एक बार चिकित्सा सत्र के दौरान एक महिला ने अपनी समस्या के साथ ही एक असाधारण सी बात बताई। पहले उसने कहा कि वो धुम्रपान छोड़ना चाहती है। जब भी मुझसे कोई ये प्रश्न करता है कि 'मैं धुम्रपान कैसे छोड़ू'? मैं हमेशा ये जवाब देता हूँ कि ये आपका निर्णय है। आपने फैसला लिया और आपके अन्दर इसे छोड़ने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
उस महिला ने कहा कि बहुत से लोग कहते हैं कि धुम्रपान छोड़ना मन की बात है। 'लेकिन मेरे साथ कुछ अलग मामला है'। मेरे ये पूछने पर कि आपका मामला अलग किस तरह है उसने बताया कि जब भी वो धुम्रपान छोड़ना चाहती है उसके पास आत्माएं आती हैं और कहती हैं कि सिगरेट पीने में कोई बुराई नहीं है। आत्माएं उसे इस लत को बनाए रखने को कहती हैं और वो कुछ नहीं कर पाती।
मैंने सीधा सा जवाब दिया कि मैं इन सब बातों पर विश्वास नहीं करता। मैं नहीं मानता कि भूत होते हैं। मैं नहीं मानता कि हमें क्या करना है क्या नहीं ये भूत हमें आकर बताते हैं। आपको नहीं लगता कि भूत हों भी तो धुम्रपान करने की बात कहने के अलावा भी तो कुछ कह सकते हैं। आप अपने आपको और दूसरों को मूर्ख बना रही हैं ताकि आपको इस लत को न छोड़ने का बहाना मिल जाए।
रमोना ने जब मेरा जवाब सुना और उसका अनुवाद करने लगी तो उसे लगा कि ऐसा जवाब सुनकर महिला उठेगी और कमरे से बाहर चली जाएगी। लेकिन महिला बैठी रही और कहा कि मुझे लगता है कि 'आप सही कह रहे हैं। मेरी समस्या थी कि जब भी मैं सोती थी कुछ देर बाद ये सोचकर उठ जाती थी कि मेरे आसपास भूत हैं। मुझे लगता था कि वो मेरा गला दबा देंगे और मैं डर जाती थी। लेकिन फिर मैं महसूस करती थी कि वहाँ आत्माएं नहीं हैं। तनाव के बुरे समय में मैं समस्याओं को व्यक्त करने के बजाय दबाती रही। मुझे अपनी सोच बदलनी होगी। मैंने जबसे समस्याओं को व्यक्त करना शुरू किया तबसे भूत चले गए। मुझे लगता है कि भूत होते ही नहीं है'।
आपने देखा कि उस महिला ने स्वयं महसूस किया कि भूत तो उसका वहम था। उसने निकोटिन की लत के लिए बहाना बनाया था। मैंने ऐसे ही बहाने शराब के आदी लोगों से भी सुने हैं। वो कहते हैं कि उनके मृतक रिश्तेदार या पूर्वज शराब पीना चाहते हैं। जबकि बात यही है कि वो खुद पीना चाहते हैं। अपनी लत को बनाए रखने में मामले में लोग अब बहाने बनाने में काफी रचनात्मक हो गए हैं।
वह महिला मेरा सीधा जवाब सुनकर काफी खुश थी। मुझे उम्मीद है धुम्रपान छोड़ने में उसे कुछ मदद मिली होगी। मानव मन दूसरों के लिए न सही पर अपने लिए हमेशा कोई न कोई तरकीब निकाल ही लेता है।
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