‘मृत्यु के पश्चात जीवन’ (लाइफ आफ्टर डैथ) कार्यक्रम की तैयारी – 23 जुलाई 15

आश्रम

आश्रम में इस सप्ताहांत आयोजित हो रहे एक कार्यक्रम की तैयारियों में हम बुरी तरह व्यस्त हैं। हमने लोगों को हमारे यहाँ आने और देह-दानदाता के रूप में जुड़ने के लिए आमंत्रित किया है। वे इस बात से राज़ी होंगे कि उनकी मृत्यु के बाद किसी अस्पताल को उनका शरीर दान कर दिया जाएगा, जिससे चिकित्सा के क्षेत्र में प्रगति हेतु उनका उपयोग उपयोग किया जा सके!

सभी धर्मों में मृत्यु पश्चात जीवन संबंधी अपने-अपने तरह-तरह के धार्मिक कर्मकांड और रीति रिवाज होते हैं, जिन्हें पूरा किया जाना ज़रूरी माना जाता है। कुछ धर्म मृत शरीर को जलाते हैं, और कुछ दफनाते हैं। यह सब आत्मा की शांति के लिए, उसे स्वर्ग या जन्नत पहुँचाने के लिए या इसी प्रकार के विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किया जाता है। परंतु उस इन्सान के शरीर के साथ क्या किया जाए, जो इन ‘लाभों’ में या ‘आत्मा की शांति’ वगैरह में कोई रुचि नहीं रखता, क्योंकि इन सब बातों पर उसका कभी विश्वास ही नहीं रहा?

मुझे लगता है, इन सब कर्मकांडों के मुक़ाबले अपने शरीर को चिकित्सकीय प्रयोगों के लिए दान कर देना कहीं बेहतर विकल्प होगा। यदि आपके मृत शरीर का कोई अंग किसी दूसरे व्यक्ति का जीवन बचाने में काम आ जाए, तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है? इसलिए नहीं कि ऐसा करने पर आप आगे भी जीवित रहेंगे, बल्कि इसलिए कि मरने के बाद भी आप किसी के काम आए, आपने किसी का जीवन बचाने में मदद की! अगर आप वृद्ध हैं और आपके अंगों का उपयोग किसी दूसरे व्यक्ति के बीमार अंग के स्थान पर प्रत्यारोपित नहीं किया जा सकता तो भी आपका मृत शरीर चिकित्सा के क्षेत्र में प्रयोगों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है! न जाने कितने छात्र हैं, जिन्हें शरीर की और उसके विभिन्न अंगों में हो सकने वाली बीमारियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है, जिससे आगे चलकर वे उनका उपचार कर सकें, और यह काम वे आपके शरीर पर प्रयोग करके सीख सकते हैं!

काफी समय पहले मेरे पिताजी ने मुझसे यह पता लगाने के लिए कहा था कि कहाँ और किस प्रकार मृत्यु के बाद वे अपना शरीर दान कर सकते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मेरे पिताजी वास्तव में बड़े खुले विचार रखते हैं और इस विचार की वे पहले से ही बहुत सराहना किया करते रहे हैं!

आखिरकार, इस सप्ताहांत, वे एक फार्म भरेंगे और इस बात को साबित करेंगे। मेरे कुछ नास्तिक मित्र हैं, जिनसे मेरा परिचय सोशल नेटवर्क साइटों पर हुआ है और शुक्रवार और शनिवार को हम सब मिलकर एक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। हम लोग और भी बहुत से नास्तिक व्यक्तियों से मिलेंगे- क्योंकि सामान्यतया धार्मिक व्यक्ति इसमें रुचि नहीं लेंगे- और उन्हें भी इस विचार से परिचित करेंगे, उनके साथ बात करके, मिल-जुलकर एक-दूसरे को जानेंगे-समझेंगे, कुछ नए मित्र बनाएँगे और इस तरह बहुत से बीमार और घायल व्यक्तियों की मदद करने के अलावा विज्ञान की उन्नति की दिशा में अपना हर संभव योगदान देने का प्रयास करेंगे!

हमें नहीं पता कि आखिरकार कितने लोग आएँगे। साठ से अधिक लोगों से हमें उनके आने की पुष्टि प्राप्त हो चुकी है- लेकिन आप जानते हैं, भारत में क्या होता है- हो सकता है, ज़्यादा लोग आ जाएँ! इसलिए हम भोजन और रहने की व्यवस्था के मामले में आश्रम को अच्छी तरह तैयार करने में लगे हुए हैं और निश्चित ही बहुत पूरे उत्साह के साथ लोगों के आने का और इस कार्यक्रम के शुभारंभ का इंतज़ार कर रहे हैं!

मैं इस कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट रविवार को प्रस्तुत करूँगा!

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