अस्पताल में अपरा ने बहुत मज़े किए – 29 अप्रैल 2014

अपरा

कल मैंने आपको बताया था कि अस्पताल में हमें कोई परेशानी नहीं हुई और हमने वहाँ बहुत सुखद समय व्यतीत किया। और यह बताते हुए मैं अपरा को भी शामिल कर रहा हूँ। बल्कि यह समय उसके लिए किसी अवकाश से कम नहीं था, जिसमें रोमांच और मौज-मस्ती थी और जिसमें उसे बहुत सी नई चीजें देखने को मिलीं।

और यह कहकर कि उसने यहाँ बिताए समय का बहुत आनंद उठाया, मैं कोई अतिशयोक्ति नहीं कर रहा हूँ! पहले ही दिन जब उसने अस्पताल के अहाते में स्थापित एक शेर का शिल्प देखा तभी से उसकी मस्ती की शुरुआत हो गई थी। नीली धारियों वाला, लाल रंग में पुता वह शिल्प शानदार कलाकृति है और उस दिन से जब भी वह अहाते से गुज़रती, उसके पास जाकर उससे बात करती, उसे अपना खाना खिलाने की कोशिश करती, थोड़ा दुलराती और एक दो बार तो उसे चूम ही लिया।

वह अक्सर उधर से गुजरती तो कुछ न कुछ खाने का सामान ज़रूर लेकर आती क्योंकि अहाते से लगा हुआ अल्पाहारगृह भी है। वहाँ खाने की बहुत ज्यादा चीजें तो नहीं मिलतीं लेकिन वहाँ स्वीट कॉर्न अवश्य मिलते हैं, जो अपरा की पसंदीदा खाने की चीज़ है! मुझे लगता है दो दिन में उसने नमक-मक्खन वाले कम से कम छह कप कोर्न ज़रूर खाए होंगे! वह आइसक्रीम न खाए ऐसा हो ही नहीं सकता था तो वह भी खाया और अपना पसंदीदा संतरे का रस भी लिया, जिसे मैं भी पसंद करता हूँ।

अगर आप सोच रहे हैं कि पूर्णेंदु और रमोना को, जो अस्पताल में पूरे समय मेरे साथ रहे, सारा दिन उसका दिल बहलाने के लिए उसके पीछे चक्कर लगाना पड़ता होगा, तो आप गलत सोच रहे हैं। सच तो यह है कि अधिकतर समय वह मेरे कमरे में ही व्यतीत करती थी। वह अच्छा, बड़ा सा कमरा था, जिसमें एक छोटा सा मरीज़ का बिस्तर था और मरीज़ के साथ आए परिचारक व्यक्ति के लिए। इसके अलावा एक डेस्क और सामान रखने के लिए छोटी सी आलमारी। इस तरह अपरा के लिए खेलने-कूदने और नाचने-गाने के लिए पर्याप्त जगह वहां उपलब्ध थी! वह वहां चित्रकारी करती रही, रमोना के साथ बैठकर कोई किताब पढ़ती रही, पूर्णेंदु से कहानियाँ सुनती रही, अपनी गुड़िया और मेमने वाले खिलौने के साथ खेलती रही और डॉक्टरों और नर्सों को आश्चर्य-विस्फारित नेत्रों से देखती रही कि आखिर ये लोग बार-बार यहाँ आकर मेरे पा के साथ क्या करते रहते हैं।

निश्चित ही हम उसे बता चुके थे कि हम अस्पताल क्यों आए हैं और वहाँ क्या चल रहा है। दवाई सीधे मेरी नसों में पहुंचाने के लिए जब नर्स ने केनुला मेरे हाथ पर रखा वह विस्मय से फटी आँखों से उसे देखती रही। हमारी आपसी बातचीत को वह बड़े गौर से सुनती कि किस तरह डॉक्टर ने मेरे घुटने की शल्यक्रिया की और तब से वह दिन भर यही खेल खेलती रहती है: वह डॉक्टर और उसकी गुड़िया मरीज!

अभी उसकी इतनी उम्र नहीं हुई है कि वह अस्पताल का नाम सुनते ही घबरा उठे, न अस्पताल के माहौल का ही उस पर कोई असर हो सकता था। उसे तो इतना भर मालूम था कि उसे परिवार सहित इस शानदार अस्पताल में एक दिन बिताना है! सोफा को दूसरे बिस्तर के पास खिसका दिया गया और वह रमोना के साथ मेरे कमरे में ही सोई। मैं और रमोना तो सारी रात जागते रहे मगर वह अपनी बालसुलभ नींद में डूब गई।

घर जाने की उसने एक बार भी ज़िद नहीं की। एक बार भी वह चिड़चिड़ाई नहीं कि पता नहीं, किस अंजानी जगह आ गए हैं। उसे हर बात में मज़ा आ रहा था, हर बात में वह रस ले रही थी और यह बात मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण थी कि वहाँ वह भी मेरे साथ थी। उसे अपने बिस्तर के इतना पास कूल्हे मटकाकर नाचता-गाता देखकर आपको अपने दर्द का एहसास ही नहीं होगा। जब वह आपको प्यार से चूम लेगी, गालों पर थपथपाएगी और पूछेगी कि डॉक्टर ने आपका पैर ठीक कर दिया न, तो आप भावुक हुए बगैर कैसे रह सकते हैं?

अपरा बिटिया, सालों बाद जब तुम इसे पढ़ोगी, तब जानोगी कि मैं क्यों इतना जल्दी अच्छा हो गया था। क्योंकि मैं जल्द से जल्द तुम्हारे साथ नाचना-गाना चाहता था, तुम्हारे साथ दौड़ना-भागना चाहता था, तुम्हारे साथ रोज़ की तरह आश्रम के गेट तक घूमने जाना चाहता था और तुम्हें अपने शरीर पर धमा-चौकड़ी मचाता देखना चाहता था!

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