तीन माह यूरोप रहकर आने के बाद आश्रम में अपरा का पहला दिन – 14 अगस्त 2014

कल मैंने आपको संक्षेप में बताया ही था कि अपरा की विदेश से वापसी कैसी रही! सच तो यह है कि वह इतनी खुश थी कि दिन भर मैं उसे मुश्किल से एकाध बार ही देख पाया! यह देखना वाकई अद्भुत था!

उसके दिन की शुरुआत भारतीय नाश्ते से हुई: आश्रम की रसोई में तैयार पराठों से! उसे यह भारतीय रोटी बहुत भाती है इसलिए अपने यूरोप दौरे में भी हम अक्सर पराठे बनाते थे। नाश्ता करते हुए वह हमारे कर्मचारियों से अपने परिचय को पुनर्जीवित करती रही। 'आंटियाँ', जो उससे बहुत प्यार करती थीं मगर जिनके साथ आश्रम वापस आने के बाद कुछ देर तक अपरा थोड़ा शर्माती रही।

लेकिन जैसे ही स्कूल के बच्चे दोपहर का भोजन करने पहुँचे, उसकी सारी शर्म रफूचक्कर हो गई! उसने भी अपनी प्लेट उठाई और स्वाभाविक ही, उनके जैसा महसूस करते हुए उनके साथ जाकर बैठ गई। और जब स्कूल की छुट्टी हो गई, आश्रम के बच्चों को वापस पाकर वह रोमांचित हो उठी!

उसके बाद सारा दिन, गर्मी और उमस के बावजूद, जिसके कारण सभी पसीना-पसीना हो रहे थे, वह उन बच्चों के साथ खेलती रही। जर्मनी में हमने एक साइकिल खरीदी थी, जिसमें पैडल नहीं हैं और जिसकी सहायता से बच्चे पैर और पंजों के सहारे संतुलन का अभ्यास कर सकते हैं। हमने उसे आज ही खोला था और हमारी बेटी उसे सारे बच्चों को दिखा-दिखाकर बहुत रोमांचित हो रही थी। तो उसके बाद लगभग एक घंटे तक छोटे-छोटे बच्चे उस पर और एक दूसरी खिलौना-कार पर सारे आश्रम में इधर से उधर धमाचौकड़ी मचाते दिखाई देते रहे।

इसी बीच अपरा का नहाना-धोना भी संपन्न हुआ । हमने एक टब में, जिसे हम छोटे से पूल की तरह उसके लिए इस्तेमाल करते हैं, पानी भरकर प्रवेश-हाल के बीचों-बीच रख दिया! यह उसकी नहाने की पसंदीदा जगह है! कुनकुने पानी में थोड़े से साबुन के झाग के साथ सबकी आँखों का आकर्षण बनी हमारी बेटी को जैसे जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी मिल गई थी-हर तरफ पानी उछालती, ज़्यादा पास आने वालों को पानी में सराबोर करती।

हालाँकि वह इतने सारे थकाने वाले कामों में लगातार सक्रिय रही लेकिन दिन में उसे झपकी तक नही आई। दोपहर की नींद वह सीधे गोल कर गई और खेलना नहीं छोड़ा। लेकिन हम देख रहे थे कि वह थक रही है! जब उन्हें देखने के लिए रमोना आकर सोफे पर बैठ गई तो अपरा उसके पास आई और उसकी गोद में चढ़कर बैठ गई और पल भर के लिए लगा कि अब थकान के आगे वह बेबस हो रही है-मगर फिर उसने ताक़त बटोरी, अपने आपको खींचकर रमोना की गोद से अलग किया, भागकर प्रांशु के पास गई और उसका हाथ पकड़कर बोली, 'चलो, कुछ खेलते हैं!'

शाम को, जब हम भोजन की तैयारी कर रहे थे, वह पूरी तरह थककर चूर हो चुकी थी। तब वह मोहित की गोद में थी और किसी कदर आँखें खोल ही नहीं पा रही थी! जैसे ही रमोना ने उसे अपनी गोद में लिया, वह नींद की गोद में समा गई।

और इस तरह उसके दिन का समापन हुआ, जिसे, हम जानते हैं, उसने सम्पूर्ण आनंद में जिया था। घर में होने से अधिक सुखद और क्या हो सकता है? अपनी नन्ही बच्ची को घर में होने के परम आनंद में सराबोर देखना!

