काफी समय हो गया जब मैंने आखिरी बार अपनी प्यारी बच्ची की दिनचर्या के बारे में आपको जानकारी दी थी. वैसे वह अब बच्ची नहीं रह गई है-मानसिक और शारीरिक रूप से वह इतनी तेज़ी के साथ विकसित हो रही है कि हम भी सोच में पड़ जाते हैं कि क्या यह वही गठरी है, जिसे दो साल पहले हम सब हाथों में उठाए फिरते थे.
इन दिनों नृत्य में अपरा की रुचि इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि लगभग सारा दिन वह नाचती ही रहती है. उसके पास एक छोटा सा म्यूज़िक सिस्टम है, जिसे वह एक हाथ में लेकर दूसरे हाथ से भारतीय नृत्य मुद्राएँ बनाकर, घेरे में चक्कर लगाकर, कूल्हे मटकाकर और साथ ही मुंह से गाने के बोल निकालकर इधर-उधर नाचती-गाती रहती है. वह तीन-चार गाने एक साथ बार-बार घंटों सुन सकती है और हमें सिर्फ इतना करना होता है कि उसके म्यूज़िक सिस्टम की बैटरी बीच-बीच में चार्ज करते रहें।
सभी बच्चे नैसर्गिक रूप से नृत्य करके खुश होते हैं और संगीत भी उन्हें पसंद होता है मगर मुझे लगता है अपरा के भीतर दिखाई दे रहा यह अतिरिक्त नृत्य-संगीत प्रेम पिछले कुछ हफ़्तों में घटी सुखद घटनाओं के चलते पैदा हुआ है: एक तो हमारे संगीतज्ञ मित्र, थॉमस रोज़ गिटार निकालकर बच्चों को एक से एक बढ़कर गाने सुनाते थे और दूसरे, हमारी एक और मित्र, एक फेसबुक मित्र, जिन्होंने एक रात बहुत शानदार उपशास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया था. उस चित्ताकर्षक नृत्य को देखने के बाद कई दिनों तक अपरा बार-बार वही गाने बजाने के लिए कहती और उन गानों पर किए जाने वाले नृत्यों को बड़ी ही लगन से ऑनलाइन देखती रहती थी. अब वह उन नृत्य-मुद्राओं को बड़ी मोहकता के साथ प्रस्तुत करने लगी है.
जी हाँ, और कुछ दिन पहले उसने कूदना भी सीख लिया है! बहुत दिनों से वह दोनों पैर एक साथ ज़मीन से उठाकर कूदने कि कोशिश कर रही थी और जब अचानक एक दिन उसने देखा कि पल भर के लिए उसके दोनों पैर एक साथ हवा में तैर रहे हैं तो वह ख़ुशी से झूम उठी: यह उसके लिए बहुत अप्रत्याशित था!
यह सब हमें जानने को मिला, होली समारोह की तैयारियों के दौरान! बच्चों को ही होली की तैयारियों में सबसे अधिक मज़ा आया! जहाँ भी रंग दिखाई देते, बच्चे अपने हाथ सान आते, जहाँ पानी दिखाई देता पानी से खेलने लग जाते और मिनटों में सारे कपड़े गीले कर आते!
लेकिन असली पार्टी वाले दिन सबसे पहले अपरा ने गीली मुलतानी मिट्टी में खेलना शुरू किया। यह मिटटी हमने तैयार की थी, जिसे हम अपने शरीरों पर मलते हैं, जिससे शरीर पर बाद में खेले जाने वाले रंगों का असर न हो. लेकिन कुछ देर बाद उसे मिट्टी गन्दी, कीचड़ जैसी लगने लगी और उसने नहाने की फरमाइश कर डाली और तब नहला-धुलाकर उसकी सारी मिट्टी उतारी गई.
नहा-धोकर वह सुरक्षित दूरी पर एक तरफ बैठ गई और हम लोगों को देखने लगी कि कैसे सब एक दूसरे पर रंग फेंक रहे हैं. सूखी और साफ़ ज़मीन पर वह आनंदविभोर होकर नाचने लगी और जब हम सब होली के हुड़दंग से थककर फुरसत होकर बैठ गए और दूसरी बार मिट्टी तथा बेसन और दही के मिश्रण से बदन साफ़ कर रहे थे, वह रंग में भीगे हुए बगीचे की तरफ निकल गई. वहाँ जाकर वह बैठ गई और रमोना की बाँहों और चेहरे पर मिट्टी मलकर रंगों की सफाई में उसकी मदद करने लगी. फिर अचानक उठी और दही से भरे हांडे में हाथ डालकर हम लोगों पर दही फेंकने लगी. यह उसका अपना होली मनाने का तरीका था!
अब वह अभी से अगली पार्टी की प्रत्याशा में उत्तेजित हो रही है: कल रामोना का जन्मदिन है. स्वाभाविक ही हमने उसे इस बारे में बताया है और इसलिए आजकल वह सिर्फ उस पार्टी के बारे में ही बतियाती रहती है: हम लोग केक काटेंगे, उसको खाएंगे, वह नए कपड़े पहनेगी-उसका सबसे बढ़िया ड्रेस, जो उसे उसके जन्मदिन के रोज़ उपहारस्वरूप मिला था-और हाँ, वह अपने पसंदीदा गानों पर नाचेगी भी!
यह सब कितना शानदार है. काश, हम सब ज़्यादा से ज़्यादा उसके जैसे तरह होते और बच्चों की तरह जीवन जी सकते!
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