अपरा का स्तनपान छुड़ाने का हमारा अनुभव – 28 अगस्त 2014

अपरा

स्तनपान कराने और स्तनपान छुड़ाने के सम्बन्ध में भारत और जर्मनी के लोगों की सामान्य परम्पराओं और आदतों के बारे में बताने के बाद आज मैं आपको बताना चाहता हूँ कि हमने अभी पिछले हफ्ते अपरा का स्तनपान कैसे छुड़ाया-और यह भी कि वह किस तरह हमारी अपेक्षा से बहुत आसान रहा।

हमने शुरू में ही तय किया था कि रमोना लम्बे समय तक अपरा को स्तनपान कराएगी। लेकिन 'लम्बे समय तक' शब्द-समूह बहुत सापेक्ष और तुलनात्मक है तथा सिर्फ विभिन्न संस्कृतियों और देशों के लिए इसका अर्थ भिन्न नहीं होता बल्कि हर व्यक्ति के लिए भी होता है।

रमोना और मैं इन विषयों पर खुलकर, बिना किसी लाग-लपेट के बात करते हैं और अपरा के जन्म के समय हमने निर्णय किया था कि अभी हम खुद पर किसी बात का बंधन नहीं लगाएँगे। हम चाहते थे कि अपरा को स्तनपान के पूरे लाभ मिलते रहें और इसलिए वह लम्बे समय तक अपनी माँ का दूध पीती रही!

जब हमने देखा कि उसके शारीरिक विकास के लिए अधिक ठोस आहार की दरकार है तो हमने दिन के समय उसका दूध कम करके दोपहर को सोने से पहले सिर्फ एक बार स्तनपान कराना शुरू कर दिया। इसमें कोई दिक्कत पेश नहीं आई। जब वह स्तनपान करना चाहती हम बहला-फुसलाकर उसका ध्यान दूसरी ओर मोड़ देते और खेल-खेल में कोई दूसरी ठोस खाने की चीजें खिला देते, जिससे उसका पेट भरा रहता और भूख के कारण उसे स्तनपान करने की इच्छा न होती। पेट भरा होने के बावजूद अगर वह माँ का दूध पीना चाहती तो हम उसे बताते कि 'अब तुम्हें सिर्फ बिस्तर पर रात को दूध मिलेगा, जिससे तुम्हें नींद आ जाए'। छोटे बच्चे तर्क और एक विशेष नमूना या पैटर्न पसंद करते हैं, जिसका वे पालन करें तो जब उसे लगा कि दूध पीना रात की नींद से सम्बंधित है, उसने तदनुसार अपने मस्तिष्क को अनुकूल कर लिया।

यह दोपहर का स्तनपान इस साल जर्मनी की यात्रा से ठीक पहले छुड़ा दिया गया था जब अपरा उस समय भी दो साल से कुछ बड़ी ही थी। दोपहर को जब वह कुछ थकी-थकी सी दिखाई देती तो रमोना की जगह मैं या पूर्णेंदु उसे गोद में ले लेते और कहानियाँ सुनाते या गोद में लेकर थोड़ा घुमाते तो वह सो जाती। पहले वह थोड़ा नाराज़ होती थी क्योंकि निश्चित दिनचर्या (पैटर्न) में परिवर्तन हो रहा था। थोड़े और प्रयास की ज़रुरत थी, थोड़ी रचनात्मकता की और सबसे अधिक-दृढ़ निश्चय की, जिसे हमने नहीं छोड़ा! अब नई दिनचर्या यह थी कि जब अँधेरा होने लगे तभी उसे दूध मिलेगा और फिर हम सब सो जाएँगे।

यूरोप में रहते हुए हम इसी दिनचर्या पर चलते रहे-लेकिन शुरू में कुछ दिन अपरा कुछ भ्रम की हालत में रही क्योंकि वहाँ देर रात तक अँधेरा नहीं होता था! लेकिन कुछ दिनों बाद वह अपने सोने के समय की आदी हो गई हालाँकि, पता नहीं कैसे, वह रात में अक्सर उठकर बैठ जाती और दूध पीते हुए ही सोती और कभी-कभी रात-रात भर। आखिर जर्मनी से वापस लौटते समय तक हमने इस विषय पर पूर्ण विराम लगाने का निश्चय कर लिया।

वह खुद इसे छोड़ देगी इसके कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे थे जैसा कि हमने इस उम्र के बहुत से दूसरे बच्चों के बारे में पढ़ रखा था। तो हमें खुद अपनी तरफ से कुछ प्रयास करने थे। सलाहें और हिकमतें बहुत सी थीं-जैसे स्तनों में कोई कडुवी चीज़ लगा दी जाए, जिससे बच्चा मुँह लगाने में हिचके-लेकिन हम उन अरुचिकर तरीकों को अपनाना नहीं चाहते थे! हम उसे डराना या दुखी करना नहीं चाहते थे।

तो जब हम आश्रम आकर कुछ समय बाद सुस्थिर हो गए तो हमने उससे कहा कि अब वह काफी बड़ी हो गई है और देखो कोई दूसरा बड़ा बच्चा माँ का दूध पीता है क्या? उसे भी अब दूसरे बड़े बच्चों की तरह गिलास से दूध पीना चाहिए। हमने यह भी जोड़ दिया कि जब इतना बड़ा बच्चा माँ का दूध पीता है तो माँ को दुखता है।

पहले दिन हमने उसे कुछ देर जगाकर रखा और बहलाते रहे। जब वह बहुत थक गई तो आधे घंटे तक वह चीख-चीखकर रोती रही लेकिन उसका काम नहीं बना। आखिर वह थक-हारकर सो गई। जब वह रात में फिर उठी तो बुरी तरह बिफरी हुई थी कि उसे स्तनपान क्यों नहीं कराया जा रहा है। वास्तव में वह रमोना और मुझ पर बेहद नाराज़ थी तो लगभग बीस मिनट बाद हमने उसे बाहर ले जाकर घुमाने का निश्चय किया। बाहर निकलकर हम उसके चाचा पूर्णेंदु के कमरे में गए-और उसके साथ वह फिर हँसने-खेलने लगी! कुछ कहानियों और उसकी गोद में आश्रम परिसर में एकाध चक्कर लगाने के बाद वह फिर सो गई।

और कुल मिलाकर इतनी सी बात थी। दूसरे दिन सारा दिन हमने उसे जगाकर रखा। शाम को वह थक गई और सिर्फ दो बार स्तनपान कराने की मनुहार की मगर चीखी-चिल्लाई या रोई नहीं। रमोना और मैं सोने से पहले उसके साथ किताबें पढ़ते रहे या कुछ खेल खेलते रहे-और वह शान्ति के साथ सो गई। सबसे अच्छी बात यह कि अब वह पूरी रात मज़े में, बिना किसी परेशानी के सोती रहती है, रात में उठती भी नहीं है।

यानी दूध छुड़ाने का हमारे लिए यह सबसे उचित समय था। स्वाभाविक ही, अपरा के लिए भी!

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