ग्रान कनारिया पहुँचने के बाद – 10 जून 2014

ग्रान कनारिया में आज हमारा पहला दिन था और सारा दिन यात्रा करके हम अब बहुत थक गए हैं। फिर भी मैं अपनी यात्रा के बारे में और आज यहाँ दिन भर हमने क्या किया, इस विषय में आपको बताने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ!

हमने सबेरे का सारा वक़्त यात्रा की तैयारियों में, रास्ते के लिए खाने-पीने का सामान तैयार करने में और सामान बांधने में खर्च किया। फिर हमने थॉमस और आइरिस के साथ बढ़िया जर्मन नाश्ता किया और आखिर में वीज़्बाडेन से ट्रेन पकड़कर निकल पड़े। कोबलेंज नामक स्टेशन पर जब गाड़ी रुकी, अपरा और रमोना ने आइसक्रीम खाई, या कह सकते हैं कि अपरा ने दो आइसक्रीम खाईं क्योंकि जैसे ही उसने अपना आइसक्रीम चखा उसे रमोना का आइसक्रीम भी खाना था! तो हम तीनों ने उन्हें साझा किया और इन्हीं आपसी चुहलबाज़ियों में समय का पता ही नहीं चला और अगला स्टेशन भी आ गया। थोड़ी देर बाद ही अपरा सो गई।

फिर विमान-तल पर ही उसकी नींद खुली और आँख खुलते ही वह उल्लसित हो उठी। अपनी जर्मनी यात्रा के अनुभव के बाद वह अच्छी तरह जान चुकी थी कि आखिर विमान यात्रा कैसी होती है। तुरंत उसने कहा: आज हम छोटा विमान लेंगे! जिस विमान से हम जर्मनी आए थे उससे यह विमान छोटा होना ही था और इस तरह वह संतुष्ट हो गई और तुरंत बताना शुरू कर दिया कि विमान आसमान में कैसे उड़ान भरता है!

उड़ान सुखद और सुविधाजनक रही- मुफ्त वाई-फ़ाई, रात के खाने में स्वादिष्ट पराठे और सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य! अपरा कुछ देर सोई लेकिन जब हम गंतव्य तक पहुंचे वह चैतन्य थी: "हम आ गए! हम बेट्टी के साथ रहेंगे!" कहते हुए वह हमारा उत्साह बढ़ाने लगी। लाल कार और उसकी लाल सीटें देखकर तो उसका उल्लास द्विगुणित हो गया क्योंकि लाल उसका पसंदीदा रंग है! सब कुछ बहुत शानदार था और लस पाल्मास डे ग्रान कनारिया में अपने फ्लैट में हमारी पहली रात बहुत सुखद रही।

सबेरे उठते ही अपरा समुद्र किनारे चलने की ज़िद करने लगी इसलिए रमोना उसके साथ बीच की तरफ निकल गई। वह कुछ ज़्यादा ही उत्तेजित थी और फुटपाथ पर दौड़ते हुए वह गिर पड़ी और होठों पर चोट लगा बैठी। लेकिन उसका उत्साह ठंडा नहीं पड़ा और जब बेट्टी हमारे फ्लैट पर आई तो हम लोग कुछ ख़रीदारी करने और घूमने-फिरने बाज़ार की तरफ निकल गए।

मुझे कहना चाहिए, द्वीप पर जीवन बहुत अलग तरह का होता है। हर तरफ पहाड़ियाँ होती हैं और हमेशा आप या तो ऊपर चढ़ रहे होते हैं या नीचे उतर रहे होते हैं। हर जगह समुद्र करीब ही मालूम होता है और जब भी आप उसके कुछ ज्यादा करीब होते हैं, समुद्र की ताज़ा नमकीन हवाएँ थपेड़े मारना शुरू कर देती हैं। और यहाँ के लोग दो से चार बजे के बीच दोपहर का भोजन करते हैं! मेरे लिए चार बजे लिए जाने वाले भोजन को दोपहर का भोजन (लंच) कहना मुश्किल ही है! लेकिन यहाँ का चलन ही यह है- और लोग इससे नाखुश नहीं दिखाई देते! इसके विपरीत, वे उसी तरह से ढल गए हैं। जब हम दोपहर को तीन बजे कस्बे में घूम रहे थे तब इस बात का हमें एहसास हुआ: हर कोई भोजन कर रहा था और दुकाने बंद थीं।

हालांकि हमने भी आज यहाँ बहुत लुत्फ उठाया मगर अपरा ने जो मस्ती की उसका कोई मुक़ाबला नहीं! माल में वह एक नीली गाड़ी लेकर चलाती रही और विभिन्न प्रकार के स्पाइडरमैन की कार या घोड़ों जैसे मशीनी खिलौनों पर सवारी करके उसके मज़े लेती रही। स्पाइडरमैन के बारे में वह अभी जानती नहीं है और उसकी कार के पास स्पाइडरमैन को खड़ा देखकर वह अचरज से देखती रही कि यह गंजा क्यों हैं!

इस तरह आज का हमारा दिन बड़ा शानदार रहा और हम उत्सुकता से अपने अगले तीन दिनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि देखें वे क्या गुल खिलाते हैं!

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