ग्रान कनारिया में अपरा खूब मज़े लूट रही है – 26 जून 2014

कल ग्रान कनारिया और टेनेरिफ की यात्राओं के अपने अनुभवों के बारे में आपको बताने के बाद आज मैं सिर्फ अपनी नन्ही अपरा के बारे में और इस यात्रा में उसकी मौज-मस्ती के बारे संक्षेप में लिखना चाहता हूँ!

हम पहले से ही जानते थे कि यह एक चीज़ तो उसे ज़रूर भाएगी: समुद्र-तट (बीच)। मुलायम रेत का इतना बड़ा जखीरा उसे वहीं मिल सकता था और ऊपर से सोने में सुहागा कि पास में ही पानी का इतना विशाल कुंड! तो जैसी की अपेक्षा थी, जैसे ही हम बीच पर पहुंचे, और हम रोज़ ही कोशिश करते थे कि वहाँ जाएँ, वह रेत पर आलथी-पालथी मारकर बैठ गई और खेलना शुरू कर दिया! पहले उसने रेत में एक गड्ढा खोदा और उसमें पैर डालकर बैठ गई और पानी की बोतल को भी साथ रख लिया, जिससे वह ठंडी हो जाए! फिर रेत लेकर उससे खाना पकाने लगी और जब उससे भी मन भर गया तो ख़ुशी के मारे हँसते-खिलखिलाते रेत में लोटने लगी और पैरों, कपड़ों और टॉवेल को रेत में सराबोर कर लिया! जब मैं हाल ही में शल्यक्रिया हुए घुटने के लिए व्यायाम करने लगा तो वह भी मेरे पास आ गई और व्यायाम करना शुरू कर दिया। फिर मेरा टहलने का कोटा पूरा करने के लिए मेरे साथ रेत पर टहलती भी रही।

रमोना के साथ वह पानी में चली गई। हालाँकि स्वाभाविक ही, ऊँची लहरों से थोड़ा डरती भी रही लेकिन जब लहरें कुछ मंद होतीं तो उसके रोमांच से वह सिहर उठती और जैसे कह उठती-इसके बाद ऐसी लहर कब आएगी, जो पानी की ठंडी बौछार से मेरे चेहरे को भिगो दे! और जब लहर आती तो ख़ुशी में उल्लसित होकर चीख उठती!

लेकिन समुद्र से ज़्यादा उसे टेनेरिफ के छोटे से पानी के पूल में मज़ा आया, जहाँ लहरें नहीं थीं और जो उसकी ऊँचाई के लिए पूरी तरह उपयुक्त था। वहाँ दरअसल उसने पानी को दूर तक जाँचा-परखा भी और यहाँ तक कि दूसरे बड़े वाले पूल में मेरे साथ आकर मेरी पीठ पर सवारी करते हुए तैरने का मज़ा भी लिया!

बाहर सूरज की गर्मी में इन सब गतिविधियों के बाद अपरा का रंग थोड़ा साँवला पड़ गया। कुछ ज़्यादा ही। कल हम आपस में तुलना करते हुए मज़ाक कर रहे थे कि उसकी माँ का सबसे उजला रंग थोड़ा फीका पड़ गया है जबकि मेरे और यशेंदु के रंग में भी आप थोडा-बहुत अंतर पाएंगे मगर जब आप अपरा को गौर से देखेंगे तो उसकी बाँहें और पैर हमसे भी ज़्यादा काले पड़ गए हैं!

लेकिन ऐसा नहीं कि सिर्फ बीच पर ही अपरा ने मस्ती की हो! हवाई जहाज़ से उतरते ही, पानी के जहाज़ पर, हमारी मित्र बेट्टी से मिलने से लेकर उसके कुत्ते के साथ खेलते हुए, डांस पार्टियों में भाग लेने से लेकर जू में व्हेल और डोल्फिन शो का बारीकी से मुआयना करने तक अपरा ने सारी गतिविधियों का भरपूर मज़ा लिया!

वह अच्छी तरह जानती है कि आजकल हम लोग ग्रान कनारिया में रह रहे हैं और यह भी कि वह भारत या जर्मनी से अलग है। स्वाभाविक ही उसने यह नोटिस किया है कि यहाँ की भाषा भी अलग है! जबकि शुरू में वह बेट्टी के साथ जर्मन में बात करने का प्रयास करती रही मगर जल्द ही समझ गई कि बेट्टी उसकी बात समझ नहीं पाती है। वह इतनी समझदार है कि उसने कुछ समय बाद ही हमसे कहना शुरू कर दिया 'बेट्टी को उसकी भाषा में बताओ कि मैंने आज नई ड्रेस पहनी है!' या इसी तरह की दूसरी बातें। लेकिन बाद में उसे बेट्टी के साथ अकेले खेलने का मौका मिल गया और फिर उसने कुछ अंग्रेजी के शब्दों को आजमाना शुरू कर दिया और जल्द ही समझने लगी कि बेट्टी क्या कह रही है या क्या पूछ रही है और उसे दोहराने लगी। वैसे भी वह हर वक़्त अंग्रेजी सुनती रहती है इसलिए वह उसके लिए नई भाषा नहीं है।

लेकिन उसने यह तुरंत नोटिस किया कि स्पैनिश इन सबसे अलग है! जब बेट्टी के कुछ दोस्त हमारे साथ खाना खाने आए तो अपरा ने नोटिस किया कि वे लोग जो कुछ भी बोल रहे हैं वह उन सभी भाषाओँ से अलग है, जिनसे वह वाकिफ है-इसलिए उसने कुछ भी बोलना शुरू कर दिया, अलग-अलग भाषाओँ के शब्दों को बेतरतीबी से जोड़कर! संभव है उसने सोचा हो कि दूसरी भाषा में शायद इसी तरह बोला जाता है! हम सब सुनकर बहुत हँसे! वैसे इस बीच वह स्पैनिश भाषा के कुछ शब्द सीख गई है जैसे: ओला, वाले, वेंगा और ग्रासियास- और कल हिंदी और जर्मन मिलाकर मुझसे बोल रही थी: 'अब मैं स्पैनिश भी बोल लेती हूँ!'

हम लोग कितना आनंद ले रहे हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि जब हम अपरा को आनंद मनाते हुए देखते हैं तो हमारी ख़ुशी हज़ार गुना बढ़ जाती है-और इसलिए उसके साथ किसी जगह की यात्रा करना और उसे संसार का दर्शन कराना इतना सुन्दर है!

अपरा के यूरोप दौरे के फोटो यहाँ देखें।

इस यात्रा के अपरा के वीडिओ यहाँ देखें।

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