नशे के आदी बच्चों के माता-पिता क्या करें – 11 दिसम्बर 08

शहर:
कोलोन
देश:
जर्मनी

एक माँ अपने 15 साल के बेटे की समस्या लेकर मेरे सामने आई। उसने बताया कि उसका बेटा इंटरनेट गेम्स का आदी हो गया है। गेम्स में बेहतर कर दिखाने के लिए वो पैसे के साथ समय भी व्यर्थ करता है। उसने कहा कि अपनी इसी गेम खेलने की लत की वजह से उसने मेरे क्रेडिट कार्ड से 3000 यूरो खर्च कर दिए|

एक अन्य मां ने बताया कि उसका बेटा तो घर पर ड्रग्स लेने लगा है। वहीं एक महिला ने शिकायत की कि उसकी 13 साल की बेटी घर पर नशे में धुत्त आती है। इसी तरह एक की शिकायत थी कि उसकी 16 साल की बेटी सुबह चार बजे पार्टी से घर आती है। वहीं एक ने बताया कि उसका किशोर बेटा तब तक शराब पीता है जब तक बेहोश न हो जाए और अस्पताल ले जाने की नौबत न आ जाए।

ये सब परेशानियां मैं माता-पिता से अक्सर सुनता हूँ। इनको सुनने के बाद मैं सोचता हूँ कि हमारे समाज के युवाओं को क्या हो गया है? इसके पीछे क्या कारण हो सकता है? क्यों वो अपने माता-पिता की नजरों से सम्मान खो रहे हैं? क्यों वो अपने शरीर, मन और आत्मा के साथ गलत कर रहे हैं? ये स्थिति रात-बिरात पैदा नहीं हुई है बल्कि वर्षों की प्रक्रिया का दुष्परिणाम है। शायद स्थिति इतनी बदतर न होती अगर माता-पिता बच्चों की पहली सिगरेट या शराब से ही उन पर ध्यान देना शुरू कर देते।

मैंने इस विषय पर पहले भी बात की है और मुझे लगता है कि ये समाज का महत्वपूर्ण विषय है। इन समस्याओं से हम जूझ रहे हैं और अपने बच्चों व युवाओं के भविष्य के लिए हमें इस पर सोचना होगा। मुझे लगता है कि इन स्थितियों के पैदा होने में कहीं न कहीं माता-पिता भी जिम्मेदार होते हैं। व्यस्तता के चलते ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों को वो समय और प्यार नहीं दे पाते जिनकी अपेक्षा बच्चे करते हैं। उन्हें बच्चे के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। उन्हें अपने काम और मौज-मस्ती में इतना खो नहीं जाना चाहिए। कम से कम बच्चे की खास उम्र में उस पर ध्यान देना अति-आवश्यक है।

मैं बच्चों की स्वतंत्रता का समर्थन करता हूँ। लेकिन एक खास उम्र में जब वे पूरी तरह से विकसित नहीं होते उन्हें मार्गदर्शन की जरूरत होती है। उनको कोई ये बताने वाला होना चाहिए कि ये सही है, ये गलत, ये अच्छा है और ये बुरा है। बड़ों को ये सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे उनकी आज्ञा का पालन करें। इसके लिए उन्हें कड़ा रुख अपनाना होगा। प्यार और स्वतंत्रता होनी चाहिए पर नियंत्रण की भी आवश्यकता है। नियंत्रण से बाहर होने की स्थिति में किशोर गलत रास्ता अपना लेते हैं। आपको उन्हें इसलिए नियंत्रित करना होगा क्योंकि आप उन्हें बहुत प्यार करते हैं और उन्हें किसी कीमत पर भी गलत मार्ग पर जाने नहीं दे सकते। कई बार अच्छा न लगने पर भी आपको कड़ा होकर निर्णय लेना पड़ता है। आपका बच्चा भी इससे खुश न हो शायद पर जब आप दूर की सोचेंगे तो बच्चे के लिए अच्छा होगा।

माता-पिता बच्चे के आदर्श होते हैं। आप स्वयं भी ऐसा कुछ मत कीजिए जो आप अपने बच्चे में देखना नहीं चाहते। अन्यथा वो आपसे जो सुनेंगे वही सीखेंगे और जो आपको करते देखेंगे वही करेंगे। अपने बच्चों को प्रेम कीजिए, अच्छा है। उन्हें स्वतंत्र भी रखिए पर साथ ही उन्हें ये भी बताईए कि क्या गलत है।