अम्माजी के देहांत के एक साल बाद अपरा उनके बारे में किस तरह सोचती है? 9 दिसंबर 2013

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आज हमारी बच्ची अपरा 23 माह की हो गई। आज हम एक साल पहले के इसी दिन को याद करते हैं, जब अपरा 11 माह की थी और हम सबने मेरी माँ, जिन्हें हम सब अम्माजी कहा करते थे, के साथ आखिरी दिन व्यतीत किया था। उस रात, 10 दिसंबर 2012 के दिन तड़के उन्होंने इस संसार से बिदा ली थी।

अम्माजी जी के जाने के बाद हमने नोटिस किया कि अपरा उनके कमरे में जाकर उनके साथ खेलने की ज़िद करती थी। उस समय वह ठीक तरह से बोल भी नहीं पाती थी लेकिन 'अम्मा' शब्द उसके मुंह से स्पष्ट निकलता था। वह पूछती, अम्माजी कहाँ है?-और हम उसे बताते थे कि वह दूर, बहुत दूर चली गई है।

हम चाहते थे कि वह याद करे और हमने उसे अम्माजी के बारे में बताया। जब हम अपरा के पुराने चित्र देखते हैं तो, स्वाभाविक ही, अम्माजी अक्सर उनमें नज़र आती हैं और उन सभी चित्रों को अपरा ने देखा हुआ है। बब्बाजी के कमरे में अम्माजी और अपरा का एक बहुत बड़ा सा चित्र है और जब भी अपरा उसे देखती है तो पूछती है, "अम्माजी कहाँ है?" और खुद ही उसका जवाब भी देती है: "दूर, बहुत दूर।"

अपरा भोजन में बुकुनू (एक जड़ीबूटियों वाला नमक) पसंद करती है और जब बब्बाजी पूछते हैं कि यह किसने बनाया तो कहती है: 'अम्माजी'।

अम्माजी ने बहुत से ऊनी कपड़े बुनकर रखे हैं, जिनमें एक बड़ा सा पीला शाल भी है। अपरा को हम रोज़ सबेरे यही शाल उढ़ा देते हैं। मैंने उसे बताया है कि यह शाल किसने बनाया है और वह कभी कभी अपने आप से पूछती है, "यह शाल किसने बनाया?" और खुद ही जवाब दे लेती है: 'अम्माजी ने!'

और जब हम उन पुराने चित्रों को देख रहे होते हैं, अपरा कभी-कभी कह उठती है, "अम्माजी अपरा को बहुत प्यार करती थी!"

हाँ, करती थीं। हम चाहते थे कि वह अपनी दादी को और उनके प्रेम को याद रखे। हम उसके बारे में उसे बताते रहते हैं, उसे बीच-बीच में याद दिलाते रहते हैं और हालांकि वह उनकी मृत्यु के समय सिर्फ ग्यारह माह की थी फिर भी वह उनके प्रेम को अब भी याद करती है, प्रेम, जो उसके जीवन का हिस्सा बन चुका है और हमेशा उसके साथ रहेगा।

अम्माजी इस प्रेम के जरिये सदा हमारी बच्ची के साथ रहेंगी।