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माफ कीजिए, मैं नास्तिक गुरु नहीं हो सकता – 6 अगस्त 2015

नास्तिकता

स्वामी बालेंदु इस बात का एक और कारण बता रहे हैं कि वे क्यों कभी भी एक नास्तिक संगठन की स्थापना नहीं करेंगे: किसी भी संगठन को एक ढाँचे की और परंपरा से चले आ रहे एक पुरोहिताधिपत्य की जरूरत होती है, जिसका वे हिस्सा नहीं बनना चाहते।

मैं नास्तिकों का कोई संगठन या धर्म क्यों नहीं बनाउंगा! 5 अगस्त 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों, उनके मुताबिक, नास्तिकों का संगठन नहीं होना चाहिए। नास्तिकता को किस प्रकार जिया जाना चाहिए, इस विषय में उनके विचार यहाँ पढ़ें।

नास्तिकता का प्रसार करके क्या हम दुनिया को बेहतर जगह बना सकते हैं? 4 अगस्त 2015

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स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि वास्तव में वे क्यों इस बात की परवाह नहीं करते कि आप नास्तिक हैं या नहीं? क्योंकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता!

लोगों के जीवन पर धर्म और ईश्वर का प्रभाव – भारत और पश्चिमी देशों के बीच तुलना – 3 अगस्त 2015

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स्वामी बालेन्दु ईश्वर और धर्म के प्रभाव के मामले में भारत और पश्चिमी देशों में हुए अपने अनुभवों के अंतर के बारे में विस्तार से लिख रहे हैं।

नास्तिकों के लिए निर्णय लेना और ज़िम्मेदारी स्वीकार करना क्यों आसान होता है? 30 जुलाई 2015

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स्वामी बालेन्दु स्पष्ट कर रहे हैं कि उन्होंने अक्सर यह देखा है कि आस्थावान लोगों के लिए ज़िम्मेदारी क़ुबूल करना और किसी बात पर निर्णय लेना नास्तिकों के मुकाबले ज़्यादा मुश्किल होता है। क्यों? यहाँ पढ़िए!

नास्तिक दूसरों की सहायता करने के लिए अच्छे काम करते हैं, पुण्य कमाने के लिए नहीं – 29 जुलाई 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि नास्तिक अच्छा काम इसलिए करते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि वह काम करना उचित है, इसलिए नहीं कि उससे उन्हें पुण्य मिलेगा या ईश्वर ने वैसा करने के लिए कहा है!

यह स्पष्ट करने के लिए कि आप नीरस या असंवेदनशील नहीं हैं, अपनी नास्तिकता को सबके सामने स्वीकार कीजिए – 28 जुलाई 2015

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स्वामी बालेंदु नास्तिकों से आह्वान कर रहे हैं कि वे दूसरों को अपना दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से बताएँ और खुलकर कहें कि वे नास्तिक हैं। इस तरह, नास्तिकता को लेकर व्याप्त नकारात्मक छवि को बदला जा सकता है!

नास्तिकों की बढ़ती संख्या में बहुत बड़ा हिस्सा ईश्वर में विश्वास न रखने वाले युवाओं का है – 27 जुलाई 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि आश्रम में आयोजित नास्तिकों के सम्मेलन में बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति दर्शाती है कि युवा वर्ग ही भारत और विश्व में नास्तिकों की बढ़ती आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।