आश्रम आए हुए जर्मन परिवार और मित्रों के साथ अपरा की मौज-मस्ती – 30 अक्टूबर 2014

अपरा

आजकल अपरा की ख़ुशी सातवें आसमान पर है! कम्प्यूटर पर काम करते हुए भी मेरी नज़र बाहर ही लगी रहती है, जहाँ आश्रम के बाहरी हाल में खुशी के मारे अपरा का नाचना-गाना चल रहा है, जिसे देखकर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है और आज मैंने यही तय किया है कि अपरा के उल्लास को आपके साथ भी साझा करूँ!

सबसे पहले यशेंदु की गर्ल-फ्रेंड, इफा यहाँ आई। अपरा पहले से ही उसकी अच्छी दोस्त है लिहाजा जब उसका आने का वक़्त नज़दीक आया तो वह बहुत उत्साहित हो उठी। इतना कि यशेंदु के साथ उसे लेने विमान-तल जाने के लिए तैयार बैठी थी और चली भी जाती, अगर उसका विमान देर रात आने वाला न होता! लेकिन वह कहाँ मानने वाली थी, बाकायदा जाने के लिए तैयार हुई मगर इंतज़ार करते-करते थककर उन्हीं कपड़ों में सो गई। सबेरे उठते ही उसने पूछा कि वह इफा को ले आई या नहीं- और हमने कहा कि हाँ, तुम उसे ले आई हो मगर पूरे समय कार में सोती रही हो! यह एक छोटा सा वाक्य उसे खुश करने के लिए काफी था!

फिर जल्द ही दीवाली आ गई और वह फिर उत्साह से भर उठी! हर तरफ प्रकाश, आश्रम में ही तैयार मिठाइयाँ- और फिर अंत में उसे खुद अपने हाथों से तेल के दीपक जलाने का मौका भी मिला और उसने एक जलती मोमबत्ती लेकर बहुत से दिए प्रज्वलित किए! अद्भुत!

कुछ दिन बाद उसके नाना-नानी तशरीफ लाने वाले थे और उसने फिर ज़ोर देकर कहा कि वह उन्हें भी लेने विमान-तल चलेगी और सपने में उन्हें लेकर आई भी! फिर यह अद्भुत कहानी सुनाती रही कि विमान-तल पर कैसे वह एक-एक कर सबसे मिली और सामान उठाने में मदद भी की!

क्योंकि अब नाना, नानी और दो-दो इफा यहाँ मौजूद हैं तो लगातार उसकी पार्टियाँ चालू हैं! सभी उसके लिए कोई न कोई उपहार लेकर आए हैं, जिन्हें अब वह खोल-खोलकर देख रही है और खा-पीकर खूब मस्त है! लेकिन सबके साथ और सबके बीच रहना उसे बहुत पसंद है! आश्रम के कर्मचारी, उसकी आंटियां, चाचा और भाई-बहन, सब हँस रहे हैं और उसकी इन हरकतों का मज़ा ले रहे हैं: जबसे ये जर्मन रिश्तेदार आए हैं, वह हर पल उन्हीं के साथ रहती है और पहले जिनके साथ आम तौर सारा समय बिताती थी, जिनके साथ दिन भर खेलती-कूदती, मौज-मस्ती करती थी, उनसे बात तक करने का उसके पास समय नहीं है- वह अभी बहुत व्यस्त है!

कल उसने मुझसे एक प्रश्न किया, जिससे मुझे पता चला कि उसके मन में क्या चल रहा है: ‘थॉमस और आइरिस कब आएँगे?’ अब जबकि इतने सारे जर्मन मित्र यहाँ मौजूद हैं तो फिर कुछ लोग क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं! हमने उसे बताया कि मायकल और आंद्रिया जल्द ही आएँगे- और अब वह यह भी जान गई है कि थॉमस और आइरिस होली के बाद आने का कार्यक्रम बना रहे हैं!

उसके उत्साह और उसकी खुशी का बयान शब्दों में नहीं किया जा सकता। वैसे भी यह समय कुछ विशेष तो है ही, जब यहाँ बहुत सारी गतिविधियाँ जारी हैं, दर्शनीय स्थानों पर घूमने के कार्यक्रम बन रहे हैं और बहुत सारी मिठाइयाँ, इस बार कुछ ज़्यादा ही, उपलब्ध हैं- वैसे तो सामान्य समय में भी वह जब घर पर होती है, तब भी हर वक़्त उसका नाचना-गाना, उछल-कूद और धींगा-मस्ती चलते ही रहते हैं। इस समय वह बहुत ही अच्छे मूड में है!

आप किसी भी मूड में हों, उसके साथ आपको खुश रहना ही होगा, और कोई चारा नहीं है! 🙂

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