक्ति नहीं हो सकता। वह दूसरों का भला नहीं कर सकता और न तो हँस-बोल सकता है और न ही अपने जीवन में किसी प्रकार से भी खुश रह सकता है! उसकी छवि एक बुरे व्यक्ति जैसी बना दी गई है।

वास्तव में इसीलिए लोग अपने आपको अधार्मिक या नास्तिक घोषित करने से कतराते हैं। वे अपने आपको प्रगतिवादी, तर्कशील, संदेहवादी, विवेकपूर्ण और इसी तरह के समानार्थी शब्दों से संबोधित करते हैं, जिनसे सिर्फ इतना पता चलता है कि वे दक़ियानूसी प्रथाओं और परंपराओं को नहीं मानते। पर इनमें से कोई भी शब्द, मेरी नज़र में, पर्याप्त स्पष्ट नहीं है और आपकी वास्तविक मंशा ज़ाहिर नहीं करता कि आप किसी भी धर्म का अनुपालन नहीं करते, कि आप ईश्वर पर विश्वास नहीं रखते, कि आप नास्तिक हैं।

समाज में “नास्तिक” शब्द को नकारात्मक अर्थ में लिया जाता है और आप नहीं चाहते कि लोगों के बीच आप एक नकारात्मक व्यक्ति के रूप में जाने जाएँ। लेकिन वास्तव में बदलाव लाने के लिए आपको शब्द नहीं बदलना है। यदि आप ऐसा करते हैं तो वास्तव में आप इस नकारात्मक सोच का समर्थन ही कर रहे हैं, आप यह साबित कर रहे हैं कि वास्तव में नास्तिक खुश नहीं रह सकते, आनंदित नहीं हो सकते। आप एक सकारात्मक व्यक्ति दिखाई देना चाहते हैं इसलिए मान रहे हैं कि आप नास्तिक नहीं हैं-क्योंकि नास्तिक तो सकारात्मक हो ही नहीं सकते! यह सही तरीका नहीं है।

इसमें खतरा यह है कि बहुत से दूसरे लोग अपने आपको आधुनिक अथवा अलग साबित करने के प्रयास में पाखण्ड पूर्वक ठीक इन्हीं शब्दों का उपयोग करते हैं, जबकि वास्तव में वे पूर्ण रूप से आस्तिक और धार्मिक होते हैं! आप कह सकते हैं कि वे तार्किक नहीं हैं किन्तु उनके अपने विचार से वे हैं! इस तरह गलती से आपको भी एक ऐसा आस्थावान और धार्मिक व्यक्ति समझ लिया जाएगा, जो थोड़ा खुले विचारों वाला है, इतना ही। अगर आप कहते हैं कि आप 'प्रगतिशील' हैं तो उसका अर्थ, अपनी पूजा-अर्चना दिए की जगह बिजली का बल्ब जलाकर करने वाले व्यक्ति से लेकर ईश्वर पर विश्वास न करने वाले किसी नास्तिक व्यक्ति तक, कुछ भी लगाया जा सकता है!

जो बात कहनी है, बिना लाग लपेट के, साफ-साफ कहिए। सिर्फ यही स्पष्टता गलतफहमियाँ और भ्रांतियाँ दूर कर सकती है।

हमें ‘नास्तिक’ शब्द के इस नकारात्मक अर्थ के चलन को तोड़ना है किन्तु यह तभी संभव है जब हम स्वयं को नास्तिक कहें और यह दिखा सकें कि नास्तिक होने के बाद भी हम जीवन का उतना ही, बल्कि सामान्य से ज्यादा ही, आनंद लेते हैं। आप क्या हैं और क्या सोचते हैं, स्पष्ट रखें। अगर वह आपके लिए सहज, स्वाभाविक और उचित है तभी आप दूसरों को भी उसके बारे में बता सकते हैं। समय के साथ यह छवि भी बदलेगी। ईमानदार और सत्यनिष्ठा रहें- बदलाव अवश्य आएगा!

यहाँ आप नास्तिकों के सम्मेलन के चित्र देख सकते हैं

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