आश्रम में सेक्स और धोखा – 7 अप्रैल 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

थॉमस, आयरिस और मैं कल यानी 6 अप्रैल के ब्लॉग के बारे में बातें कर रहे थे, जिसमें महिलाओं और पुरुषों द्वारा अपने जीवनसाथी के साथ धोखा किए जाने का ज़िक्र था। बातों-बातों में हमें अपने दो भूतपूर्व कर्मचारियों और धोखेबाज़ी के उनके किस्से का स्मरण हो आया-उस समय का जब वे यहाँ आश्रम में नौकरी कर रहे थे!

किसी की अनुशंसा पर हमने आश्रम में एक रसोइये को काम पर रखा था और जब यह घटना घटी थी तब उसे हमारे यहाँ काम करते हुए सिर्फ तीन या चार हफ्ते ही हुए थे। रसोई में काम करने वाले कुल जमा चार लोग थे: एक रसोइया और तीन उसके सहायक। सहायकों में एक महिला भी थी, जो पहले अपने पति के साथ हमारे यहाँ काम किया करती थी। उस बार उन्हें हमारी नौकरी छोड़नी पड़ी थी क्योंकि पति बहुत ईर्ष्यालु और शक्की था और सोचता था कि हमारे सारे कर्मचारी उसकी पत्नी के साथ यौन संबंध स्थापित करना चाहते हैं। एक बार वह हमारे ड्राइवर के साथ हाथापाई भी कर चुका था! एक साल बाद जब वह महिला हमारे पास काम मांगने आई तो हमने उसे इस शर्त पर रख लिया था कि वह अपने पति को आश्रम आने नहीं देगी-क्योंकि हम आश्रम में लड़ाई- झगड़ा नहीं चाहते थे!

जो हमारी नज़रों से ओझल रह गया, वह था हमारी ही रसोई में परवान चढ़ता एक अनैतिक संबंध! दूसरे कर्मचारियों के बीच उन दोनों को लेकर फुसफुसाहटें और कानाफूसियाँ शुरू हो गईं: वह रसोइया और उसकी सहायक! खैर, हमने सोचा, यहाँ सभी वयस्क हैं और दो वयस्कों के व्यक्तिगत मामले में हम कौन होते हैं दखल देने वाले! फिर यह किसे पता कि जो बातें हवा में तैर रही हैं, उनमें कोई तथ्य भी है या नहीं? तो, उन सुनी-सुनाई बातों पर हमने ज़्यादा कान देना उचित नहीं समझा।

फिर एक दिन एक कर्मचारी पूर्णेन्दु के पास दौड़ती हुई आई! वह बहुत उत्तेजित थी और उसने पूर्णेन्दु को साथ आने के लिए कहा! पूर्णेन्दु ने सोचा, कोई दुर्घटना हो गई है और वह उसके साथ चल दिया। कर्मचारियों के लिए बने वाशरूम का दरवाज़ा बाहर से बंद था! महिला कर्मचारी ने अब फुसफुसाते हुए कहा कि प्रेमी जोड़ा अंदर बंद हैं!

यह बड़ी हास्यास्पद स्थिति थी! पूर्णेन्दु ने सीधे कुंडी खोलने का निर्णय लिया। दरवाज़ा खुलते ही दोनों बाहर निकल आए, स्वाभाविक ही, पूरे वस्त्रों में, क्योंकि उन्हें सोचने का समय मिल गया था कि कुछ न कुछ गड़बड़ है! पूर्णेन्दु के यह पूछने पर कि वे लोग भीतर क्या कर रहे थे, उन्होंने जवाब दिया, 'बस सिर्फ गपशप कर रहे थे!'

हमें बाद में पता चला कि वास्तव में रसोइया भी शादीशुदा था और यह बात पहले उसने हमसे छिपाई थी। हमने अविश्वास के साथ एक-दूसरे की ओर देखा और फिर हँसे बिना न रह सके। स्वाभाविक ही, आश्रम का अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से हमने उन दोनों को बाहर का रास्ता दिखाया। बाकी के कर्मचारी खुश थे- जैसे उन्हें लाइव टीवी सीरियल में अभिनय करने का मौका मिल गया हो!

लेकिन फिर हमें आश्चर्य भी हुआ कि दो शादीशुदा लोगों को किसी बाहरी व्यक्ति के साथ सेक्स संबंध बनाने की इतनी तीव्र लालसा हो सकती है! यह इशारा था कि उनके विवाह के साथ कोई न कोई परेशानी अवश्य है-और यह भी कि उनका विवाह बस 'किसी से भी' करवा दिया गया है। फिर क्या यह बहुत स्वाभाविक नहीं था कि वे किसी 'और' के प्रति आकृष्ट हो जाते?

अंत में यही कहना चाहता हूँ कि इस तरह का धोखा तभी प्रमाणित होता है जब आप किसी को रंगे हाथ पकड़ते हैं। और यह एक बहुत कठिन प्रश्न है: क्या दोनों का बाथरूम में बंद होना रंगे हाथ पकड़ा जाना माना जाए? या वे बातचीत करने के लिए किसी शांत जगह की खोज में वहाँ पहुँच गए थे? 🙂