शराब के बिना जश्न मनाकर देखिए – 2 जुलाई 09

लत

कोपेनहेगन में हमने बहुत से युवाओं को जश्न मनाते देखा। वे लारी, ट्रक और वैन पर खड़े होकर हार्न बजा रहे थे, चिल्ला रहे थे और खुशी में झूम रहे थे। मेरे ये पूछने पर कि ये सब क्या कर रहे हैं, मुझे पता चला कि इन्होंने अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली है और इसलिए जश्न मना रहे हैं। सभी 17 से 19 की उम्र के होंगे। लोगों ने मुझे बताया कि ये जश्न मनाने की डेनिश संस्कृति या परंपरा है।

हम इस नजारे को बालकनी से देखने लगे। युवा हमारी ओर देख रहे थे। उन्हें इतना खुश देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। तभी मेरा ध्यान इस बात पर गया कि उन सभी के हाथ में बीयर और अन्य शराब की बोतलें थी। उन सभी ने शराब पी रखी थी। फिर मैंने पूछा कि ये लोग जश्न मना रहे हैं, अच्छी बात है पर ये शराब क्यों पी रहे हैं? किसी ने कहा कि ये इसी तरह जश्न मनाते हैं। लेकिन ये होश में जश्न क्यों नहीं मनाते? क्या जरूरत है शराब पीकर बेहोशी में लोगों का ध्यान खींचने की? शराब पीने के बाद तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि आप क्या कर रहे हैं या आपने क्या किया।

कहीं न कहीं ये परंपरा या विचार बन गया है कि अगर आप पार्टी का जिक्र करेंगे तो शराब होनी आवश्यक है। जबकि शराब ड्रग है। यानि की शराब को जश्न से जोड़ने वाली बात यहां अहम है। इसके सेवन के बाद आप जश्न नहीं मनाते बल्कि शराब जश्न मनाती है। मैं भी लोगों के साथ पार्टी करना चाहता हूँ। अगर मैं होश में नहीं होउंगा कि मैं क्या कर रहा हूँ, आसपास क्या हो रहा है, मेरे लिए ये रोमांच नहीं होगा और मैं खुश नहीं हो पाउंगा। दुर्भाग्य से ये सब गलत हो रहा था। सच में ये बेहद दुखद अनुभव था।

समाज, लोग और खासकर नई पीढ़ी अपने मन से खुश होकर जश्न क्यों नहीं मना सकती? मेरा मानना है कि हमारे जीवन का यह सिद्धांत होना चाहिए: खुश रहिए, जीवन का लुत्फ उठाइए और हँसकर जीवन जी लीजिए|

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