आज हम आस्ट्रिया के खूबसूरत गोलिंग नगर में आएं हैं जो पहाड़ों से घिरा है। यहां आते ही एक अखबार की पत्रकार ने मेरा साक्षात्कार लिया। उसने पूछा कि यहां आपके कार्य को कितना स्वीकार किया गया? इसके बारे में लोगों की क्या राय है? मैंने जवाब दिया कि मैं बता नहीं सकता कि लोगों की प्रतिक्रिया जानकर मैं कितना खुश हूँ। लोगों को फायदा हो रहा है और उन्हें सकारात्मक परिणाम दिख रहा है। इसे आसानी से स्वीकार्य बनाने के लिए मैंने मेडिकल डाक्टर के साथ काम किया है।
शुरुआत में उसने भारत के बच्चों और आस्ट्रिया के युवाओं पर मेरे काम के बारे में पूछा। मैंने उसे बताया कि आस्ट्रिया में लोगों की सबसे बड़ी समस्या है सच्चा दोस्त ढ़ूढ़ने की। जिसके साथ वो अपनी बातें और समस्याएं साझा कर सकें। मैंने इस विषय पर अपनी डायरी में पहले भी लिखा था। आस्ट्रिया में हर चीज पाने और लेने के बारे में हैं न कि देने और साझा करने के बोरे में। इसलिए यहां जब कोई समस्या आती है तो लोग ड्रग्स या शराब का रुख करते हैं क्योंकि उन्हें कोई सच्चा दोस्त नहीं मिलता। अगर किशोरों को अपनी बात व्यक्त करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है तो ये अच्छा नहीं है। इसलिए मैं उनके लिए ऐसा स्थान बनाना चाहता हूँ जहां वो जो चाहे बता सके।
आज मुझे एक महिला की दुखद कहानी ईमेल के द्वारा मिली। उसका पडोसी एक अच्छा इनसान था लेकिन ज्यादा शराब पीने की वजह से उसका व्यवहार पूरी तरह से बदल गया। पिछले हफ्ते वो अपने अर्पाटमेंट में मृत पाया गया। उसने अपने नौ साल के बेटे को मार दिया और फिर खुदखुशी कर ली। उसका कोई दोस्त नहीं था जिससे वो बात कर सकता। शराब ही उसकी दोस्त थी। शराब किसी समस्या में न सहायता करती है न सलाह देती है। ऐसे में उस पर भावनाओं को व्यक्त न करने की वजह से दबाव बनने लगा। मैंने इस व्यक्ति के बारे में जितना लिखा उससे ज्यादा मैं इसके बारे में नहीं जानता। लेकिन मैं ये जानता हूँ कि लोगों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहिए, एक सच्चा दोस्त होना, प्यार होना चाहिए। मैं इन आत्माओं की शांति की दुआ करता हूँ।
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