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बालेन्दु के ब्लॉग का यह अध्याय क्रोध के विषय में लिखा गया है. क्रोध भी एक सहज मानवीय भाव है. बालेन्दु यहाँ लिखते हैं कि क्रोध के क्या कारण हो सकते हैं और क्रोध का क्या निवारण हो सकता है.
क्रोध हमेशा ही बुरा नहीं होता बल्कि कभी आवश्यक भी होता है और बालेन्दु यहाँ यह भी लिखते हैं कि बिना किसी को कोई नुक्सान पहुंचाए आप कैसे अपने क्रोध को व्यक्त कर सकते हैं.
क्रोध की समस्या से निजात पाने और उसे काबू में रखने के क्या उपाय हो सकते हैं उसके विषय में यहाँ बालेन्दु के लेख आप पढ़ सकते हैं.

दीर्घ श्वासोच्छ्वास आपको क्रोध से बचाता है – 25 जनवरी 10

क्रोध

स्वामी बालेन्दु उस स्तिथी की चर्चा करते हैं जब आप क्रोध में चीजें उठाकर फेकने और लात घूसा चलाने की इक्षा करते हैं| पढ़िए कैसे गहरी श्वासोच्छ्वास इस प्रकार की इक्षाओं को काबू में किया जाये|

लड़ाके लड़ाई जारी रखना पसंद करते हैं – 5 जुलाई 2009

क्रोध

स्वामी बालेन्दु अलग अलग लोगों के व्यक्तित्व और स्वभाव के विषय में लिखते हैं कि कुछ लोग तो लड़ाके होते हैं जो कि संघर्ष, तर्क और आक्रमण करते हैं परन्तु कुछ उनकी तरह होते हैं जो इस प्रकार की परिस्थितियों से पलायन करते हैं|

हिंसा और दंगा: विध्वंस से आपको क्या प्राप्त होता है? – 1 मई 2009

क्रोध

स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि कैसे कुछ लोगों को तोड़फोड़ और दंगों में मज़ा आता है, लगता है कि जब किसी को चोट लगे या आर्थिक नुकसान हो तो ये लोग आनंदित होते हैं|