Related posts

अपरा जर्मनी में अपने जीवन की प्रथम बर्फ़बारी का भरपूर आनंद ले रही है - 23 नवंबर 2015

अपरा जर्मनी में अपने जीवन की प्रथम बर्फ़बारी का भरपूर आनंद ले रही है – 23 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि जर्मनी में बर्फ़बारी हुई तो अपरा ने किस तरह उसका भरपूर आनंद लिया क्योंकि ...
छोटी सी डांसर अपरा ने दिया स्वतः प्रवर्तित नृत्य प्रदर्शन - 9 नवम्बर 2015

छोटी सी डांसर अपरा ने दिया स्वतः प्रवर्तित नृत्य प्रदर्शन – 9 नवम्बर 2015

स्वामी बालेंदु कल वृन्दावन में हुए बच्चों के एक उत्सव, ‘बाल मेला’ के बारे में बता रहे हैं, जिसमें आश्रम ...
जब अपरा ने शेर को नहलाया - 28 सितंबर 2015

जब अपरा ने शेर को नहलाया – 28 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु एक दोपहर का किस्सा बयान कर रहे हैं-उनकी पौने चार साल की बेटी ने सोचा कि आज शेर ...
मृत्यु संबंधी बच्चे के प्रश्न का एक नास्तिक के रूप में क्या जवाब दें - 3 सितंबर 2015

मृत्यु संबंधी बच्चे के प्रश्न का एक नास्तिक के रूप में क्या जवाब दें – 3 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि अपरा मृत्यु के बारे में क्या-क्या जानती है और किस तरह उसकी जानकारी उससे ...
अपनी साढ़े तीन साल की बच्ची, अपरा के बगैर पहली बार माँ और पा - 14 जुलाई 2015

अपनी साढ़े तीन साल की बच्ची, अपरा के बगैर पहली बार माँ और पा – 14 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि जब उनकी बेटी तीन दिन के लिए उन्हें छोड़कर गई तब वे और उनकी ...
अपरा की पहली यात्रा, जिसमें माँ और पा उसके साथ नहीं थे - 13 जुलाई 2015

अपरा की पहली यात्रा, जिसमें माँ और पा उसके साथ नहीं थे – 13 जुलाई 2015

स्वामी बालेन्दु अपनी साढ़े तीन साल की बेटी, अपरा के विषय में बता रहे हैं, जो अपने चाचा और अपनी ...
क्या बच्चे प्यार करने से पैदा होते हैं? तीन साल के बच्चे की विचार प्रक्रिया - 1 अप्रैल 2015

क्या बच्चे प्यार करने से पैदा होते हैं? तीन साल के बच्चे की विचार प्रक्रिया – 1 अप्रैल 2015

स्वामी बालेंदु अपनी बेटी के साथ हुए एक और वार्तालाप का वर्णन कर रहे हैं, जिसमें उसने पूछा: क्या प्यार ...
आखिर यह शुरू कैसे होता है - अपनी 3 साला बच्ची के साथ यौन शिक्षा - 31 मार्च 2015

आखिर यह शुरू कैसे होता है – अपनी 3 साला बच्ची के साथ यौन शिक्षा – 31 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उनकी बच्ची ने अपने जन्म के बारे में पूछा-और उन्होंने क्या उत्तर दिया। ...
3 साल के बच्चे को उसके सवाल का जवाब देना: प्रेम क्या होता है? 30 मार्च 2015

3 साल के बच्चे को उसके सवाल का जवाब देना: प्रेम क्या होता है? 30 मार्च 2015

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि उन्होंने क्या जवाब दिया जब उनकी छोटी सी बच्ची ने उनसे एक बहुत बड़ा ...
हर साल उत्तरोत्तर अधिक मौज-मस्ती - अपरा का होली समारोह - 5 मार्च 2015

हर साल उत्तरोत्तर अधिक मौज-मस्ती – अपरा का होली समारोह – 5 मार्च 2015

स्वामी बालेंदु होली पर अपनी बेटी अपरा की मौज-मस्ती का वर्णन करते हुए बता रहे हैं कि कैसे उसे देखते ...

Leave a Reply