अपरा जर्मनी में अपने जीवन की प्रथम बर्फ़बारी का भरपूर आनंद ले रही है – 23 नवंबर 2015

कल मैंने आपको बताया था कि हम लोग हैम्बर्ग जाने के लिए तैयार हो चुके थे– और वास्तव में हमने वहाँ बेहद शानदार समय गुज़ारा! कैसे? अपरा ने जीवन में पहली बार बर्फ़बारी देखी और उसके शीतल एहसास का लुत्फ़ उठाया!

जब हम लुनेबर्ग से चलने को हुए तब आकाश से बर्फ के बारीक कतरे गिरना शुरू हो चुके थे हालांकि उन्हें बर्फ कहना भी पर्याप्त नहीं था और क्योंकि मौसम विभाग ने बर्फ़बारी की संभावना की घोषणा नहीं की थी, हमें लग रहा था कि इससे ज़्यादा बर्फ नहीं गिरने वाली है। हमने हॅम्बर्ग के उस इलाके में घूमने का कार्यक्रम तय किया था जहाँ माइकल हमें कुछ बहुत खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य और एल्बी नदी के किनारे-किनारे निकलने वाली सड़क, एबखासी की चहल-पहल के कुछ दृश्य दिखाना चाहता था।

लेकिन हाइवे पर आते ही हमें समझ में आने लगा कि अब उन खूबसूरत दृश्यों को ठीक तरह से देख पाना शायद संभव न हो पाए: जैसे-जैसे हम हाइवे पर बढ़ते गए बर्फ के कतरे बड़े से बड़े और घने होते गए और अंत में जब हम हॅम्बर्ग पहुँचे तो वहाँ हर तरफ सफ़ेद, कपसीली बर्फ की चादर बिछी हुई थी!

लेकिन इस बात पर निराश होकर बैठने की जगह कि हमें अपेक्षित दृश्य देखने को नहीं मिले, हम खुश और उल्लसित ही अधिक हुए और इस बात पर बहुत उत्साहित भी कि अब हमें बाहर की शीतल, सफ़ेद, शफ़्फाक दुनिया देखने को मिलेगी और हम कार से बाहर निकल पड़े! अपरा के लिए तो यह वरदान की तरह था क्योंकि यह उसके जीवन का पहला मौका था जब वह बर्फबारी देख रही थी और जबकि हमने उसे उसके बारे में बताया था और उसके वीडियो भी दिखाए थे, यथार्थ में अपनी आँखों से उसे देखना कुछ दूसरी ही बात थी! उसके लिए यह एक अलग, विस्मयकारी अनुभव था और जब हम कार में थे, वह लगातार खिड़की से देख-देखकर चमत्कृत हो रही थी और जब हम कार से निकलकर बाहर आए तो पहले तो वह काटती हुई ठंडक और नमी के चलते कुछ परेशान हुई-लेकिन जब बर्फ गिरना कुछ कम हुआ तो उसकी खुशी का पारावार नहीं रहा!

हमने एक बवेरियन स्टाइल हट में पहुँचकर विराम लिया। वहाँ रमोना जैसे अपने घर ही पहुँच गई क्योंकि वहाँ बवेरियन संगीत जारी था और बैरे लेदरहोज़न वस्त्रों में नज़र आ रहे थे और खाने को भी खास दक्षिण जर्मनी के खाद्य-पदार्थ उपलब्ध थे। 🙂

जब हम वहाँ से निकले तो हमने एक-दूसरे पर बर्फ के गोलों की बारिश शुरू कर दी-या कम से कम उसकी कोशिश की। अपरा ने बर्फ को हाथ में लेकर महसूस किया, दस्ताने पहनकर और नंगे हाथों पर भी, और उसकी शीतल सनसनी का भरपूर मज़ा लिया लेकिन गोले बनाकर फेंकते हुए वह हिचकिचा रही थी क्योंकि उसे पता था कि वह फेंकेगी तो कोई न कोई उस पर भी फेंकेगा! खैर, अंत में हमें बहुत शानदार दृश्य देखने को मिले और प्राकृतिक सुंदरता भी, क्योंकि सब कुछ सफ़ेद चादर से ढँका हुआ था!

हम बेहद खुश हैं! जब हम इस ट्रिप की बुकिंग कर रहे थे तब भी हमें अंदेशा था कि संभव है बर्फबारी हो, बल्कि हम चाहते थे कि हो, क्योंकि हम अपरा को बर्फबारी का अनुभव भी उपलब्ध कराना चाहते थे। लेकिन जब हम वहाँ पहुँचे, वहाँ का पारा 10 अंश सेन्टीग्रेड, बल्कि उससे कुछ ऊपर ही था और हम सोच रहे थे कि हमें बर्फ देखने के लिए शायद एल्प्स की चढ़ाई करनी होगी! और अब हम उसे यहीं देख चुके हैं, अपरा ने भी उसका भरपूर अनुभव प्राप्त कर लिया है और वह वापस आश्रम पहुँचकर सबको उसके बारे में विस्तार से बता सकेगी!

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